@शब्द दूत ब्यूरो (24 सितंबर 2026)
ग्रेटर नोएडा। यमुना एक्सप्रेसवे पर बुधवार 23 सितंबर की देर रात एक भीषण हादसे ने निजी स्लीपर बसों में यात्रियों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जेवर क्षेत्र में एयरपोर्ट के पास दयानतपुर गांव के आसपास नोएडा से महोबा जा रही एक निजी एसी स्लीपर बस अचानक आग की लपटों में घिर गई। हादसे में अब तक नौ यात्रियों की मौत की पुष्टि हुई है। पुलिस के अनुसार बस में करीब 35 यात्री सवार थे।
बताया जा रहा है कि बस राज कल्पना ट्रैवल्स की थी। हादसा रात करीब 11 बजे से 12 बजे के बीच हुआ। अधिकांश यात्री उस समय सो रहे थे। अचानक बस में आग लगने की सूचना मिलते ही यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई। आग और धुएं ने इतनी तेजी से बस को अपनी चपेट में लिया कि यात्रियों को बाहर निकलने का पर्याप्त अवसर नहीं मिल पाया। कई यात्रियों ने खिड़कियां तोड़कर बाहर निकलकर अपनी जान बचाई।
हादसे से बचकर निकले यात्रियों ने बताया कि वे बस में सो रहे थे। इसी दौरान किसी ने उन्हें जगाकर बस में आग लगने की जानकारी दी। देखते ही देखते बस के भीतर धुआं भर गया और कुछ दिखाई देना बंद हो गया। यात्रियों के मुताबिक अंदर दम घुटने जैसी स्थिति बन गई थी। अफरा-तफरी और धक्कामुक्की के बीच जो यात्री जहां से निकलने में सफल हुआ, उसने उसी रास्ते से बाहर निकलकर जान बचाई। एक महिला यात्री ने बताया कि उसने घबराहट में अपना सामान तक नहीं उठाया और जूते पहने बिना ही बाहर निकल गई। किसी दूसरे व्यक्ति ने उसे खींचकर बस से बाहर निकाला।
आग की सूचना मिलते ही पुलिस और दमकल विभाग की टीमें मौके पर पहुंचीं। आग बुझाने के लिए करीब पांच दमकल वाहनों के लगाए जाने की जानकारी सामने आई है। काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया। आग की विकरालता को देखते हुए जेवर टोल और फलैदा कट के बीच कुछ समय के लिए यातायात भी रोका गया था।
हादसे में मारे गए यात्रियों के शव बुरी तरह झुलस गए हैं, जिसके कारण शुरुआती जानकारी के मुताबिक मृतकों की पहचान तत्काल नहीं हो सकी। पुलिस और प्रशासन की ओर से पहचान की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। घटना के बाद घायलों को उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हादसे पर शोक व्यक्त करते हुए अधिकारियों को घायलों के समुचित उपचार और प्रभावित परिवारों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।
इस हादसे ने एक बार फिर एक्सप्रेसवे पर दौड़ने वाली निजी स्लीपर बसों की सुरक्षा व्यवस्था को सवालों के घेरे में ला दिया है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या बस में निर्धारित अग्निशमन उपकरण और आपातकालीन निकास व्यवस्था मौजूद थी? क्या फायर एग्जिट यात्रियों के लिए आसानी से इस्तेमाल करने योग्य था? क्या बस की समय-समय पर तकनीकी और सुरक्षा जांच हुई थी? आग इतनी तेजी से कैसे फैली और बस में मौजूद यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकलने में इतनी मुश्किल क्यों हुई—इन सवालों के जवाब जांच के बाद ही सामने आएंगे।
यह हादसा केवल एक बस में आग लगने की घटना नहीं है, बल्कि लंबी दूरी की निजी स्लीपर बसों में यात्रियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर समीक्षा की जरूरत की ओर भी इशारा करता है। एक्सप्रेसवे पर तेज रफ्तार से चलने वाली ऐसी बसों में बड़ी संख्या में यात्री रात के समय सफर करते हैं और अधिकांश यात्री सो रहे होते हैं। ऐसे में आपात स्थिति में कुछ ही मिनटों में सुरक्षित निकासी की व्यवस्था यात्रियों की जिंदगी और मौत के बीच अंतर पैदा कर सकती है।
फिलहाल आग लगने के वास्तविक कारण का पता नहीं चल पाया है। पुलिस और संबंधित विभाग घटना की जांच कर रहे हैं। जांच में बस की तकनीकी स्थिति, फायर सेफ्टी उपकरण, आपातकालीन निकास, चालक-परिचालक की भूमिका और अन्य सुरक्षा मानकों की स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है। इस दर्दनाक हादसे ने यह सवाल जरूर खड़ा कर दिया है कि निजी स्लीपर बसों के संचालन और उनकी सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी कितनी प्रभावी है और यात्रियों की जान की सुरक्षा के लिए निर्धारित नियम वास्तव में जमीन पर किस हद तक लागू हो रहे हैं।
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