@शब्द दूत ब्यूरो (10 सितंबर 2026)
देहरादून। उत्तराखंड के देहरादून जिले के कालसी विकासखंड स्थित हरिपुर में 17 सितंबर को उत्तराखंड के पहले यमुनाघाट का लोकार्पण मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी करेंगे। विश्वकर्मा दिवस और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस के अवसर पर होने वाले इस कार्यक्रम में साधु-संत समाज और स्थानीय लोग भी मौजूद रहेंगे। घाट के लोकार्पण के अवसर पर होने वाली प्रथम पूजा और आरती प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम से किए जाने की जानकारी सामने आई है।
हरिपुर को यमुना के मैदानी क्षेत्र में प्रवेश का प्रमुख स्थल माना जाता है। जिस प्रकार गंगा के मैदानी क्षेत्र में प्रवेश के बाद हरिद्वार की धार्मिक पहचान बनी है, उसी प्रकार स्थानीय समाज और इतिहास से जुड़े लोग हरिपुर को यमुना का प्रवेश द्वार और “यमुना का हरिद्वार” कहते रहे हैं। हालांकि दोनों तीर्थस्थलों की ऐतिहासिक और धार्मिक पृष्ठभूमि अलग-अलग है।
यमुनाघाट का निर्माण मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) की ओर से करीब दो वर्ष पहले शुरू कराया गया था। इसका शिलान्यास मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने किया था। एमडीडीए के उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी के अनुसार मुख्यमंत्री के निर्देश पर घाट के लोकार्पण की तैयारियां की जा रही हैं। कार्यक्रम में स्थानीय लोगों के साथ संत समाज को भी आमंत्रित किया जा रहा है।
हरिपुर को केवल एक कस्बे के रूप में नहीं, बल्कि आस्था, इतिहास, संस्कृति और प्रकृति के संगम के रूप में देखा जाता है। यहां पहाड़ी क्षेत्र से निकलकर यमुना मैदानी क्षेत्र की ओर आगे बढ़ती है। हरिपुर की एक विशेषता यमुना, टौंस (तमसा), अमलावा और नौरा नदियों का संगम भी है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार प्राचीन समय में यह क्षेत्र यज्ञ, पिंडदान, अस्थि विसर्जन और अन्य धार्मिक संस्कारों का केंद्र रहा है।
कालसी-हरिपुर क्षेत्र को प्राचीन कुलिंद साम्राज्य से भी जोड़ा जाता है। स्थानीय लोक परंपराओं में यहां ऋषि-मुनियों के आश्रम और यज्ञ स्थलों का उल्लेख मिलता है तथा राजा अम्बरीष सहित कई पौराणिक प्रसंगों को इस क्षेत्र से जोड़ा जाता है। हालांकि इन लोकमान्यताओं के सभी पहलुओं के पर्याप्त ऐतिहासिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं, लेकिन स्थानीय समाज में इनके प्रति गहरी आस्था आज भी कायम है।
हरिपुर जौनसार-बावर की विशिष्ट जनजातीय संस्कृति का प्रवेश द्वार भी माना जाता है। यहां से आगे जौनसार-बावर क्षेत्र की लोकसंस्कृति, रीति-रिवाज, लोकगीत और पारंपरिक सामाजिक व्यवस्था की अलग पहचान दिखाई देती है। इस वजह से हरिपुर का महत्व धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ सांस्कृतिक पर्यटन की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जाता है।
स्थानीय इतिहास और लोककथाओं के अनुसार सदियों पहले आई एक भीषण बाढ़ के कारण हरिपुर का पुराना वैभव प्रभावित हुआ और धीरे-धीरे इसकी पहचान धुंधली होती चली गई। इसके बावजूद धार्मिक आस्था बनी रही। अब राज्य सरकार हरिपुर की पुरानी धार्मिक पहचान को पुनर्स्थापित करने की दिशा में काम कर रही है।
हरिपुर में यमुनाघाट और स्नानघाट के निर्माण के साथ श्रद्धालुओं के लिए सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। यमुना तट पर मां यमुना की भव्य प्रतिमा भी स्थापित की गई है। सामाजिक संगठन लोक पंचायत की ओर से स्थापित इस प्रतिमा का लोकार्पण भी मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा किया जाना प्रस्तावित है।
सरकार हरिपुर को धार्मिक पर्यटन के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। श्रीकृष्ण–यमुना तीर्थ सर्किट जैसी योजनाओं के माध्यम से इस क्षेत्र को व्यापक धार्मिक पर्यटन से जोड़ने की संभावनाएं भी तलाशी जा रही हैं। योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से क्षेत्र में पर्यटन के साथ स्थानीय रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की परिकल्पना हरिपुर को यमुना के मैदानी क्षेत्र में प्रथम प्रवेश स्थल के रूप में विशिष्ट पहचान दिलाने की है। सरकार का प्रयास है कि हरिपुर की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करते हुए इसे पर्यटन के मानचित्र पर प्रमुख स्थान दिलाया जाए।
हरिपुर को लेकर यह भी कहा जाता है कि यह एक प्राचीन सनातन तीर्थस्थल रहा है, जिसकी धार्मिक परंपराओं और पौराणिक मान्यताओं का उल्लेख विभिन्न स्थानीय ऐतिहासिक एवं धार्मिक संदर्भों में मिलता है। प्राकृतिक आपदा के कारण इस प्राचीन नगरी का वैभव समाप्त होने के बाद अब इसे फिर से विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है। इसी क्रम में उत्तराखंड का पहला यमुनाघाट बनकर तैयार होना हरिपुर के पुनरुत्थान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
यदि ऐतिहासिक विरासत पर वैज्ञानिक शोध, धार्मिक मान्यताओं का प्रामाणिक दस्तावेजीकरण, पर्यटन सुविधाओं का विस्तार और बेहतर प्रचार-प्रसार साथ-साथ होता है, तो हरिपुर आने वाले समय में उत्तराखंड के प्रमुख धार्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन केंद्रों में अपनी अलग पहचान बना सकता है।
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