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काशीपुर में टिकट की जोर आजमाइश, क्या भाजपाई शख्सियत कांग्रेस से हो सकती है मेयर प्रत्याशी? चर्चा तो है पर….दावेदारी पर एक आकलन

@विनोद भगत

काशीपुर। निकाय चुनाव को लेकर सरगर्मियां अब चरम पर पहुंच रहीं हैं। दावेदार पार्टी हाईकमान के समक्ष अपनी-अपनी जोर आजमाइश में जुट गए हैं। ऐसे में एकाएक यह चर्चा जोर पकड़ रही है कि कोई भाजपाई शख्सियत कांग्रेस से मेयर का टिकट लेकर मैदान में आने जा रही है। अब इन चर्चाओं में कितना दम है ये तो भविष्य के गर्भ में है। यदि ऐसा हुआ तो कोई आश्चर्य की बात नहीं है क्योंकि यह राजनीति है और राजनीति में कुछ भी असंभव नहीं होता।

टिकट मिलेगा किसे इसका फैसला तो शीघ्र ही होने जा रहा है और देखना है कि राजनीतिक दल किस किस उम्मीदवार के भरोसे काशीपुर के विकास की नैया को छोड़ते हैं। चर्चा करें भाजपा की तो यहां दीपक बाली और राम मेहरोत्रा टिकट पाने वालों की लड़ाई में आगे चल रहे हैं। दोनों के अपने अलग-अलग विजन है। अब देखना है कि भाजपा युवा और समाज सेवी दीपक बाली पर दांव खेलती है या फिर पुराने खाटू नेता राम मल्होत्रा पर। जहां एक और राम मल्होत्रा टिकट मिलने पर मेयर बनने की स्थिति में विकास के नए खाके की बात कर रहे हैं वही दीपक बाली का कहना है कि वह वादों में नहीं काम में विश्वास रखते हैं और इस शहर की जनता ने मौका दिया तो उसे दिखा देंगे कि विकास कैसे होता है ।

उधर कांग्रेस से युवा नेता संदीप सहगल तथा पूर्व में मेयर का चुनाव लड़ चुकी मुक्ता सिंह में टिकट लेने को लेकर जोरदार जंग मची है। वहीं कांग्रेस से अरूण चौहान और युवा नेता शिवम शर्मा ने भी अपनी दावेदारी पेश की है। यह शीघ्र ही पता चल जाएगा की पार्टी अपने युवा नेता पर दांव खेलती है या फिर पूर्व में चुनाव हार चुकी मुक्ता सिंह पर। सभी का कहना है कि काशीपुर की काया पलट करने के लिए उनके पास अपने-अपने विजन है और काशीपुर का विकास पंडित नारायण दत्त तिवारी की तरह केवल कांग्रेस का प्रत्याशी ही चुनाव जीतकर कर सकता है।

वहीं विकास की बात करें तो दीपक बाली अकेले ऐसे चेहरे हैं जिन्हें यदि भाजपा ने चुनाव मैदान में उतारा और काशीपुर की जनता ने विकास के लिए उन्हें आशीर्वाद दिया तो वह बेहतर विकास करने की कुव्वत रखते हैं। ऐसा माना जा रहा है। कारण साफ है कि उनकी प्रदेश की सत्ता तक खासी पकड़ है और मुख्यमंत्री से संबंधों के चलते वें विकास कार्यों में आर्थिक तंगी आडे नहीं आने देंगे। कुल मिलाकर ऐसा ही एहसास होगा जैसा पंडित नारायण तिवारी और स्वर्गीय सत्येंद्र गुड़िया के समय में होता था।

बसपा से पूर्व पालिका अध्यक्ष शमसुद्दीन का नाम चर्चाओं में है अब देखना यह है कि बसपा कांग्रेस और भाजपा से टक्कर लेने के लिए जनाब शमशुद्दीन पर दांव खेलती है या फिर किसी और चेहरे पर। जनता में चर्चाएं हैं कि बसपा से केवल शमसुद्दीन ही ऐसे उम्मीदवार हैं जो कांग्रेस और भाजपा से टक्कर ले सकते हैं क्योंकि उन्होंने पहले भी इन दोनों ही दलों को शिकश्त देकर नया इतिहास रचा था। जहां तक सपा का सवाल है तो उसके नेता दावे भले ही कुछ भी करते हो मगर वह कोई नया इतिहास लिखने की स्थिति में है ही नहीं।

उधर पर्वतीय समाज भी अपना उम्मीदवार उतारने की तैयारी में है लेकिन अभी तस्वीर क्लियर नहीं है भाजपा सहित अन्य दलों से दूसरे लोग भी जो कुकुरमुत्तों की तरह सामने आए हैं वह भी दावे तो बहुत बढ़ चढ कर कर रहे हैं मगर नहीं लगता कि उनके टिकट लेने के दावे तक पूरे हो पाएंगे या नहीं।

बहरहाल कुछ भी हो काशीपुर की जनता के सामने एक बार फिर अपने शहर को स्वच्छ सुंदर और विकसित बनाने हेतु चुनाव रूपी मौका आ रहा है उसे सोचना चाहिए कि उसका वोट किस उम्मीदवार को देने से इस शहर का वास्तव में भला होगा वरना नेता आते जाते रहेंगे और वादों की घोषणाएं वायदों की गठरी में ही सिमट कर रह जाएंगी । गंभीरता से सोचिए और फिर विचार कीजिए। तभी बन पाएगा हमारे सपनों का काशीपुर। वह काशीपुर जैसा आप चाहते हैं।

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