Breaking News

उत्तराखंड कांग्रेस में फिर बगावत की आहट? खड़गे की सभा के बाद पाला बदलने की चर्चाओं ने बढ़ाई सियासी हलचल

@शब्द दूत ब्यूरो (13 अगस्त 2026)

उत्तराखंड की राजनीति में कांग्रेस के भीतर एक बार फिर सियासी हलचल तेज होने की चर्चाएं हैं। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के हल्द्वानी दौरे के बाद पार्टी के भीतर गुटबाजी और वरिष्ठ नेताओं की नाराजगी को लेकर राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं।

हालांकि, कांग्रेस के भीतर किसी बड़े टूट की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है, लेकिन चर्चाओं ने प्रदेश की सियासत को जरूर गरमा दिया है। इन चर्चाओं के बीच पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल के भतीजे दिनेश कुंजवाल के कांग्रेस छोड़कर उत्तराखंड क्रांति दल का दामन थामने को भी महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम के रूप में देखा जा रहा है। जागेश्वर विधानसभा क्षेत्र में कुंजवाल परिवार का लंबे समय से राजनीतिक प्रभाव रहा है। ऐसे में इस परिवार से जुड़े व्यक्ति का कांग्रेस से अलग होना पार्टी के लिए राजनीतिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।

राजनीतिक जानकारों के बीच यह चर्चा भी है कि पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत खेमे से जुड़े कुछ नेता प्रदेश कांग्रेस की मौजूदा कार्यशैली से असहज हैं। हरीश रावत और उनके समर्थकों को प्रदेश संगठन में अपेक्षित राजनीतिक महत्व नहीं मिलने की बातें लंबे समय से कांग्रेस के भीतर चर्चा का विषय रही हैं। हरीश रावत के पुत्र आनंद रावत को लेकर भी ऐसी ही चर्चाएं होती रही हैं कि संगठन में उनकी सक्रिय भूमिका पहले जैसी नहीं रह गई है।खड़गे की हल्द्वानी जनसभा में पिथौरागढ़ विधायक मयूर महर की अनुपस्थिति ने भी इन चर्चाओं को हवा दी। कांग्रेस की ओर से हरीश रावत और मयूर महर की अनुपस्थिति को स्वास्थ्य संबंधी कारणों से जोड़कर बताया गया, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे पार्टी के भीतर चल रही नाराजगी के संदर्भ में भी देखा जा रहा है। इन अटकलों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

इसी तरह वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह का हल्द्वानी में खड़गे की सभा में नजर नहीं आना भी चर्चा का विषय बना। राजनीतिक हलकों में कहा गया कि वे देहरादून में थे, जबकि हल्द्वानी में उनके पुत्र की मौजूदगी देखी गई। इसे भी कुछ लोग वरिष्ठ नेताओं की कथित नाराजगी के संकेत के तौर पर देख रहे हैं।इधर देहरादून से दिल्ली तक कांग्रेस के कुछ विधायकों और पूर्व विधायकों के संभावित पाला बदलने की चर्चाएं तेज होने का दावा किया जा रहा है।

राजनीतिक चर्चाओं के मुताबिक कुछ नेता भारतीय जनता पार्टी का रुख कर सकते हैं, जबकि कुछ के उत्तराखंड क्रांति दल के संपर्क में जाने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, इन दावों के संबंध में संबंधित नेताओं या दलों की ओर से कोई स्पष्ट आधिकारिक घोषणा सामने नहीं आई है। उत्तराखंड क्रांति दल को लेकर भी पिछले कुछ समय से राजनीतिक विश्लेषकों की दिलचस्पी बढ़ी है।

राज्य की क्षेत्रीय राजनीति में यूकेडी की भूमिका को लेकर नए सिरे से चर्चा हो रही है और पार्टी को तीसरी राजनीतिक शक्ति के रूप में स्थापित करने की कोशिशें दिखाई दे रही हैं। ऐसे में यदि कांग्रेस के असंतुष्ट नेता यूकेडी का रुख करते हैं तो इसका असर राज्य की आगामी राजनीति पर पड़ सकता है। वहीं, भाजपा को लेकर भी राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं हैं कि कांग्रेस के कुछ मौजूदा विधायक उसके संपर्क में हैं। कुछ राजनीतिक सूत्रों का दावा है कि ऐसे नेताओं की भाजपा के शीर्ष नेतृत्व से मुलाकातें भी हुई हैं। हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

चुनावी राजनीति में इस तरह की चर्चाएं अक्सर तेज होती हैं और अंतिम तस्वीर संबंधित नेताओं के औपचारिक फैसले के बाद ही स्पष्ट होती है।भाजपा लगातार तीसरी बार उत्तराखंड में सरकार बनाने की रणनीति पर काम कर रही है। ऐसे में विपक्षी दल कांग्रेस के भीतर होने वाली हर राजनीतिक हलचल भाजपा के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है। दूसरी ओर कांग्रेस भी मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और भाजपा सरकार को घेरने के लिए लगातार राजनीतिक और सोशल मीडिया अभियान चला रही है।

हल्द्वानी से लेकर देहरादून तक सामने आए हालिया राजनीतिक घटनाक्रमों ने कांग्रेस के भीतर संगठनात्मक समन्वय और गुटीय राजनीति को लेकर सवाल जरूर खड़े किए हैं। लेकिन क्या यह असंतोष वास्तव में किसी बड़े राजनीतिक विद्रोह में बदलने वाला है या फिर यह महज संगठन के भीतर चलने वाली खींचतान तक सीमित रहेगा, इसका जवाब आने वाले दिनों में ही मिलेगा। फिलहाल उत्तराखंड कांग्रेस में बगावत की चर्चाओं ने प्रदेश की सियासत का तापमान बढ़ा दिया है।

यदि आने वाले कुछ सप्ताह में कांग्रेस के विधायक या प्रमुख नेता औपचारिक रूप से पाला बदलते हैं तो यह कांग्रेस के लिए बड़ा राजनीतिक झटका हो सकता है। वहीं यदि ये चर्चाएं सिर्फ राजनीतिक अटकल साबित होती हैं तो पार्टी नेतृत्व के लिए अपने असंतुष्ट नेताओं को एकजुट रखने की चुनौती फिर भी बनी रहेगी। आने वाला समय बताएगा कि खड़गे की हल्द्वानी सभा के बाद उठी यह सियासी हलचल केवल चर्चा है या उत्तराखंड कांग्रेस में किसी बड़े राजनीतिक बदलाव की दस्तक।

Website Design By Mytesta +91 8809666000

Check Also

‘मेरे घर में भी एक जेन जी और एक अल्फा जी…’ युवा विद्यार्थी संवाद में सीएम धामी के इस अंदाज पर छात्रों ने बजाईं तालियां, बोले- युवाओं की सोच को करीब से समझता हूं

🔊 Listen to this @शब्द दूत ब्यूरो (11 अगस्त 2026) देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी …

googlesyndication.com/ I).push({ google_ad_client: "pub-