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महापौर दीपक बाली के स्वच्छता अभियान पर जन की बात, किसकी जिम्मेदारी है स्वच्छ काशीपुर की? निगम के प्रयासों पर नागरिकों की खरी खरी, देखिए वीडियो

@शब्द दूत ब्यूरो (13 अगस्त 2026)

काशीपुर। शहर की सफाई व्यवस्था को लेकर अक्सर नगर निगम और प्रशासन से सवाल उठाए जाते हैं, लेकिन स्वच्छ और सुंदर काशीपुर के लिए आम जनता की जिम्मेदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। इसी मुद्दे को लेकर शब्द दूत ने शहर के नागरिकों से बातचीत की। अधिकांश नागरिकों ने माना कि नगर निगम की ओर से सफाई व्यवस्था में सुधार के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन जनता के सहयोग के बिना शहर को पूरी तरह गंदगी मुक्त बनाना संभव नहीं है।

नागरिकों का कहना था कि अब घर-घर कूड़ा उठाने के लिए वाहन पहुंच रहे हैं और लोग भी अपने घर का कूड़ा उनमें डाल रहे हैं। इससे पहले की तुलना में सड़कों पर बिखरा कूड़ा काफी कम दिखाई देता है। कई लोगों ने नगर निगम की मौजूदा सफाई व्यवस्था को बेहतर बताते हुए कहा कि महापौर दीपक बाली की ओर से सफाई को लेकर किए जा रहे प्रयासों का असर शहर में दिखाई दे रहा है।

हालांकि नागरिकों ने यह भी कहा कि सफाई की पूरी जिम्मेदारी केवल नगर निगम की नहीं हो सकती। लोगों को भी अपने घरों की तरह घर के आसपास और सार्वजनिक स्थानों को साफ रखने की आदत डालनी होगी। लोगों का कहना था कि ‘खाया और फेंक दिया’ वाली मानसिकता बदलने की जरूरत है। सूखा और गीला कूड़ा निर्धारित स्थान पर रखा जाए और कूड़ा वाहन आने पर उसी में दिया जाए तो सड़कों पर गंदगी काफी हद तक कम की जा सकती है।

बातचीत के दौरान शहर में गंदगी के दूसरे कारण भी सामने आए। नागरिकों ने बताया कि नालियों से निकाला गया कूड़ा कई बार सड़क किनारे पड़ा रहता है, जिसे आवारा पशु इधर-उधर फैला देते हैं। वहीं मकान निर्माण और मरम्मत के दौरान सड़क किनारे डाल दी गई रेत, बजरी और निर्माण सामग्री भी लंबे समय तक पड़ी रहती है। इससे सड़कें संकरी होने के साथ-साथ गंदगी और जलभराव की समस्या भी बढ़ती है।

लोगों ने प्लास्टिक और पॉलिथीन के इस्तेमाल पर भी चिंता जताई। उनका कहना था कि प्लास्टिक कचरा नालियों में पहुंचने से जल निकासी बाधित होती है और बारिश के दौरान जलभराव की समस्या गंभीर हो जाती है। इसके लिए केवल दुकानदारों या ठेले वालों को जिम्मेदार ठहराने के बजाय नागरिकों को भी अपनी आदत बदलनी होगी और प्लास्टिक कचरे को खुले में फेंकने से बचना होगा।

कुछ नागरिकों ने शहर के उन इलाकों का भी उल्लेख किया, जहां बारिश के दौरान जलभराव लंबे समय तक बना रहता है। मजरा, मुंशीराम चौराहा, किला मोहल्ला, रतन सिनेमा रोड और डाकखाने के आसपास जलभराव की समस्या को लेकर लोगों ने स्थायी समाधान की जरूरत बताई। हालांकि नागरिकों ने यह भी कहा कि नालियों की सफाई और जल निकासी के लिए नगर निगम की ओर से किए जा रहे प्रयासों से कई स्थानों पर पानी पहले की अपेक्षा तेजी से निकल रहा है।

महापौर दीपक बाली की ओर से वार्ड स्तर पर स्वच्छता अभियान और स्वच्छता चौपाल जैसी पहल को लेकर भी नागरिकों ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी। लोगों का कहना था कि ऐसे अभियानों का प्रभाव तभी स्थायी होगा, जब इन्हें केवल सफाई अभियान तक सीमित न रखकर लोगों की आदत बदलने से जोड़ा जाए।

नागरिकों ने बच्चों को स्वच्छता अभियान से जोड़ने का सुझाव भी दिया। उनका कहना था कि स्कूलों में बच्चों को स्वच्छता के प्रति जागरूक किया जाए। बच्चे जब घर जाकर अपने माता-पिता को कूड़ा इधर-उधर न फेंकने और घर के बाहर भी सफाई रखने के लिए टोकेंगे तो इसका समाज पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

लोगों ने कहा कि नगर निगम सफाई के लिए संसाधन, कर्मचारी और कूड़ा वाहन उपलब्ध करा सकता है, लेकिन उन संसाधनों का सही इस्तेमाल करना नागरिकों की जिम्मेदारी है। यदि जनता सड़क, नाली और सार्वजनिक स्थानों पर कूड़ा फेंकने से बचे और निर्धारित व्यवस्था के अनुसार कूड़ा नगर निगम के वाहनों को दे, तो शहर को स्वच्छ रखने में बड़ी मदद मिल सकती है।

नागरिकों का साफ कहना था कि स्वच्छ काशीपुर की जिम्मेदारी नगर निगम और जनता दोनों की है। नगर निगम अपनी व्यवस्था को लगातार बेहतर करे और नागरिक अपने कर्तव्यों का पालन करें, तभी शहर को वास्तविक अर्थों में गंदगी मुक्त और सुंदर बनाया जा सकता है।

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