@शब्द दूत ब्यूरो (30 दिसंबर 2024)
हर बार की तरह पार्षद पद के प्रत्याशियों को लेकर एक समानता देखने को मिल रही है। आप इस तथ्य को जानकर हैरान रह जाएंगे।
दरअसल जिस भी वार्ड से कोई पुरुष चुनाव मैदान में है उसके किसी भी पोस्टर में पत्नी का नाम या फोटो आपको नहीं दिखाई देगा। इसके विपरीत अगर महिला उम्मीदवार है तो उसके पोस्टर में पति का नाम और फोटो जरूर होगा। ये बताता है कि महिला शक्ति का सिर्फ ढोल पीटा जाता है वास्तव में सारी शक्ति और नियंत्रण पुरुषों ने अपने हाथ में रखा है। अगर यह कहें कि ऐसे पुरुष मानते हैं कि समाज में उनका ही वजूद है। बिना उनके पत्नी राजनीतिक और सामाजिक जीवन में कुछ नहीं कर सकती।
यहां आप पार्षद का चुनाव लड़ रहे किसी भी पुरुष प्रत्याशी के पोस्टर या बैनर पर उनकी पत्नी का फोटो या नाम न देखकर इस तथ्य को स्वीकार करेंगे। कई बार तो पत्रकारों को साक्षात्कार भी पति ही देता है और वादे भी खुद ही करता है। ये बात सही है कि पत्नी पर पति का अधिकार है पर क्या पत्नी को भी इस मामले में बराबरी का अधिकार समाज दे रहा है। हां,एक बात और आज तक आपने पार्षद पत्नी नाम का पद कहीं भी आचार व्यवहार में नहीं सुना होगा। अलबत्ता पुरुष बिना चुनाव लड़े अपनी पत्नी के जीतने पर पार्षद पति के रूप में जाना जाता है और खुद को भी प्रचारित इसी पद नाम से करने लगता है।
एक तरह से पुरूषों का यह व्यवहार महिलाओं की क्षमता को कम आंकने जैसा है।
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