@शब्द दूत ब्यूरो (01 सितंबर 2026)
देहरादून। उत्तराखंड में मदरसों को लेकर धामी सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि राज्य में वही मदरसे संचालित हो सकेंगे, जो उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण से मान्यता प्राप्त करने के साथ उत्तराखंड शिक्षा बोर्ड से भी संबद्ध होंगे। मान्यता के लिए निर्धारित नियमों और शर्तों को पूरा नहीं करने वाले मदरसों को बंद करने की कार्रवाई की जाएगी। सरकार के इस रुख के बाद राज्य में पूर्व में उत्तराखंड मदरसा बोर्ड के तहत पंजीकृत 452 मदरसों में से बड़ी संख्या में संस्थानों पर कार्रवाई की आशंका है।
अल्पसंख्यक विभाग के सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते के अनुसार, पूर्व में उत्तराखंड मदरसा बोर्ड में पंजीकृत 452 मदरसों को अब अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण से मान्यता लेनी होगी। जो मदरसे निर्धारित प्रक्रिया के तहत मान्यता नहीं लेंगे, उन्हें बंद किया जाएगा। उन्होंने बताया कि करीब 200 मदरसों की ओर से ऑनलाइन आवेदन प्राप्त हो चुके हैं और इनका मौके पर जाकर सत्यापन कराया जा रहा है।
सरकार की नई व्यवस्था के तहत मदरसों को अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के साथ-साथ उत्तराखंड शिक्षा बोर्ड से भी संबद्ध होना होगा। यहां पढ़ने वाले बच्चों को राष्ट्रीय शिक्षा पाठ्यक्रम के अनुरूप शिक्षा देने की व्यवस्था लागू की जाएगी। अधिकारियों के मुताबिक, इसका उद्देश्य मदरसा शिक्षा व्यवस्था को निर्धारित शैक्षिक मानकों के दायरे में लाना है।
उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के अध्यक्ष प्रो. सुरजीत सिंह गांधी ने कहा कि मान्यता उन्हीं संस्थानों को दी जाएगी, जो आवश्यक दस्तावेज और निर्धारित मानकों को पूरा करेंगे। इनमें मदरसे के भवन की स्थिति, कक्षाओं में बच्चों के बैठने की क्षमता, बिजली, पानी और शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाओं की जानकारी शामिल है। मदरसा संचालकों को अपने बैंक खातों की जानकारी भी उपलब्ध करानी होगी, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि संस्थान को आर्थिक सहायता किन स्रोतों से प्राप्त हो रही है।
प्रो. गांधी के अनुसार, मदरसों में दी जाने वाली धार्मिक शिक्षा के पाठ्यक्रम को लेकर भी प्राधिकरण की भूमिका रहेगी। नई व्यवस्था में अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के दायरे को केवल इस्लामिक संस्थाओं तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि सिख, बौद्ध और ईसाई संस्थाओं को भी इसमें शामिल किया जाएगा।
सरकार की इस सख्ती के बीच मुस्लिम उलेमा और मौलानाओं की ओर से विरोध के स्वर भी सामने आ रहे हैं। वहीं, सरकार का कहना है कि राज्य में शिक्षा संस्थानों के संचालन के लिए बनाए गए नियमों का पालन हर संस्था को करना होगा।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी कई मौकों पर स्पष्ट कर चुके हैं कि उत्तराखंड में ऐसी शिक्षा या विचारधारा को स्थान नहीं दिया जाएगा, जो कट्टरता को बढ़ावा दे। मुख्यमंत्री ने कहा है कि सरकार द्वारा बनाए गए नियम-कानूनों का पालन हर हाल में सुनिश्चित कराया जाएगा और कानून का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होगी।
इससे पहले रुद्रपुर में जश्न-ए-मोहम्मदी जुलूस के दौरान त्रिशूल चौक पर मदरसे बंद किए जाने को लेकर कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों का वीडियो सामने आया था, जो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। मामले में पुलिस ने संबंधित मुफ्ती को रामपुर से गिरफ्तार किया था। इसके बाद जिला प्रशासन ने उससे जुड़े मदरसे को सील कर दिया था। प्रशासन की ओर से बताया गया था कि संबंधित मदरसा अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण की आवश्यक मान्यता के बिना संचालित हो रहा था और निर्धारित नियमों का पालन नहीं कर रहा था।
उत्तराखंड सरकार द्वारा मदरसा बोर्ड की पुरानी व्यवस्था समाप्त कर अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण की नई व्यवस्था लागू किए जाने के बाद अब सभी संबंधित संस्थानों को निर्धारित मानकों के तहत अपनी मान्यता सुनिश्चित करनी होगी। ऐसे में आने वाले दिनों में दस्तावेज, आधारभूत सुविधाओं और शैक्षिक मानकों की जांच के बाद यह तय होगा कि कितने मदरसे नई व्यवस्था के तहत मान्यता हासिल कर पाते हैं और कितने संस्थानों के खिलाफ बंद करने की कार्रवाई होती है।
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