@शब्द दूत ब्यूरो (16 मई 2024)
काशीपुर । गुरु द्रोणाचार्य की महिमा और शिष्यों की कर्मभूमि का इतिहास समेटे द्रोणसागर को बेहतरीन पर्यटक स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा। पुरातत्विक महत्व के अवशेषों से समृद्ध किलेनुमा इमारत को पुरातत्वविदों की टीम संवारेगी। सरकार के 13 डिस्ट्रिक्ट-13 डेस्टिनेशन योजना में शामिल द्रोणसागर को नया स्वरूप देने के लिए कुमाऊं मंडल विकास निगम (केएमवीएन) ने खाका तैयार कर लिया है। ये सब तीन साल पहले की बात है।
अब आपको लिये चलते हैं वर्ष 2016 में जब द्रोणासागर के पौराणिक महत्व को देखते हुए महाभारत सर्किट के तहत इसे विकसित करने की बात कही गई थी। बड़ी-बड़ी योजनाओं के साथ पर्यटकों को लुभाने की बात भी कही गई थी। पर पांच साल में योजना धरातल पर नहीं आ पाई। वर्ष 2021 में एक बार फिर ये योजना कागजों से बाहर आई थी । उम्मीद थी कि कि इस बार यह योजना आकार लेगी। काशीपुर की पहचान को समृद्ध करने वाले द्रोणसागर का निर्माण पांडवों ने अपने गुरु द्रोणाचार्य के लिए करवाया था।
यहां एक प्राचीन किला है जिसके किनारे द्रोण सरोवर भी बना है। इस वर्गाकार सरोवर का क्षेत्रफल 600 वर्ग फीट है। यहां पूर्व में गंगोत्री की यात्रा करने वाले वाले श्रद्धालु भी आते थे।द्रोणासागर आने वाले पर्यटकों को केवीएमएन इसके इतिहास से रूबरू कराएगा। ओपन थिएटर के साथ ही दिल्ली के अक्षरधाम मंदिर की तर्ज पर म्यूजिकल फाउंटेन भी लगेगा। इसमें गोविषाण टीले से मिले पुरातत्विक महत्व के सिक्के और अन्य सामान के लिए म्यूजियम भी तैयार होगा। परिसर में महाभारत काल की घटनाओं का चित्रण लेजर शो के जरिये होगा। द्रोणसागर के चारों तरफ पर्यटकों के टहलने के लिए ट्रैक तैयार किया जाएगा।
पर ये सब कब होगा पता नहीं? शहर के लोग भी शांत और मौन है।
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