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उत्तराखंड: उत्तरकाशी के डोडीताल में गणपति डोडीराजा के रूप में पूजे जाते हैं

@शब्द दूत ब्यूरो (19 सितंबर, 2023)

आज पूरे देश में गणेश चतुर्थी का त्योहार बड़े धूमधाम से मनाया जा रहा है। महाराष्ट्र में गणेश चतुर्थी की विशेष धूम रहती है। विघ्नहर्ता गणेश के दस प्रसिद्ध मंदिरों में से एक उत्तरकाशी के डोडीताल क्षेत्र में है। यहां भगवान गणेश की पूजा मां अन्नपूर्णा संग होती है।

दरअसल यह विश्व का एकमात्र मंदिर है, जहां गणपति और मां अन्नपूर्णा मंदिर के अंदर विराजमान हैं, जबकि शिव मंदिर के बाहर हैं। धार्मिक मान्यता है कि मां अन्नपूर्णा ने इसी स्थान पर गणेश को जन्म दिया था। स्थानीय बोली में भगवान गणेश को यहां डोडीराजा कहा जाता है।

जिला मुख्यालय से करीब 22 किमी दूर स्थित डोडीताल समुद्रतल से करीब 3100 मीटर की ऊंचाई पर है। यह जगह उत्तरकाशी जिले के असी गंगा केलसू क्षेत्र में अवस्थित है। स्थानीय लोग केलसू को ही शिव का कैलाश बताते हैं। डोडीताल में करीब एक किलोमीटर में फैली प्राकृतिक झील है। झील के एक किनारे पर मां अन्नपूर्णा का प्राचीन मंदिर है।

स्थानीय ग्रामीणों की मान्यता है कि इसी स्थान पर माता अन्नपूर्णा ने हल्दी के उबटन से गणेश भगवान की उत्पति की थी। इसके बाद वह स्नान के लिए चली गईं और बाहर गणेश को द्वारपाल के रूप में तैनात कर दिया। जब शिव आए तो गणेश ने उनको द्वार पर रोक दिया।

दोनों के बीच युद्ध हुआ, शिव ने त्रिशूल से भगवान गणेश का मस्तक धड़ से अलग कर दिया। जब शिव का क्रोध शांत हुआ तो उन्होंने गरुड़ को अपने बच्चे की तरफ पीठ कर सो रही माता के बच्चे के सिर को लाने के आदेश दिए। गरुड़ भगवान गज शिशु का शीश ले आए। शिव ने भगवान गणेश को गज शीश लगाकर पुनर्जीवित कर दिया।

स्थानीय बोली में गणेश को यहां डोडीराजा कहा जाता है, जो केदारखंड में गणेश के लिए प्रचलित नाम डुंडीसर का अपभ्रंश हैं। यहां पर हर साल बड़ी संख्या में देशी-विदेशी पर्यटक और श्रद्धालु पहुंचते हैं।

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