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स्वच्छता चौपाल से काशीपुर में नई उम्मीद: पहल महापौर ने कर दी, अब गेंद जनता के पाले में, कैसे खेलेगी स्वच्छता का खेल?

@शब्द दूत ब्यूरो (12 अगस्त 2026)

काशीपुर। शहर को स्वच्छ बनाने के लिए केवल सफाई कर्मचारी बढ़ा देना, नई कूड़ा गाड़ियां लगा देना या जगह-जगह अभियान चला देना पर्याप्त नहीं है। असली बदलाव तब आता है, जब सफाई व्यवस्था सरकारी कार्यक्रम से निकलकर नागरिकों की आदत और जिम्मेदारी बन जाती है। इसी सोच के साथ काशीपुर के आवास विकास वार्ड नंबर 17 में शुरू हुई ‘स्वच्छता चौपाल’ को एक अभिनव पहल के रूप में देखा जा सकता है।

महापौर दीपक बाली ने इस चौपाल के माध्यम से जिस तरह अधिकारियों के मंच से भाषण देने के बजाय नागरिकों के बीच बैठकर संवाद किया, वह अपने आप में महत्वपूर्ण है। यहां सफाई को केवल नगर निगम की जिम्मेदारी नहीं बताया गया, बल्कि नागरिकों को भी इस व्यवस्था का साझेदार बनाने की कोशिश की गई। कचरा अलग-अलग रखने, डस्टबिन के इस्तेमाल, सफाई मित्रों के सम्मान, पौधारोपण और सार्वजनिक स्थानों को अपना समझने जैसे विषयों को खेल और संवाद के माध्यम से समझाने का प्रयास किया गया।

यह प्रयोग इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि काशीपुर में स्वच्छता को लेकर चुनौती केवल संसाधनों की नहीं, नागरिक व्यवहार की भी है। पिछले समय में स्वच्छता सर्वेक्षण से जुड़ी रिपोर्टों में काशीपुर की स्थिति पर सवाल उठ चुके हैं। वहीं नगर निगम की ओर से सफाई व्यवस्था मजबूत करने के लिए नए कूड़ा संग्रहण वाहन और जनजागरूकता अभियान भी चलाए गए हैं।

ऐसे में स्वच्छता चौपाल की सबसे बड़ी उपलब्धि यह हो सकती है कि यह सवाल केवल नगर निगम से नहीं पूछती कि ‘शहर कब साफ होगा?’, बल्कि नागरिकों से भी पूछती है—‘शहर को साफ रखने में आपकी भूमिका क्या होगी?’

महापौर दीपक बाली ने शुरुआत कर दी है। लेकिन किसी भी स्वच्छता अभियान की असली परीक्षा नगर निगम के कार्यक्रम खत्म होने के बाद होती है।

चौपाल में डस्टबिन बांट दिए जाएं, कूड़ा वाहन घर तक पहुंच जाएं और कर्मचारी नियमित सफाई करें—इसके बाद भी यदि नागरिक घर का कचरा सड़क किनारे, नाली में या खाली प्लॉट में डालते रहें तो पूरी व्यवस्था फिर उसी जगह पहुंच जाएगी।

यही वह बिंदु है जहां काशीपुर की जनता की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण हो जाती है। नगर निगम एक तरफ से व्यवस्था बनाए और जनता दूसरी तरफ से उसका इस्तेमाल करे—तभी परिणाम दिखाई देगा। अगर घर से निकलने वाला कचरा अलग-अलग करके कूड़ा गाड़ी को दिया जाता है, सड़क पर कचरा फेंकने से लोग खुद रोकते हैं और अपने आसपास की सफाई को अपनी जिम्मेदारी मानते हैं, तो परिवर्तन केवल दिखाई नहीं देगा, बल्कि महसूस भी होगा।

केंद्र सरकार के स्वच्छ भारत मिशन में भी अब केवल सफाई कराने के बजाय व्यवहार परिवर्तन और नागरिक भागीदारी पर जोर दिया जा रहा है। पड़ोसी हरिद्वार में भी कचरा फेंकने वालों को दंडित करने के बजाय संवाद और सकारात्मक तरीके से समझाने की पहल की गई है।

काशीपुर के सामने अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि एक पक्ष की पहल का दूसरा पक्ष कितना उपयोग करता है?मान लीजिए नगर निगम ने घर-घर दो डस्टबिन पहुंचा दिए। क्या नागरिक उनमें गीला और सूखा कचरा अलग रखेंगे?कूड़ा वाहन घर तक पहुंचता है। क्या लोग सड़क पर कचरा डालने के बजाय उसी वाहन को कचरा देंगे?

नालियों की सफाई होती है। क्या उसके अगले दिन फिर पॉलीथिन और प्लास्टिक उसी नाली में पहुंच जाएगी?किसी पार्क को सुंदर बनाया जाता है। क्या लोग वहां कूड़ा नहीं फेंकेंगे?और सबसे महत्वपूर्ण—अगर कोई व्यक्ति सार्वजनिक स्थान पर कचरा फेंकता है, तो क्या आसपास खड़े लोग उसे रोकेंगे?

इन सवालों के जवाब ही तय करेंगे कि स्वच्छता चौपाल एक कार्यक्रम बनकर रह जाती है या काशीपुर में नागरिक स्वच्छता आंदोलन की शुरुआत करती है।

स्वच्छता में सहयोग करने वाले परिवारों को स्वच्छ परिवार प्रमाण पत्र और निर्धारित प्रक्रिया पूरी करने पर हाउस टैक्स में 10 प्रतिशत रिबेट देने की बात इस पहल को केवल अपील तक सीमित नहीं रहने देती, बल्कि नागरिकों को प्रोत्साहन भी देती है।

ऐसे प्रोत्साहन दूसरे शहरों में भी स्वच्छ व्यवहार को बढ़ावा देने के लिए इस्तेमाल किए जा रहे हैं। उदाहरण के तौर पर गाजियाबाद में गीला-सूखा कचरा अलग देने वाले परिवारों के लिए 10 प्रतिशत हाउस टैक्स छूट की व्यवस्था की खबर सामने आई है।

लेकिन किसी भी प्रोत्साहन की सफलता उसकी घोषणा से नहीं, उसके पारदर्शी और नियमित क्रियान्वयन से तय होगी। काशीपुर में भी यदि नागरिकों को स्पष्ट तरीके से बताया जाए कि प्रमाण पत्र कैसे मिलेगा, निगरानी कैसे होगी और रिबेट कब मिलेगा, तो यह योजना लोगों को जोड़ने का प्रभावी माध्यम बन सकती है।

स्वच्छता चौपाल का एक महत्वपूर्ण संदेश सफाई कर्मियों के सम्मान से भी जुड़ा है। हम अक्सर साफ सड़क देखते हैं, लेकिन उस सड़क को साफ करने वाले व्यक्ति को नहीं देखते। हम साफ नाली देखते हैं, लेकिन उसमें उतरकर गंदगी निकालने वाले कर्मचारी की मेहनत को भूल जाते हैं।

जब तक सफाई को केवल ‘किसी और का काम’ समझा जाएगा, तब तक स्वच्छ शहर का सपना अधूरा रहेगा।

जरूरत इस बात की है कि सफाई मित्र के प्रति सम्मान केवल किसी कार्यक्रम में तालियों तक सीमित न रहे। नागरिक उनके काम को समझें और अपनी ओर से गंदगी कम करने का प्रयास करें। यदि हम गंदगी पैदा करना कम कर दें तो सफाई कर्मियों पर पड़ने वाला बोझ भी कम होगा।

महापौर दीपक बाली की इस पहल में सबसे सकारात्मक बात यह है कि उन्होंने स्वच्छता को केवल सफाई अभियान न मानकर संवाद का विषय बनाया है। पहले वार्ड में चौपाल, फिर अन्य वार्डों तक पहुंचने की योजना—यदि यह लगातार चलती है तो लोगों में नई ऊर्जा पैदा हो सकती है।

लेकिन यहां एक सावधानी भी जरूरी है। स्वच्छता चौपाल जितनी जिम्मेदारी नगर निगम की है, उतनी ही नागरिकों की भी। नगर निगम से व्यवस्था की मांग करना नागरिक का अधिकार है, लेकिन व्यवस्था मिलने के बाद उसका सही उपयोग करना नागरिक का कर्तव्य है।

शहर की सड़क पर पड़ा एक कचरे का टुकड़ा यह बताता है कि गलती केवल व्यवस्था की है या हमारी आदत की भी। नाली में फंसी पॉलीथिन केवल सफाई व्यवस्था की समस्या नहीं, बल्कि उस व्यक्ति की जिम्मेदारी भी है जिसने उसे वहां पहुंचाया।दीपक बाली ने एक शुरुआत कर दी है। उन्होंने लोगों के बीच जाकर सवाल रखा है। अब जवाब काशीपुर की जनता को देना है—भाषण से नहीं, अपने व्यवहार से।

अगर लोग डस्टबिन का इस्तेमाल करते हैं, कचरा अलग-अलग देते हैं, सफाई मित्रों का सम्मान करते हैं, पौधे लगाने के साथ उनकी देखभाल करते हैं और सड़क-पार्क-नालियों को भी अपने घर का हिस्सा मानते हैं, तो स्वच्छता चौपाल निश्चित रूप से काशीपुर में नई ऊर्जा का संचार कर सकती है।

लेकिन यदि चौपाल खत्म होते ही पुरानी आदतें वापस लौट आईं, सड़क किनारे कचरा फिर दिखाई देने लगा और नालियां फिर पॉलीथिन से भरने लगीं, तो यह पहल भी बाकी अभियानों की तरह एक कार्यक्रम बनकर रह जाएगी।

काशीपुर को स्वच्छ बनाने की पहली पहल महापौर और नगर निगम ने कर दी है। अब असली सवाल यह है कि शहर की जनता इस पहल को कितना आगे ले जाती है।

क्योंकि अंततः शहर केवल नगर निगम नहीं बनाता—शहर उसके नागरिक बनाते हैं।और शायद आने वाले महीनों में काशीपुर के लिए सबसे बड़ा सवाल यही होगा—

“महापौर ने स्वच्छता की चौपाल लगा दी, अब क्या काशीपुर की जनता अपने घर से स्वच्छता की शुरुआत करेगी?”

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