@शब्द दूत ब्यूरो (30 अगस्त 2026)
न्यूयॉर्क। ‘वन वर्ल्ड, वन ह्यूमैनिटी’ कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने हिंदुत्व, विविधता और मानवता को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि भारत में मुसलमान नहीं होने चाहिए, ऐसी सोच रखने वाला व्यक्ति हिंदू नहीं है।
मोहन भागवत ने कहा कि हिंदुत्व किसी एक पूजा पद्धति तक सीमित नहीं है। भारत की परंपरा अलग-अलग मतों, पंथों और विचारों को स्वीकार करती रही है। उन्होंने कहा कि दुनिया में विविधता स्वाभाविक है, लेकिन इसके पीछे मानवता की एकता का भाव मौजूद है।
भागवत ने कहा कि भारत में रहने वाले सभी लोगों को साथ लेकर चलना ही भारतीय विचार की विशेषता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि किसी व्यक्ति की पहचान के आधार पर उसके साथ भेदभाव नहीं होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ समाज में एकता के लिए संवाद और सेवा को महत्वपूर्ण मानता है। उनके मुताबिक मुस्लिम और ईसाई समाज के लोगों के साथ संवाद बढ़ाने के प्रयास किए गए हैं। सेवा कार्यों में भी किसी व्यक्ति से उसका धर्म पूछकर मदद नहीं की जाती।
आरएसएस प्रमुख ने कहा कि भारत दुनिया को केवल भाषण देकर एकता का संदेश नहीं दे सकता, बल्कि उसे अपने आचरण से यह दिखाना होगा कि अलग-अलग मान्यताओं और संस्कृतियों के लोग मिलकर रह सकते हैं। उन्होंने कहा कि भारत की ताकत उसकी विविधता में है और इसी विविधता को साथ लेकर आगे बढ़ना जरूरी है।
प्रवासी भारतीयों को संबोधित करते हुए भागवत ने कहा कि जिस देश में वे रह रहे हैं, उसके प्रति उनकी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि अमेरिका में रहने वाले भारतीयों को अपनी कर्मभूमि के प्रति ईमानदारी से दायित्व निभाना चाहिए और समाज के लिए भी योगदान देना चाहिए।
मोहन भागवत ने प्रकृति और मानव जीवन के संबंध पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि मनुष्य को केवल अपने लिए नहीं, बल्कि दूसरों और प्रकृति के लिए भी जिम्मेदारी समझनी चाहिए। उनके संबोधन का मुख्य संदेश मानवता, सामाजिक समरसता और विविधता के बीच एकता कायम करने पर केंद्रित रहा।
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