धूप और उमस के बीच छात्राओं को काफी देर तक पैदल चलना पड़ा। इसके बाद कई छात्राओं की तबीयत बिगड़ने लगी। किसी को चक्कर आया तो किसी ने कमजोरी और घबराहट की शिकायत की। कुछ छात्राएं बेहोश होकर गिर गईं। इससे कार्यक्रम स्थल पर अफरा-तफरी की स्थिति बन गई।
@शब्द दूत ब्यूरो (14 अगस्त 2026)
सिंगरौली। मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले के चितरंगी में आयोजित तिरंगा यात्रा उस समय सवालों के घेरे में आ गई, जब तेज धूप और उमस के बीच यात्रा में शामिल कई छात्राओं की अचानक तबीयत बिगड़ गई। करीब दो दर्जन छात्राओं को कमजोरी, घबराहट और चक्कर आने की शिकायत के बाद अस्पताल पहुंचाया गया। इनमें कुछ छात्राओं के बेहोश होकर जमीन पर गिरने की भी जानकारी सामने आई है।
दरअसल, मध्य प्रदेश में चल रहे ‘हर घर तिरंगा’ अभियान के तहत चितरंगी में करीब पांच किलोमीटर लंबी तिरंगा यात्रा का आयोजन किया गया था। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्कूली छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया। यात्रा में पंचायत एवं ग्रामीण विकास राज्य मंत्री राधा सिंह की मौजूदगी भी प्रस्तावित थी।
बताया गया कि धूप और उमस के बीच छात्राओं को काफी देर तक पैदल चलना पड़ा। इसके बाद कई छात्राओं की तबीयत बिगड़ने लगी। किसी को चक्कर आया तो किसी ने कमजोरी और घबराहट की शिकायत की। कुछ छात्राएं बेहोश होकर गिर गईं। इससे कार्यक्रम स्थल पर अफरा-तफरी की स्थिति बन गई।
स्थिति को देखते हुए प्रभावित छात्राओं को तत्काल चितरंगी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। अस्पताल में चिकित्सकों ने छात्राओं का उपचार शुरू किया और जरूरत के अनुसार ग्लूकोज चढ़ाया गया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार उपचार के बाद अधिकांश छात्राओं की स्थिति सामान्य बताई गई है।
घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल तिरंगा यात्रा में की गई व्यवस्थाओं को लेकर उठ रहा है। छात्राओं के परिजनों ने आरोप लगाया कि तेज गर्मी और उमस के बावजूद पर्याप्त पेयजल की व्यवस्था नहीं थी। उनका कहना है कि बच्चों को लंबे समय तक धूप और गर्मी में रहना पड़ा तथा पानी के लिए भी इंतजार करना पड़ा।
परिजनों और स्थानीय लोगों का कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में स्कूली बच्चों को लेकर आयोजित कार्यक्रम में पर्याप्त पानी, छाया, प्राथमिक उपचार और चिकित्सा दल जैसी व्यवस्थाएं पहले से सुनिश्चित की जानी चाहिए थीं। उनका तर्क है कि यदि मौके पर पर्याप्त पेयजल और चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध रहतीं तो संभवतः कई छात्राओं की तबीयत बिगड़ने की स्थिति नहीं आती।
इस घटना ने सरकारी आयोजनों में स्कूली बच्चों की सुरक्षा और स्वास्थ्य संबंधी तैयारियों पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। देशभक्ति और राष्ट्रीय पर्व से जुड़े कार्यक्रमों में बच्चों की भागीदारी उत्साह का विषय है, लेकिन गर्मी, उमस और लंबी दूरी की यात्रा को देखते हुए आयोजकों के लिए बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देना भी उतना ही जरूरी है।
मामले को लेकर सिंगरौली शहर कांग्रेस अध्यक्ष प्रवीण चौहान ने भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि बच्चे जिम्मेदारी हैं और उन्हें राजनीतिक गतिविधियों का हिस्सा नहीं बनाया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य मंत्री राधा सिंह के कार्यक्रम में पहुंचने में देरी के दौरान बच्चे धूप और उमस में इंतजार करते रहे और इसी बीच उनकी तबीयत बिगड़ने लगी।
हालांकि, मंत्री की ओर से इस मामले पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इसलिए कार्यक्रम में देरी, व्यवस्थाओं और छात्राओं की तबीयत बिगड़ने के कारणों को लेकर सामने आए आरोपों को फिलहाल आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
तिरंगा यात्रा जैसे आयोजनों का उद्देश्य बच्चों में देशभक्ति और राष्ट्रीय भावना को मजबूत करना है। ऐसे में इस घटना ने यह सवाल जरूर खड़ा कर दिया है कि बड़े सार्वजनिक कार्यक्रमों में बच्चों की भागीदारी सुनिश्चित करने के साथ-साथ उनकी सुरक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल और आराम की पर्याप्त व्यवस्था कितनी गंभीरता से की जा रही है।
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