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खुलासा :कोविड-19 की सच्चाई छुपाने और लोगों को गुमराह करने के लिए चीन ने दिए ट्रोलर्स को पैसे

@नई दिल्ली शब्द दूत ब्यूरो

एक रिपोर्ट के मुताबिक कोविड-19 पर सोशल मीडिया को गुमराह करने के लिए चीनी अधिकारियों की ओर से स्थानीय प्रोपगैंडा वर्करों और ऐसे आउटलेट्स को खुफिया निर्देश मिले हुए थे, इन आदेशों से सामने आया है कि इन अधिकारियों ने ट्रोल्स को कोविड-19 पर रिपोर्ट्स को लेकर सोशल मीडिया पर लोगों को गुमराह करने के लिए पैसे दिए थे। रिपोर्ट में बताया गया है कि चीनी अधिकारियों ने कोविड-19 पर अपने लिए ‘असुविधाजनक खबरों’ को दबाने के लिए काफी मेहनत की थी।

न्यूयॉर्क टाइम्स और एक नॉन-प्रॉफिट इन्वेस्टीगेटिव न्यूजरूम प्रोपब्लिका में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, चीनी अधिकारियों ने सरकार की लाइन पर चलने वाली खबरों को सोशल मीडिया पर फैलाने के लिए ट्रोल्स को पैसे दिए और खिलाफ बोलने वाली आवाजों को दबाने के लिए सुरक्षाबलों का इस्तेमाल किया।

इन अधिकारियों ने कोविड-19 आउटब्रेक की चेतावनी देने वाले डॉक्टर ली वेनलियांग की मौत की खबर के पुश नॉटिफिकेशन अलर्ट को पाठकों तक न भेजने के आदेश दिए थे। डॉक्टर की कोविड से मौत हो गई थी। इन अधिकारियों ने सोशल प्लेटफॉर्म्स को ट्रेडिंग टॉपिक्स से धीरे-धीरे डॉक्टर का नाम गायब करने के निर्देश दिए थे और इसकी जगह पर ध्यान भटकाने वाले मुद्दों को बढ़ावा देने वालों को एक्टिवेट किया था।

इस रिपोर्ट में बताया गया है कि चीन कैसे कोविड-19 पर चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के मुताबिक एजेंडा थोपने के लिए ऑनलाइन मीडिया को मैनिपुलेट कर रहा है। डॉक्यूमेंट्स से साफ है कि चीन सूचनाओं पर सख्ती से नियंत्रण करने की कोशिश कर रहा है। इसके लिए वो नौकरशाही, प्राइवेट कॉन्ट्रैक्टर्स की ओर से बनाए गए खास तकनीकी का इस्तेमाल और डिजिटल न्यूज आउटलेट्स और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर कड़ी नजर रख रहा है।

कोविड पर जानकारी छुपाने के लिए चीन की अमेरिका और दूसरे देशों ने आलोचना की है, लेकिन रिपोर्ट में डॉक्यूमेंट के हवाले से बताया गया है कि चीन ने वायरस को कम खतरनाक दिखाने और अपनी अथॉरिटी को सक्षम दिखाने के लिए मीडिया को मैनिपुलेट किया था।

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