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शरजील इमाम की याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट का पुलिस को नोटिस, दो हफ्तों में मांगा जवाब

@शब्द दूत ब्यूरो (11 मार्च 2024)

दिल्ली हाई कोर्ट ने सोमवार को शरजील इमाम की याचिका पर दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया है. शरजील ने UAPA और देशद्रोह मामले में जमानत देने से इनकार करने के ट्रायल कोर्ट के फैसले को चुनौती दी थी. जिसपर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने ये नोटिस जारी किया है. शरजीम पर सीएए विरोधी आंदोलन के दौरान अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी और दिल्ली के जामिया इलाके में भड़काऊ भाषण देने और दिल्ली में दंगे भड़काने जैसे गंभीर आरोप हैं.

सुरेश कुमार कैत और मनोज जैन की पीठ ने दिल्ली पुलिस से दो हफ्तों के अंदर जवाब मांगा है और मामले की अगली सुनवाई अप्रैल में रखी है. शरजील इमाम पर दिल्ली पुलिस की स्पेशल ब्रांच ने 2020 में मामला दर्ज किया था. 28 जनवरी 2020 को शरजील की गिरफ्तारी हुई थी. शरजील पर शुरुआत में राजद्रोह का केस लगाया गया था, बाद में इसमें UAPA को भी जोड़ दिया गया.

जमानत देने से क्यों किया था कोर्ट ने इनकार?

17 फरवरी को पारित आदेश में ट्रायल कोर्ट ने शरजील की जमानत खारिज करते हुए कहा था, “भले ही नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के खिलाफ शरजील इमाम की स्पीच में लोगों से हथियार उठाने की अपील न हो, लेकिन उन्होंने लोगों को इकट्ठा किया जो कि दिल्ली दंगे भड़कने का ‘मुख्य कारण’ हो सकता है. कड़कड़डूमा कोर्ट के न्यायाधीश समीर बाजपेयी ने अपने आदेश में कहा था कि इमाम की स्पीच इतनी एग्रेसिव थी कि उन्होंने विशेष समुदाय के लोगों के दिमाग पर कब्जा कर लिया और उन्हें गलत एक्टिविटी में हिस्सा लेने के लिए ‘उकसाया’ जिसकी वजह से दंगे हुए.

कौन से भाषण पर दर्ज हुआ था मामला?

शरजील इमाम शाहीन बाग प्रोटेस्ट को खड़ा करने वालों में से एक हैं. पुलिस का आरोप है कि 2019 में अलीगढ़ यूनिवर्सिटी और जामिया इलाके में दिए गए उनके भाषणों से दंगे भड़के. इन्हीं वजहों से वे 28 जनवरी 2020 से न्यायिक हिरासत में हैं.

कौन सी धाराओं में दर्ज है केस?

कोर्ट ने पिछले साल जनवरी में इमाम के खिलाफ FIR में आरोप तय किए थे. जिसमें IPC की धारा 124ए (देशद्रोह), 153ए (धर्म आदि के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना), 153बी (राष्ट्रीय-एकीकरण के लिए हानिकारक आरोप, दावे), 505 (सार्वजनिक उत्पात को बढ़ावा देने वाले बयान) के तहत अपराध का आरोप लगाया गया है. UAPA की धारा 13 (गैरकानूनी गतिविधियों के लिए सजा) भी लगाई गई थी.

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