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काशीपुर में मौसम की मार से बिछी गेहूं की फसल, किसानों ने कहा— “लागत निकलना भी मुश्किल, मुआवजा दे सरकार”देखिए वीडियो

@शब्द दूत ब्यूरो (31 मार्च 2026)

काशीपुर। काशीपुर क्षेत्र पिछले दिनों आई में तेज हवा और बारिश ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। गांवों के खेतों में दूर-दूर तक गेहूं की फसल जमीन पर बिछी हुई दिखाई दे रही है। किसानों का कहना है कि एक ही रात आई तेज हवा और बारिश ने पूरी फसल को इस तरह चिपका दिया कि अब उसमें से उत्पादन निकलना लगभग नामुमकिन हो गया है। किसानों ने आरोप लगाया कि भारी नुकसान के बावजूद अब तक कोई सरकारी अधिकारी, पटवारी या राजस्व विभाग की टीम मौके पर सर्वे के लिए नहीं पहुंची है।

गांव के किसानों ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए बताया कि खेतों में जो गेहूं खड़ा था, वह अब पूरी तरह जमीन पर लेट चुका है। किसानों के अनुसार ऊपर की थोड़ी बहुत बालियां ही शायद कुछ काम की रह जाएं, लेकिन नीचे की पूरी फसल खराब हो चुकी है। उनका कहना है कि जब थ्रेशर या कंबाइन से गेहूं निकाला जाएगा तो नीचे की दबी और सड़ी फसल का दाना हवा और भूसे में ही निकल जाएगा, जिससे उपज में भारी गिरावट आएगी।

किसानों ने बताया कि इस बार गेहूं की फसल काफी अच्छी थी और उपज को लेकर उम्मीदें भी मजबूत थीं। खेतों में न तो खरपतवार की समस्या थी और न ही उत्पादन को लेकर कोई खास चिंता, लेकिन अचानक आए खराब मौसम ने सारी उम्मीदें तोड़ दीं। किसानों के अनुसार जिस फसल से उन्हें परिवार के सालभर के अनाज और आर्थिक सहारे की उम्मीद थी, वही अब नुकसान का कारण बन गई है।

ग्राम पच्चावाला के एक किसान ने बताया कि उनके तीन एकड़ खेत में गेहूं की फसल पूरी तरह प्रभावित हुई है। उन्होंने कहा कि सामान्य परिस्थितियों में इस खेत से 56 से 60 क्विंटल, बल्कि कुछ किसानों को 70 से 80 क्विंटल तक उपज की उम्मीद थी, लेकिन अब मुश्किल से 10 से 25 प्रतिशत तक ही गेहूं निकलने की संभावना बची है। किसान का कहना है कि अब हालत ऐसी हो गई है कि “खाने भर का अनाज भी निकलेगा या नहीं, यह भी कहना मुश्किल है।”

किसानों ने बताया कि एक एकड़ गेहूं की फसल तैयार करने में बुवाई, जुताई, बीज, खाद, सिंचाई, दवाई और कटाई जैसी प्रक्रियाओं में अच्छा-खासा खर्च आता है। प्रभावित किसानों का कहना है कि उनकी तीन एकड़ फसल में लागत भी वापस आना मुश्किल हो गया है, जबकि कुल नुकसान एक लाख रुपये से अधिक तक पहुंचने का अनुमान है। किसानों के चेहरे पर चिंता साफ दिखाई दी, क्योंकि फसल खराब होने के बाद अगली खेती की तैयारी भी संकट में पड़ती नजर आ रही है।
किसानों ने यह भी कहा कि अब गेहूं पकने और कटने में अभी करीब 15 दिन या उससे अधिक का समय लगेगा। ऐसे में ग्रीष्मकालीन धान की बुवाई का समय भी निकलता जा रहा है। किसानों का कहना है कि अगर गेहूं की फसल समय पर और सही हालत में कटती तो अगली फसल की तैयारी संभव थी, लेकिन अब मौसम की इस मार ने अगले सीजन की खेती पर भी अनिश्चितता खड़ी कर दी है।

ग्रामीणों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि इतनी बड़ी तबाही के बाद भी प्रशासन की ओर से अब तक कोई राहत या निरीक्षण की पहल नहीं हुई। कुछ किसानों ने बताया कि उन्होंने गांव स्तर पर जानकारी दी, लेकिन जवाब मिला कि ऊपर से कोई आदेश नहीं आया है। किसानों का कहना है कि भले ही तुरंत मुआवजा न मिले, लेकिन कम से कम प्रशासनिक अधिकारी मौके पर आकर वास्तविक स्थिति का सर्वे तो करें, ताकि नुकसान का सही आकलन हो सके।

ग्राम पच्चावाला के किसानों ने सरकार से मांग की है कि खराब मौसम से बर्बाद हुई गेहूं की फसल का तत्काल सर्वे कराया जाए और प्रति एकड़ के हिसाब से उचित मुआवजा दिया जाए। किसानों का कहना है कि यदि समय रहते राहत नहीं मिली तो उनके सामने आर्थिक संकट और गहरा जाएगा।

ग्रामीणों का कहना है कि ये स्थिति क्षेत्र के सभी गावों में है। खेती में लगातार बढ़ते जोखिम और मौसम की अनिश्चितता के कारण किसानों का खेती से मोहभंग होता जा रहा है। यही वजह है कि खेतों की जगह अब कई इलाकों में प्लॉट, फैक्ट्रियां और कॉलोनियां उगती दिखाई देती हैं। पच्चावाला के खेतों में बिछी यह गेहूं की फसल सिर्फ एक मौसमीय नुकसान नहीं, बल्कि किसानों के टूटते भरोसे और संघर्ष की तस्वीर भी है।

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