@शब्द दूत ब्यूरो (07 अगस्त 2025)
उत्तरकाशी। उत्तरकाशी जिले के धराली क्षेत्र में आई भीषण आपदा के बाद राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जिस तत्परता, संवेदनशीलता और ज़मीनी उपस्थिति के साथ राहत व पुनर्वास कार्यों का नेतृत्व किया, उसने उन्हें न केवल एक कर्मठ प्रशासक बल्कि एक सहृदय अभिभावक के रूप में भी स्थापित किया है।
आपदा के तुरंत बाद मुख्यमंत्री ने न केवल आपदा नियंत्रण कक्ष से राहत व बचाव कार्यों की समीक्षा की, बल्कि स्वयं मौके पर पहुंचकर पीड़ितों का दुःख-दर्द भी साझा किया। उन्होंने पीड़ितों को यह भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार उनके साथ एक परिवार की तरह खड़ी है। उनका यह मानवीय रूप प्रभावित लोगों के लिए एक मानसिक संबल बन गया।
मुख्यमंत्री के निर्देशों के अनुरूप प्रशासनिक अमला, पुलिस बल और आपदा राहत सुरक्षा बलों ने बिना समय गंवाए राहत कार्यों को अंजाम दिया। फंसे हुए लोगों को सुरक्षित निकाला गया, घायलों को त्वरित चिकित्सकीय सहायता दी गई और बेघर हुए लोगों को सुरक्षित आश्रय स्थलों में पहुंचाया गया।
स्वास्थ्य विभाग को हाई अलर्ट मोड पर रखते हुए मुख्यमंत्री ने देहरादून और ऋषिकेश के अस्पतालों में ICU सहित बेड आरक्षित करवाए। यहां तक कि मानसिक स्वास्थ्य को भी प्राथमिकता देते हुए तीन मनोचिकित्सकों की टीम धराली भेजी गई, ताकि संकट के इस समय में प्रभावितों को हरसंभव मानसिक सहयोग भी मिल सके।
मुख्यमंत्री धामी की इस संवेदनशील, सक्रिय और मानवीय नेतृत्व शैली ने उन्हें राज्य के एक सच्चे सेवक के रूप में स्थापित किया है। उत्तराखंड की जनता ने उन्हें केवल एक राजनेता नहीं, बल्कि संकट की घड़ी में साथ खड़े रहने वाले एक अभिभावक के रूप में देखा है।
आपदा की इस घड़ी में मुख्यमंत्री द्वारा दिखाया गया समर्पण आने वाले समय में राज्य की आपदा प्रबंधन नीति को और अधिक मानवीय तथा प्रभावी बनाने में मील का पत्थर साबित हो सकता है।
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