Breaking News

काशीपुर :भाजपा छल की राजनीति करती है, पूर्व मुख्यमंत्री व अपने पिता हरीश रावत पर बोल गये बड़ी बात आनंद रावत, शब्द दूत से हुई बातचीत का वीडियो देखें

@शब्द दूत ब्यूरो (11 सितंबर 2026)

कांग्रेस नेता व पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के पुत्र आनंद रावत से ‘शब्द दूत’ ने आज एक खास बातचीत की। दिल्ली से डीडीहाट जातकी समय काशीपुर गिरीताल रोड स्थित कांग्रेस नेता शिवम शर्मा के आवास पर कुछ देर रुकने के दौरान संपादक विनोद भगत ने संक्षिप्त बातचीत की।

प्रश्न: इस समय प्रदेश की राजनीतिक स्थिति काफी उहापोह वाली नजर आ रही है, खासतौर पर कांग्रेस को लेकर। भाजपा लगातार कांग्रेस पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाती रही है। ऐसे में कांग्रेस इन आरोपों का किस तरह जवाब देगी?

आनंद रावत: देखिए, उहापोह की स्थिति जनता के बीच में नहीं है और कांग्रेस पार्टी में भी नहीं है। यह उहापोह की स्थिति केवल भारतीय जनता पार्टी में है। प्रदेश में साढ़े नौ साल से उनका कार्यकाल रहा है और इन साढ़े नौ सालों में जनता के सामने उपलब्धि बताने के लिए उनके पास कुछ भी नहीं है।
मैं पिछले दिनों मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी जी का बयान भी देख रहा था। भारतीय जनता पार्टी के जितने भी कैबिनेट मंत्री और संगठन के पदाधिकारी हैं, वे कांग्रेस पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हैं। जबकि सच्चाई यह है कि ये केवल राजनीतिक आरोप हैं। सत्ता हासिल करने के लिए जनता को गुमराह करने का प्रयास किया गया और उस छल-प्रपंच के माध्यम से भाजपा सत्ता में आई।
कांग्रेस ने अपने शासनकाल में चाहे प्रदेश में हो या देश में, अवस्थापना विकास के कार्य किए। कांग्रेस के विकास को आप देख भी सकते हैं, महसूस भी कर सकते हैं और उसके लाभार्थी आज भी दिखाई देते हैं।
इसके विपरीत भाजपा की योजनाओं की बात करें तो यूसीसी का उदाहरण सामने है। आज तक यूसीसी का एक भी ऐसा लाभार्थी सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया जो यह कहे कि उसे यूसीसी से क्या लाभ मिला।

इसी तरह 2023 में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने कार्यकाल में कथित तौर पर कड़ा नकल विरोधी कानून बनाया। लेकिन 2024 में ही पेपर लीक के मामले सामने आए। हाकम सिंह जैसे लोग कुछ समय कानून के शिकंजे में रहे, लेकिन आज वे फिर खुलेआम घूम रहे हैं। यदि कानून इतना कड़ा था तो उसका प्रभाव कहां दिखाई दे रहा है?

प्रश्न: कांग्रेस पर भाजपा भ्रष्टाचार के आरोप लगाती है और जनता भी कई बार इन आरोपों पर भरोसा करती दिखाई देती है। भाजपा को दोबारा सत्ता मिल जाती है। आखिर ऐसा क्यों हो रहा है?

आनंद रावत: भारतीय जनता पार्टी के घोषणा पत्र का अगर आप अवलोकन करें तो उसमें हाथी के दांत दिखाने के कुछ और होते हैं और खाने के कुछ और। घोषणा पत्र में इनका मूल मंत्र था—सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास। लेकिन आज समाज में देखिए किस तरीके से अविश्वास की भावना पैदा की गई है।

प्रश्न: शुद्धीकरण के मामले में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा साफ कह चुके हैं कि पार्टी का इससे कोई लेना-देना नहीं है। लेकिन उसके बाद जिस तरह की परिस्थितियां बनीं, क्या आपको लगता है कि भाजपा इसमें कहीं न कहीं लिप्त है?

आनंद रावत: जब हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे जी ने राज्यसभा में यह प्रश्न उठाया तो जेपी नड्डा जी खड़े हुए और उन्होंने कहा कि हम इसकी जांच कराएंगे। लेकिन उत्तराखंड में मुख्यमंत्री ने बिना कोई जांच कमेटी गठित किए सीधे तथाकथित आरोपियों को क्लीन चिट दे दी।
पहले एक वीडियो का उल्लेख किया गया, जिसमें धर्म विशेष के नारे लगाए जाने की बात कही गई। बाद में स्पष्ट हुआ कि वह वीडियो एआई जनरेटेड था। इसके बाद बयान भी बदले गए, लेकिन जांच कमेटी नहीं बनाई गई।

प्रश्न: हाल में एक भाजपा नेता पर अधिकारी के साथ मारपीट और उसके चेहरे पर कालिख पोतने का आरोप लगा। जिसका वीडियो भी वायरल हुआ। ऐसे मामलों में कांग्रेस की चुप्पी भी सवाल खड़े करती है। आप इसे किस तरह देखते हैं?

आनंद रावत: अधिकारियों के साथ दुर्व्यवहार और गलत व्यवहार की घटनाएं इस शासनकाल में लगातार सामने आई हैं। प्रदेश स्तर के सचिव स्तर के अधिकारियों के साथ भी मारपीट और गाली-गलौज की घटनाएं सामने आ चुकी हैं।
आज पूरी ब्यूरोक्रेसी भी सरकार की कार्यशैली से पीड़ित है। अपने चहेतों को ठेके देने और बंदरबांट करने के लिए जिस तरीके से अनैतिक कार्य और दबाव बनाया जाता है, वह सबके सामने है।

प्रश्न: पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत जी प्रदेश की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका रखते हैं। लेकिन कई बार ऐसा लगता है कि कांग्रेस के स्थानीय वरिष्ठ नेता उन्हें नजरअंदाज करते हैं। ऐसा क्यों?

आनंद रावत: हरीश रावत जी इस समय केवल कांग्रेस के ही नहीं, बल्कि उत्तराखंड के सभी राजनीतिक दलों में सबसे वरिष्ठ और अनुभवी नेताओं में हैं। वे सबसे वरिष्ठ ऐसे नेता हैं जो आज भी सक्रिय राजनीति में हैं।
सबसे बड़ी बात यह है कि उन पर अभी तक दल-बदल का कोई आरोप नहीं है। उनकी राजनीतिक निष्ठा पर कोई सवाल नहीं उठा सकता।

प्रश्न: भाजपा जब भी उत्तराखंड में कांग्रेस पर हमला करती है तो उसके केंद्र में अक्सर हरीश रावत ही होते हैं। क्या इसका मतलब यह माना जाए कि भाजपा भी उन्हें कांग्रेस का महत्वपूर्ण चेहरा मानती है?

आनंद रावत: बिल्कुल। जनता भी देखती है कि राजनीतिक दलों और कार्यकर्ताओं में निष्ठा महत्वपूर्ण पहलू है। लेकिन आज जिस तरह की राजनीतिक संस्कृति बनाई गई है, उसमें नेताओं के दल बदलने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं।

प्रश्न: जब कांग्रेस में रहते हुए जिन नेताओं पर भाजपा भ्रष्टाचार के आरोप लगाती थी, वही नेता भाजपा में जाने के बाद महत्वपूर्ण पदों पर बैठ जाते हैं। क्या यह भाजपा के भ्रष्टाचार विरोधी अभियान पर सवाल नहीं खड़ा करता?

आनंद रावत: बिल्कुल। अजित पवार इसका एक ज्वलंत उदाहरण हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वयं उन पर गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे, लेकिन कुछ समय बाद वे भाजपा के साथ आ गए और पूरा मामला ठंडे बस्ते में चला गया।
विजय बहुगुणा जी का उदाहरण भी सामने है। जब वे कांग्रेस के मुख्यमंत्री थे, तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देहरादून की जनसभा में उन पर गंभीर आरोप लगाए थे। आज वही विजय बहुगुणा भाजपा में हैं और भाजपा अब उनके खिलाफ भ्रष्टाचार की बात नहीं करती।
इससे साफ पता चलता है कि भाजपा के लिए भ्रष्टाचार का मुद्दा सत्ता हासिल करने का राजनीतिक हथियार है।

प्रश्न: एसआईआर को लेकर कांग्रेस के विरोध का क्या आधार है?

आनंद रावत: एसआईआर चुनाव आयोग की समय-समय पर चलने वाली प्रक्रिया है। पहले भी यह प्रक्रिया हुई है। लेकिन इस बार चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर कई प्रश्नचिह्न खड़े हो रहे हैं।
गरीब और कमजोर तबका इससे सबसे ज्यादा प्रभावित होता है। गरीब व्यक्ति रोज मजदूरी करता है। अगर उसे अपने वोट से संबंधित सुधार के लिए पूरा दिन कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ें तो उसकी मजदूरी प्रभावित होती है।
चुनाव आयोग को यह भी देखना चाहिए कि आपत्ति दर्ज कराने वाले लोग कौन हैं, उनकी विश्वसनीयता क्या है और वे एक साथ इतनी बड़ी संख्या में लोगों के नामों पर आपत्ति क्यों कर रहे हैं।

प्रश्न: 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस की तैयारी किस स्तर पर है?

आनंद रावत: कांग्रेस की तैयारी धरातल पर पूरी तरह हो चुकी है। इस बार हम 45 से अधिक सीटें जीतकर प्रचंड बहुमत के साथ सरकार बनाएंगे।
बूथ स्तर तक काम चल रहा है। प्रदेश स्तर पर संगठन सक्रिय है। हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे जी का दौरा हुआ है। आने वाले समय में प्रियंका गांधी जी और राहुल गांधी जी के कार्यक्रम भी होंगे।

प्रश्न: भाजपा ने मौजूदा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को 2027 के चुनाव का चेहरा बनाने का संकेत दिया है। क्या कांग्रेस को भी चुनाव से पहले अपना मुख्यमंत्री चेहरा घोषित करना चाहिए?

आनंद रावत: भाजपा की कार्यशैली को देखते हुए आप कोई भी अनुमान नहीं लगा सकते। वह कभी भी आखिरी समय में नेतृत्व बदल सकती है। 2021 में भी पुष्कर सिंह धामी जी को चुनाव से कुछ समय पहले मुख्यमंत्री बनाया गया था।
जहां तक कांग्रेस की बात है तो हमारा हाथ का निशान ही हमारा चेहरा है। इस समय प्रदेश में पंचमुखी नेतृत्व है। चुनाव के बाद जब संख्या बल हमारे पक्ष में आएगा तो हमारा शीर्ष नेतृत्व तय करेगा कि मुख्यमंत्री के तौर पर सरकार का नेतृत्व कौन करेगा।

प्रश्न: महिलाओं के लिए भाजपा की कई योजनाएं हैं। इनमें लखपति दीदी योजना भी शामिल है। एक विपक्षी नेता के रूप में आप बताइए कि महिलाओं को इसका कितना लाभ मिला है?

आनंद रावत: भाजपा द्वारा देश के सामने रखे गए आंकड़ों का मूल्यांकन करेंगे तो उसके नेताओं के बयानों में ही विरोधाभास दिखाई देगा।
आज महंगाई की स्थिति देखिए। एक सामान्य महिला के लिए स्कूटी तक एक लाख रुपये या उससे अधिक की आती है। पेट्रोल के दाम करीब सौ रुपये लीटर तक पहुंच चुके हैं और गैस सिलेंडर भी करीब एक हजार रुपये तक पहुंच गया है।
अगर कोई महिला साल में एक लाख रुपये कमाती है तो इसका मतलब महीने में लगभग आठ-दस हजार रुपये की आमदनी है। आज की महंगाई में आठ-दस हजार रुपये महीने की आमदनी का वास्तविक मूल्य क्या रह गया है?
अगर एक गैस सिलेंडर भरवाना है तो करीब एक हजार रुपये चले गए। स्कूटी है तो पेट्रोल का खर्च अलग है। इसके बाद परिवार की दूसरी जरूरतें हैं।
इसलिए केवल यह कह देना कि हमने करोड़ों महिलाओं को लखपति बना दिया, पर्याप्त नहीं है। यह देखना जरूरी है कि उनकी वास्तविक क्रय शक्ति कितनी बढ़ी है और उनका जीवन कितना बेहतर हुआ है।

प्रश्न: यानी आपका कहना है कि योजनाओं के आंकड़ों के बजाय उनके वास्तविक प्रभाव का मूल्यांकन होना चाहिए?

आनंद रावत: बिल्कुल। किसी भी सरकार की सफलता केवल आंकड़ों से नहीं मापी जानी चाहिए। यह देखना चाहिए कि आम आदमी के जीवन में कितना बदलाव आया, महिला वास्तव में आर्थिक रूप से कितनी मजबूत हुई, उसकी आय कितनी बढ़ी और महंगाई के मुकाबले उसकी क्रय शक्ति कितनी बढ़ी। यही असली सवाल हैं और 2027 के चुनाव में जनता इन्हीं सवालों पर सरकार का मूल्यांकन करेगी।

Website Design By Mytesta +91 8809666000

Check Also

धामी के नेतृत्व में 2027 में उत्तराखंड में रिकार्डतोड़ सीटों के साथ भाजपा सरकार :महापौर दीपक बाली

🔊 Listen to this @शब्द दूत ब्यूरो (08 सितंबर 2026) काशीपुर।  महापौर एवं भाजपा नेता …

googlesyndication.com/ I).push({ google_ad_client: "pub-