@शब्द दूत ब्यूरो (26 जून 2025)
देहरादून/काशीपुर। बहुचर्चित एनएच-74 भूमि मुआवजा घोटाले की जांच एक बार फिर तेज हो गई है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने आज सुबह देहरादून और काशीपुर में कई ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। यह कार्रवाई एनएच-74 के विस्तारीकरण के दौरान हुए करोड़ों रुपये के भूमि मुआवजा घोटाले से जुड़ी है। देहरादून के साथ रूद्रपुर और काशीपुर में भी ईडी अधिकारियों ने छापेमारी की है। काशीपुर में मौ अल्लीखां निवासी एक अधिवक्ता के निवास पर आज सुबह से ही ईडी की टीम छापेमारी कर रही है।
सूत्रों के अनुसार, ईडी की टीमों ने जिन परिसरों पर छापा मारा है, वे उन अधिकारियों, बिचौलियों और भू-मालिकों से जुड़े हैं, जिन पर मुआवजा राशि में धांधली और दस्तावेजों में हेरफेर के आरोप हैं। बताया जा रहा है कि छापेमारी के दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और संदिग्ध लेनदेन से संबंधित रिकॉर्ड जब्त किए गए हैं।
एनएच-74 घोटाला उत्तराखंड के उधम सिंह नगर जनपद से जुड़ा है, जहां 2011 से 2016 के बीच भूमि अधिग्रहण के दौरान कृषि भूमि को व्यावसायिक भूमि दिखाकर भारी-भरकम मुआवजा लिया गया था। इस घोटाले में पहले भी सीबीआई और आयकर विभाग की जांच हो चुकी है, लेकिन अब मनी लॉन्ड्रिंग एंगल से ईडी की यह कार्रवाई अहम मानी जा रही है।
यह मामला 2017 में उत्तराखंड पुलिस द्वारा दर्ज एक एफआईआर और उसके बाद की चार्जशीट से उपजा है। जांच में पाया गया कि पीसीएस अधिकारी समेत कुछ अन्य लोकसेवकों, राजस्व अधिकारियों, किसानों और बिचौलियों ने मिलकर सरकारी धन के दुरुपयोग की साजिश रची थी। उन्होंने उत्तर प्रदेश जमींदारी उन्मूलन एवं भूमि सुधार अधिनियम, 1950 की धारा 143 के तहत पारित बैकडेट आदेशों के आधार पर यह घोटाला किया।
समझा जाता है कि आने वाले दिनों में कुछ बड़ी गिरफ्तारियां संभव हैं। इस कार्रवाई से पूर्ववर्ती शासनकाल में हुए भूमि मुआवजा घोटाले के राजनीतिक और प्रशासनिक परतें एक बार फिर उजागर हो सकती हैं।
घटनाक्रम पर राज्य सरकार और प्रशासन की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन जांच एजेंसियों की गतिविधियों से साफ है कि एनएच-74 घोटाले की फाइल एक बार फिर गर्म हो चुकी है।
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