@शब्द दूत ब्यूरो (03 अगस्त 2025)
हरिद्वार। उत्तराखंड के हरिद्वार जिले के सुल्तानपुर कस्बे में बन रही एक विशाल मस्जिद और उसकी ऊंची मीनार पर अब सियासी और धार्मिक हलकों में हलचल मच गई है। नियमों को दरकिनार कर बन रही इस मस्जिद के निर्माण कार्य को लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सख्ती दिखाते हुए अधिकारियों को सख्त जांच के आदेश दिए हैं। प्रशासन ने तत्काल प्रभाव से निर्माण कार्य पर रोक लगा दी है।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, सुल्तानपुर में एक पुरानी मस्जिद को गिराकर उसके स्थान पर नई और विशाल मस्जिद का निर्माण कराया जा रहा है। बताया गया है कि यह निर्माण कार्य किसी भी वैधानिक अनुमति के बिना किया जा रहा था। खास बात यह है कि मस्जिद के ऊपर 250 फीट ऊंची मीनार खड़ी की जा रही है, जबकि उत्तराखंड सरकार के नियमों के अनुसार मैदानी क्षेत्रों में 100 फीट से ऊंचा कोई भी भवन केवल शासन की अनुमति से ही बन सकता है।
इतनी ऊंचाई वाले भवन के लिए IIT विशेषज्ञों की संरचनात्मक रिपोर्ट, लोक निर्माण विभाग, अग्निशमन विभाग, पुलिस और एयर ट्रैफिक सुरक्षा संबंधी विभागों की अनापत्ति आवश्यक होती है, लेकिन किसी भी विभाग की एनओसी इस निर्माण के लिए नहीं ली गई है।
हरिद्वार जिले को सनातन धर्म की वैश्विक राजधानी माना जाता है। ऐसे में वहां इस प्रकार का अवैध और अत्यधिक विशाल धार्मिक निर्माण कार्य कई संत संगठनों और अखाड़ों की चिंता का विषय बन गया है। संत समाज ने इस मुद्दे को मुख्यमंत्री धामी तक पहुंचाया है। चिंता जताई जा रही है कि हरिद्वार की जनसंख्या संरचना में हो रहे बदलाव और बाहरी तत्वों की भूमिका को लेकर प्रशासन को सतर्क रहना चाहिए।
विश्व हिन्दू परिषद के प्रवक्ता पंकज चौहान ने प्रशासन पर दोहरा मापदंड अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि “हिन्दू मंदिरों के निर्माण पर प्रशासन तुरन्त एक्शन लेता है, लेकिन महीनों से मस्जिद का इतना बड़ा अवैध निर्माण कैसे जारी रहा?” विहिप ने मांग की है कि इस अवैध निर्माण को तत्काल ध्वस्त किया जाए और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस प्रकरण पर नाराज़गी जताते हुए स्पष्ट किया है कि किसी को भी कानून तोड़ने की इजाज़त नहीं दी जाएगी। उन्होंने कहा, “जिलाधिकारी को निर्देश दिए गए हैं कि इस पूरे मामले की गंभीरता से जांच करें। धार्मिक स्थल हो या कोई अन्य भवन, यदि नियमों की अनदेखी हुई है, तो कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।”
हरिद्वार के जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने कहा है कि प्रशासन ने मस्जिद का निर्माण कार्य तत्काल प्रभाव से रुकवा दिया है। दस्तावेजों और निर्माण मानकों की जांच की जा रही है। “यदि नियमों का उल्लंघन पाया गया तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी,” उन्होंने कहा।
यह सवाल अब प्रशासन के साथ-साथ आम लोगों के बीच भी चर्चा का विषय बन गया है कि इतनी बड़ी मस्जिद और मीनार का निर्माण बिना किसी विभागीय अनुमति के कैसे संभव हुआ? इसके पीछे फंडिंग का स्रोत, बाहरी राज्यों के लोगों की भूमिका और उद्देश्य पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।
इस प्रकरण ने न केवल हरिद्वार की शांति व्यवस्था के लिए चुनौती खड़ी की है, बल्कि शहरी विकास और धार्मिक निर्माण के लिए निर्धारित नियमों की अनदेखी को भी उजागर किया है। अब देखना यह होगा कि सरकार और प्रशासन इस पर कितनी पारदर्शिता और निष्पक्षता से कार्रवाई करता है।
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