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असम में बाढ़ का कहर: 75 की मौत, 4 लाख से अधिक लोग प्रभावित, 60 वर्षों की सबसे भीषण आपदा, मिशन मोड पर राहत-बचाव

@शब्द दूत ब्यूरो (30 जुलाई 2026)

नयी दिल्ली। असम इस समय भीषण बाढ़ की त्रासदी से जूझ रहा है। लगातार हो रही मानसूनी बारिश और पड़ोसी राज्य नागालैंड के पहाड़ी क्षेत्रों से आए पानी के कारण ब्रह्मपुत्र तथा उसकी सहायक नदियां उफान पर हैं। राज्य सरकार और असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एएसडीएमए) के अनुसार यह बाढ़ पिछले लगभग 60 वर्षों की सबसे गंभीर प्राकृतिक आपदाओं में से एक मानी जा रही है। अब तक बाढ़ और इससे जुड़ी घटनाओं में 75 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि राज्य के विभिन्न जिलों में लगभग चार लाख लोग सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं।

इस बार बाढ़ ने उन इलाकों को भी अपनी चपेट में ले लिया है जहां पहले ऐसी स्थिति बहुत कम देखने को मिलती थी। राज्य के ऊपरी और मध्य असम के कई जिले जलमग्न हैं और सामान्य जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है।
सबसे अधिक प्रभावित जिलों में शिवसागर शामिल है, जहां लगभग तीन लाख लोग बाढ़ की चपेट में हैं। चराईदेव में करीब दो लाख तथा जोरहाट में लगभग एक लाख लोग जलभराव से प्रभावित हुए हैं। गोलाघाट जिले में धनसरी नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है, जिससे व्यापक बाढ़ की स्थिति बनी हुई है। नागांव और कामरूप के कई हिस्सों में भी पानी भरने से लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से सामने आ रही तस्वीरें और वीडियो हालात की भयावहता बयां कर रहे हैं। शिवसागर के नेपाली खुट्टी गांव में पूरा इलाका तालाब में तब्दील हो गया है। कई घरों की छतों तक पानी पहुंच चुका है और लोग घरेलू सामान के साथ छतों तथा पेड़ों पर शरण लेने को मजबूर हैं। एक मार्मिक घटना में एक मां और उसका बेटा अपनी जान बचाने के लिए लगभग 12 घंटे तक आम के पेड़ पर बैठे रहे।
नाजिरा और शिवसागर के अन्य कस्बों में पानी उतरने के बाद सड़कें और घरों के बाहर खड़े वाहन मोटी कीचड़ में धंसे दिखाई दे रहे हैं, जिससे बाढ़ के साथ आए भारी मलबे का अंदाजा लगाया जा सकता है।

बाढ़ का सबसे बड़ा असर कृषि और पशुपालन पर पड़ा है। लगभग 45,341 हेक्टेयर कृषि भूमि पानी में डूब चुकी है, जिससे किसानों की खड़ी फसल पूरी तरह नष्ट हो गई है। कई स्थानों पर पानी में बहते और मृत मवेशियों की तस्वीरें सामने आई हैं, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़े गहरे संकट को दर्शाती हैं। हजारों पशुओं के बह जाने से किसानों की आजीविका पर भी गंभीर असर पड़ा है।

राज्य सरकार, केंद्र सरकार तथा विभिन्न सुरक्षा एजेंसियां राहत और बचाव कार्यों में युद्धस्तर पर जुटी हुई हैं। राज्यभर में 80 से अधिक राहत शिविर संचालित किए जा रहे हैं, जहां 32 हजार से अधिक विस्थापित लोगों को आश्रय दिया गया है। राहत शिविरों में भोजन, स्वच्छ पेयजल, दवाइयों और अन्य आवश्यक सामग्री की व्यवस्था की गई है। साथ ही राहत वितरण केंद्रों से लगातार प्रभावित लोगों तक सहायता पहुंचाई जा रही है।

भारतीय वायुसेना, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) और स्थानीय प्रशासन मोटरबोट के जरिए फंसे लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने में जुटे हैं। जिन क्षेत्रों का सड़क संपर्क पूरी तरह टूट चुका है, वहां हेलीकॉप्टरों से खाद्य सामग्री, दवाइयों और अन्य आवश्यक वस्तुओं की एयर ड्रॉपिंग की जा रही है, ताकि दूरदराज के इलाकों में फंसे लोगों तक समय पर मदद पहुंच सके।

मुख्यमंत्री हेमंत बिस्वा सरमा के निर्देश पर बिजली आपूर्ति और संचार व्यवस्था बहाल करने का कार्य भी तेजी से चल रहा है। सरकार ने बाढ़ और भूस्खलन में जान गंवाने वालों के परिजनों के लिए ₹9 लाख की सहायता राशि की घोषणा की है। इसमें ₹4 लाख आपदा राहत के तहत तथा ₹5 लाख मुख्यमंत्री राहत कोष से दिए जाएंगे। साथ ही पोस्टमार्टम की अनिवार्यता समाप्त कर दी गई है, ताकि प्रभावित परिवारों को बिना विलंब आर्थिक सहायता मिल सके।

राज्य सरकार ने एक लाख से अधिक गंभीर रूप से प्रभावित परिवारों को ₹15,000 की प्रत्यक्ष वित्तीय सहायता देने की भी घोषणा की है। वहीं विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए उच्चतर माध्यमिक से लेकर स्नातकोत्तर स्तर तक के छात्रों को अगस्त से ₹1,000 से ₹5,000 तक की पुस्तक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। जिन बच्चों की किताबें बाढ़ में नष्ट हो गई हैं, उन्हें नई किताबें भी निःशुल्क उपलब्ध कराई जाएंगी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुख्यमंत्री और राज्य के सांसदों से बातचीत कर असम को हरसंभव केंद्रीय सहायता और वित्तीय सहयोग का भरोसा दिया है।

हालांकि कुछ क्षेत्रों में जलस्तर धीरे-धीरे घटने लगा है, लेकिन महामारी फैलने की आशंका, विस्थापित परिवारों का पुनर्वास, क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे की मरम्मत और किसानों की आजीविका की बहाली प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती बनी हुई है। राहत और पुनर्वास कार्यों की गति आने वाले दिनों में यह तय करेगी कि राज्य इस भीषण प्राकृतिक आपदा से कितनी जल्दी उबर पाता है।

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