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काशीपुर में जलभराव की समस्या : महापौर की गंभीरता बनाम कर्मचारियों की लापरवाही

@शब्द दूत ब्यूरो (13 जून 2025)

काशीपुर। शहर में जब भी बादल बरसते हैं, आम नागरिकों का मन खुशी से नहीं, बल्कि चिंता और परेशानी से भर जाता है। कारण स्पष्ट है — जलभराव। यह समस्या अब केवल प्राकृतिक नहीं रही, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही और सिस्टम की उदासीनता का जीता-जागता उदाहरण बन चुकी है।

महापौर दीपक बाली के प्रयासों और उनके द्वारा की जा रही निगरानी को देखते हुए लगता है कि वे शहर को जलभराव से निजात दिलाने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं। वे समय-समय पर अधिकारियों के साथ बैठकें कर रहे हैं, जल निकासी की योजनाओं पर चर्चा कर रहे हैं और नालियों की सफाई पर जोर दे रहे हैं। परंतु लगता यह है कि उनकी गंभीरता और संकल्प को नगर निगम के जिम्मेदार कर्मचारी वह समर्थन नहीं दे पा रहे जिसकी अपेक्षा की जाती है।

आज सुबह हुई मात्र आधे घंटे की बारिश में शहर के मुख्य बाजार, भीड़भाड़ वाले चौराहे और कुछ कालोनियों में पानी भर गया। नागरिकों को भी भारी असुविधा झेलनी पड़ी।

यह स्थिति उस समय और भी विडंबनापूर्ण लगती है जब यह ज्ञात हो कि नालियों की सफाई के लिए हर साल मोटा बजट पास किया जाता है। कर्मचारियों द्वारा दिखावे के लिए कागजों में सफाई अभियान चला दिया जाता है, कुछ तस्वीरें खींच कर सोशल मीडिया पर डाल दी जाती हैं, और मान लिया जाता है कि काम पूरा हो गया। लेकिन धरातल पर वास्तविकता कुछ और ही है। नालियों में जमी गंदगी, प्लास्टिक, कीचड़ और अवशिष्ट सामग्री बारिश के पानी को बहने से रोक देती है, जिससे जलभराव की स्थिति उत्पन्न होती है।

महापौर की मंशा को निष्प्रभावी करने में कहीं न कहीं वे अधिकारी और कर्मचारी जिम्मेदार हैं जो या तो अपनी ड्यूटी को गंभीरता से नहीं ले रहे या फिर जानबूझ कर लापरवाह बने हुए हैं। प्रशासनिक तंत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही का अभाव ऐसी समस्याओं को जन्म देता है। यदि समय रहते नालियों की सही ढंग से सफाई होती, तो आधे घंटे की बारिश इतनी तबाही न मचाती।

यह आवश्यक हो गया है कि महापौर दीपक बाली अपने स्तर से इस दिशा में और कठोर कदम उठाएं। साथ ही, नागरिकों को भी इस व्यवस्था का हिस्सा बनना होगा। यदि किसी क्षेत्र में जलभराव होता है तो वहां के लोग संबंधित अधिकारियों तक जानकारी दें, और कार्यवाही न होने पर इसे सार्वजनिक करें। मीडिया और जनप्रतिनिधियों की भूमिका भी इस दिशा में महत्त्वपूर्ण हो सकती है।

जब तक नगर निगम का पूरा तंत्र महापौर की सोच और प्रयासों के अनुरूप काम नहीं करेगा, तब तक हर बरसात शहर के लिए एक नई चुनौती लेकर आएगी। यह समय है कि सिर्फ घोषणाएं नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर बदलाव हो। शहर की सड़कों पर बहता पानी केवल जलभराव नहीं है, यह उस तंत्र की नाकामी का प्रतीक है जिसे जनता ने अपने विश्वास के साथ चुना था।

अब देखने वाली बात यह होगी कि महापौर दीपक बाली इस गंभीर समस्या का स्थायी समाधान कैसे निकालते हैं और लापरवाह कर्मचारियों को सुधारने के लिए कौन से कदम उठाते हैं। जनता को उम्मीद है कि इस बार सिर्फ बरसात ही नहीं, व्यवस्था की गंदगी भी बहेगी।

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