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भारतीय रेलवे की ‘सर्कुलर जर्नी टिकट’ सुविधा से एक टिकट पर कई शहरों की यात्रा, जानिए कैसे मिलेगा फायदा

@शब्द दूत ब्यूरो (09 अगस्त 2026)

नई दिल्ली। अगर आप परिवार या दोस्तों के साथ एक साथ कई शहरों की यात्रा करने की योजना बना रहे हैं, तो भारतीय रेलवे की ‘सर्कुलर जर्नी टिकट’ सुविधा आपके लिए उपयोगी साबित हो सकती है। इस सुविधा के तहत यात्री एक ही टिकट के माध्यम से निर्धारित रूट पर कई शहरों की यात्रा कर सकते हैं और कई मामलों में अलग-अलग टिकट लेने की तुलना में किराए में बचत भी हो सकती है।

सर्कुलर जर्नी टिकट ऐसी यात्रा के लिए जारी किया जाता है, जिसमें यात्री एक स्टेशन से अपनी यात्रा शुरू करता है और कई शहरों या स्टेशनों से होते हुए वापस उसी स्टेशन पर लौटता है। उदाहरण के तौर पर यदि कोई यात्री दिल्ली से आगरा, जयपुर, उदयपुर, अहमदाबाद और मुंबई होते हुए फिर दिल्ली लौटना चाहता है, तो वह इस तरह के रूट के लिए सर्कुलर जर्नी टिकट बनवा सकता है।

इस सुविधा का सबसे बड़ा फायदा यह है कि कई शहरों की यात्रा के लिए हर चरण का अलग टिकट बनवाने की जरूरत नहीं पड़ती। रेलवे के किराया नियमों के अनुसार लंबी दूरी की यात्रा में प्रति किलोमीटर किराया अपेक्षाकृत कम हो सकता है, इसलिए कुछ मामलों में पूरे रूट के लिए सर्कुलर जर्नी टिकट अलग-अलग टिकटों की तुलना में सस्ता पड़ सकता है। हालांकि वास्तविक बचत यात्रा के रूट, दूरी, श्रेणी और उस समय लागू रेलवे के किराया नियमों पर निर्भर करेगी।

सर्कुलर जर्नी टिकट की सबसे महत्वपूर्ण शर्त यह है कि यात्रा जिस स्टेशन से शुरू होती है, उसका समापन भी उसी स्टेशन पर होना चाहिए। यानी यदि यात्रा नई दिल्ली से शुरू हुई है तो बीच में कई शहरों की यात्रा करने के बाद वापस नई दिल्ली लौटना होगा। इस तरह के टिकट का इस्तेमाल पर्यटन, धार्मिक यात्राओं, परिवार के साथ लंबी यात्रा और कई शहरों को एक ही टूर में कवर करने के लिए किया जा सकता है।

इस टिकट में यात्रा के दौरान निर्धारित नियमों के तहत स्टॉपओवर की सुविधा भी मिलती है, यानी यात्री बीच के शहरों में रुककर घूम सकता है और इसके बाद अपनी यात्रा आगे जारी रख सकता है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार सर्कुलर जर्नी टिकट में अधिकतम आठ स्टेशनों पर स्टॉपओवर की सुविधा का प्रावधान बताया जाता है। टिकट की वैधता यात्रा की दूरी और निर्धारित ठहराव के आधार पर तय होती है तथा अधिकतम 56 दिनों तक की वैधता का प्रावधान बताया जाता है। हालांकि टिकट बनवाते समय वर्तमान नियमों की पुष्टि संबंधित रेलवे अधिकारी से करना जरूरी है।

सर्कुलर जर्नी टिकट स्टैंडर्ड और नॉन-स्टैंडर्ड, दोनों तरह के हो सकते हैं। स्टैंडर्ड टिकट रेलवे द्वारा निर्धारित लोकप्रिय पर्यटन या धार्मिक मार्गों के लिए होता है, जबकि नॉन-स्टैंडर्ड टिकट में यात्री अपनी जरूरत के अनुसार पूरा रूट तैयार कर सकता है। रेलवे अधिकारी रूट और दूरी की जांच के बाद उसके अनुसार किराया निर्धारित करते हैं।

इस टिकट को सामान्य आईआरसीटीसी ऑनलाइन बुकिंग की तरह सीधे ऐप से बुक नहीं किया जाता। यात्री को सबसे पहले अपना पूरा यात्रा कार्यक्रम तैयार करना होता है, जिसमें यात्रा का शुरुआती स्टेशन, बीच के सभी शहर, रुकने वाले स्थान और अंतिम स्टेशन शामिल हों। इसके बाद संबंधित प्रमुख रेलवे स्टेशन के वाणिज्यिक कार्यालय या सक्षम रेलवे अधिकारी से संपर्क किया जाता है। रेलवे अधिकारी पूरे रूट और दूरी की गणना कर किराया निर्धारित करते हैं और आवश्यक प्रक्रिया पूरी होने के बाद यात्री को टिकट जारी किया जाता है।

यह बात भी ध्यान रखना जरूरी है कि सर्कुलर जर्नी टिकट मिलने के बाद हर ट्रेन में सीट अपने आप रिजर्व नहीं होती। जिस तारीख को जिस ट्रेन से यात्रा करनी है, उसके लिए अलग से आरक्षण कराना पड़ता है। इसके लिए लागू आरक्षण शुल्क देना होता है, जबकि पूरी यात्रा का किराया दोबारा नहीं देना पड़ता।

इस सुविधा का लाभ खासतौर पर उन यात्रियों को मिल सकता है जो एक ही यात्रा में कई पर्यटन स्थल, धार्मिक स्थल या शहर कवर करना चाहते हैं। हालांकि किराए, वैधता, स्टॉपओवर, छूट और अन्य नियम रेलवे के मौजूदा प्रावधानों के अनुसार तय होते हैं। इसलिए सर्कुलर जर्नी टिकट बनवाने से पहले संबंधित रेलवे स्टेशन या रेलवे के आधिकारिक स्रोत से वर्तमान नियमों और किराए की पुष्टि करना उचित होगा।

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