@शब्द दूत ब्यूरो (15 मई 2026)
गदरपुर। उत्तराखंड के उधम सिंह नगर जनपद के गदरपुर क्षेत्र में अनुसूचित जाति (एससी) प्रमाण पत्र से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है। प्रशासनिक जांच में धर्म परिवर्तन से जुड़े तथ्य सामने आने के बाद संबंधित व्यक्ति के एससी प्रमाण पत्र को निरस्त करने की संस्तुति जिला स्क्रूटनी समिति को भेज दी गई है। इस घटना के बाद क्षेत्र में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।
जानकारी के अनुसार ग्राम मजारशीला, गदरपुर निवासी अरविंद सैनी ने प्रशासन को शिकायत देकर आरोप लगाया था कि गांव में अवैध रूप से चर्च का संचालन किया जा रहा है और लोगों का धर्म परिवर्तन कराया जा रहा है। शिकायत के आधार पर प्रशासन ने जांच शुरू की।
उप जिलाधिकारी ऋचा सिंह ने बताया कि राजस्व विभाग की संयुक्त टीम द्वारा जांच की गई। जांच में सामने आया कि संबंधित व्यक्ति मूल रूप से हिंदू धर्म के अनुसूचित जाति समुदाय से जुड़ा था, लेकिन उसने कथित रूप से धर्म परिवर्तन कर लिया है। जांच के दौरान सोशल मीडिया गतिविधियों को भी आधार बनाया गया, जहां धर्म परिवर्तन की सार्वजनिक घोषणा जैसी सामग्री मिलने की बात कही गई है।
प्रशासनिक जानकारी के अनुसार संबंधित व्यक्ति को 14 जनवरी 2019 को तहसीलदार गदरपुर द्वारा एससी प्रमाण पत्र जारी किया गया था। अब राजस्व उप निरीक्षक और राजस्व निरीक्षक की संयुक्त रिपोर्ट के आधार पर इस प्रमाण पत्र को निरस्त करने की संस्तुति की गई है।
एसडीएम ऋचा सिंह ने बताया कि जांच संविधान (अनुसूचित जाति) आदेश 1950 तथा उच्चतम न्यायालय के दिशा-निर्देशों के अनुरूप की गई है। पूरी रिपोर्ट जिला स्क्रूटनी समिति को भेज दी गई है, जहां अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
इसी बीच तराई क्षेत्र में धर्म परिवर्तन के मामलों ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। खबर है कि करीब 80 गांवों के 105 लोगों ने हिंदू धर्म छोड़कर ईसाई धर्म अपनाया है, जिसके बाद जिला प्रशासन सक्रिय हो गया है।
एडीएम पंकज उपाध्याय ने बताया कि नानकमत्ता में सामने आए धर्म परिवर्तन के मामले के बाद विशेष जांच दल का गठन किया गया है, जो पूरे प्रकरण की गहन जांच कर रहा है।
क्या बोले सीएम धामी:
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य में सख्त धर्मांतरण कानून लागू किया गया है। प्रलोभन देकर धर्म परिवर्तन कराने वाले और इसमें शामिल लोगों के खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार धर्म परिवर्तन के बाद आरक्षण जैसी सुविधाएं नहीं मिल सकतीं। तराई क्षेत्र की घटनाएं चिंताजनक हैं और प्रशासन पूरे मामले की जांच कर रहा है।
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