@शब्द दूत ब्यूरो (12 मई 2026)
देहरादून। उत्तराखंड में मतदाता सूची के विशेष पुनर्निरीक्षण (SIR) को लेकर गतिविधियां तेज हो गई हैं। आगामी हफ्तों में शुरू होने वाली इस प्रक्रिया से पहले राज्य के कई इलाकों में स्थित मस्जिदों में सूचना पट्ट और पोस्टर लगाए गए हैं, जिनमें लोगों से अपने पुराने दस्तावेज, यहां तक कि 40 साल पुराने कागजात तक तैयार रखने की अपील की जा रही है।
जानकारी के अनुसार, इन पोस्टरों के माध्यम से मतदाताओं को यह बताया जा रहा है कि वे अपनी पहचान और निवास से जुड़े सभी जरूरी दस्तावेज पहले से जुटा लें ताकि SIR के दौरान किसी प्रकार की परेशानी न हो। इस अभियान में जमीयत उलेमा ए हिंद के कार्यकर्ताओं द्वारा मस्जिदों के जरिए लोगों की मदद किए जाने की भी बात सामने आई है।
राज्य में जनसंख्या परिवर्तन (डेमोग्राफी चेंज) और मतदाता सूची में गड़बड़ियों को लेकर पहले से चर्चा जारी है। बताया जा रहा है कि बड़ी संख्या में ऐसे नाम सामने आए हैं जो मतदाता सूची में दर्ज तो हैं, लेकिन मौके पर मौजूद नहीं हैं। इनमें दूसरे राज्यों से आए लोगों के नाम भी शामिल बताए जा रहे हैं। हाल ही में हुए बिहार, पश्चिम बंगाल और असम के चुनावों के दौरान भी ऐसे मामलों की चर्चा रही, जहां एक ही व्यक्ति का नाम कई राज्यों की मतदाता सूची में दर्ज पाया गया।
उत्तराखंड में कुल 11,733 पोलिंग बूथ हैं और करीब 811 नए बूथ बनाए जाने की संभावना है। इनमें से लगभग 88 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है, जबकि शेष 12 प्रतिशत मतदाताओं का सत्यापन अभी जारी है।
राजनीतिक स्तर पर भी इस प्रक्रिया को लेकर तैयारियां तेज हैं। कांग्रेस पार्टी मुस्लिम मतदाताओं को साधने की रणनीति के तहत अपने नेताओं और सहयोगी संगठनों को सक्रिय कर रही है, वहीं भारतीय जनता पार्टी ने भी अपने बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) को प्रशिक्षित कर मैदान में उतार दिया है। ये अधिकारी अपने-अपने क्षेत्रों में नए और गायब मतदाताओं की पहचान कर रहे हैं।
राजधानी देहरादून समेत कई जिलों में मलिन बस्तियों के विस्तार के कारण भी मतदाता सूची में विसंगतियां सामने आ रही हैं। राज्य गठन के समय जहां देहरादून में 75 मलिन बस्तियां थीं, वहीं अब इनकी संख्या करीब 200 तक पहुंच गई है। रिस्पना और बिंदाल नदियों के किनारे अवैध रूप से बसे लोगों के नाम भी मतदाता सूची में दर्ज होने की बात सामने आई है।
इसी बीच “एक देश, एक चुनाव और एक वोटर लिस्ट” की चर्चा भी जोर पकड़ रही है। माना जा रहा है कि भविष्य में चुनावी सुधारों के तहत देशभर में एकीकृत मतदाता सूची लागू की जा सकती है, जिससे समय और खर्च दोनों की बचत होगी। डिजिटल युग में ऑनलाइन वोटिंग की संभावनाओं को लेकर भी चर्चा तेज है।
SIR को लेकर बढ़ती जागरूकता के बीच मतदाता भी अब अपने दस्तावेजों को लेकर अधिक सतर्क नजर आ रहे हैं, जिससे आने वाली चुनावी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सटीक बनाने की उम्मीद जताई जा रही है।
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