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यात्रा वृतांत भुवनेश्वर : बिंदु सागर झील और लिंगराज मंदिर की अनुभूति,भगवान सूर्य की चमत्कारी मूर्ति आपको देखकर मुस्कराने लगती है

@विनोद भगत

उड़ीसा की राजधानी भुवनेश्वर, जिसे मंदिरों का शहर भी कहा जाता है, मेरी यात्रा की अगली मंज़िल बना। शहर के मध्य भाग में स्थित लिंगराज मंदिर और उसके ठीक उत्तर में स्थित बिंदु सागर झील की ओर जब मेरा रुख हुआ, तब तक मैं नहीं जानता था कि यह अनुभव मेरे भीतर एक स्थायी छाप छोड़ जाएगा।

बिंदु सागर झील — यह सिर्फ एक जलाशय नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक ऊर्जा का केन्द्र है। लगभग 1300 फीट लंबी और 700 फीट चौड़ी इस झील का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व अद्वितीय है। कहा जाता है कि इस झील का जल पवित्र है और इसका संबंध विभिन्न तीर्थों से है। झील के चारों ओर बसी शांति और हरियाली मानो मन को भीतर से शांत कर देती है। स्थानीय लोग यहाँ पिकनिक मनाने भी आते हैं, लेकिन वातावरण हमेशा एक विशेष गरिमा से भरा रहता है।

पर्यटन विभाग ने इस झील के मूल स्वरूप को बनाए रखते हुए इसे सजाया-संवारा है, जिससे यह स्थान ना केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि एक सुंदर पर्यटक स्थल भी बन चुका है। झील के चारों ओर बसे छोटे मंदिर और धूप में चमकती इसकी जलधारा आत्मा को छू लेने वाली अनुभूति देती है।

झील के ठीक उत्तर में स्थित है लिंगराज मंदिर — भुवनेश्वर का सबसे प्राचीन और भव्य मंदिर। माना जाता है कि यह मंदिर लगभग 1400 वर्ष पुराना है और छठी शताब्दी के अभिलेखों में भी इसका वर्णन मिलता है। यह मंदिर भगवान त्रिभुवनेश्वर को समर्पित है, जिन्हें भगवान शिव का स्वरूप माना जाता है।

जैसे ही मैं मंदिर के मुख्य द्वार के पास पहुँचा, एक अलग ही वातावरण का अनुभव हुआ — घंटियों की मधुर ध्वनि, मंदिर की कलात्मक मूर्तियाँ, लाल बलुआ पत्थर की दीवारें, और श्रद्धालुओं की आस्था से भरी आँखें।

हालाँकि गैर-हिंदुओं को मंदिर में प्रवेश की अनुमति नहीं है, लेकिन उनके लिए एक विशेष चबूतरा बनाया गया है, जहाँ से वे मंदिर की अलौकिक सुंदरता का बाहरी दृश्य देख सकते हैं। मंदिर के भीतर मोबाइल और कैमरे ले जाना सख्त वर्जित है। वास्तव में, कोई फोटो लेने का प्रयास करे तो उसके विरुद्ध कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है। अतः मैं जो फोटो साझा कर रहा हूँ, वह गूगल के सौजन्य से है।

अब बात करते हैं मंदिर के भीतर की उस चमत्कारी प्रतिमा की, जिसने मुझे अभिभूत कर दिया। भगवान सूर्य की एक ऐसी मूर्ति है, जिसे देखकर आप ठिठक जाते हैं। जब आप इस प्रतिमा के ठीक सामने बैठते हैं और मुस्कराते हैं, तो ऐसा प्रतीत होता है कि वह प्रतिमा भी उत्तर में मुस्कराने लगती है। इस अद्भुत दृश्य को देखकर मेरी आँखें आश्चर्य और श्रद्धा से भर उठीं।

मंदिर परिसर में बिताया गया प्रत्येक क्षण एक अलौकिक अनुभव था — वहाँ की गूंजती आरती, पंडितों की स्वर लहरियाँ, और पत्थर की दीवारों से टकराकर लौटती हवा की सरसराहट। यह सब कुछ मिलकर मेरे भीतर एक शांत आध्यात्मिक कंपन उत्पन्न कर रहे थे।

इस यात्रा ने मुझे न केवल भुवनेश्वर की धार्मिक समृद्धि से परिचित कराया, बल्कि भारत की आस्था, कला और संस्कृति के उस गूढ़ संसार की झलक भी दी, जिसे शब्दों में बांधना कठिन है।

अगर आप भी कभी उड़ीसा जाएँ, तो बिंदु सागर झील और लिंगराज मंदिर की यात्रा अवश्य करें। यह न केवल एक पर्यटक स्थल है, बल्कि आत्मा से जुड़ने का एक पवित्र माध्यम भी।

लिंगराज मंदिर के चित्र गूगल से लिये गये हैं जबकि बिंदुसागर झील का फोटो लेखक ने खुद खींचा है।

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