@शब्द दूत ब्यूरो (05 सितंबर 2023)
काशीपुर। देवभूमि पर्वतीय महासभा का आपसी विवाद सुलझाने की कोशिश अब नाकामयाब साबित होती जा रही है। पिछले दिनों आहूत एक बैठक में इसके लिए किये गये प्रयास असफल हो गए हैं।
दरअसल रामलीला मंचन को लेकर एक बैठक बुलाई गई थी। बैठक का मुख्य एजेंडा रामलीला मंचन की तैयारियों को लेकर था। लेकिन अधिकांश समय बैठक में देवभूमि पर्वतीय महासभा का विवाद छाया रहा। मौके पर मौजूद कुछ वरिष्ठ लोगों द्वारा विवाद सुलझाने का अपनी ओर से पूरा प्रयास किया गया। बैठक में जहां रामलीला मंचन के लिए बी बी भट्ट को संयोजक बनाने में सभी लोगों की सहमति रही वहीं निवर्तमान अध्यक्ष सुरेंद्र सिंह जीना तथा निवर्तमान उपाध्यक्ष प्रदीप जोशी के बीच चल रहे विवाद को सुलझाने के लिए वहां प्रदीप जोशी को कार्यकारी अध्यक्ष बनाने का सुझाव दिया गया। यहां तक कि बैठक में पर्वतीय समाज के कुछ वरिष्ठ लोगों ने दोनों पक्षों की एक कमरे में बैठक करायी। बैठक के बीच में निवर्तमान अध्यक्ष सुरेंद्र सिंह जीना बाहर आ गये।
बाद में पर्वतीय समाज के वरिष्ठ लोगों ने प्रदीप जोशी को कार्यकारी अध्यक्ष बनाने पर सहमति की घोषणा कर दी। बाकायदा प्रदीप जोशी को कार्यकारी अध्यक्ष बनने पर बधाई भी दी गई। लेकिन बैठक के दौरान ही निवर्तमान अध्यक्ष सुरेंद्र सिंह जीना इस निर्णय से संतुष्ट नहीं दिखाई दिये। सुरेंद्र सिंह जीना का कहना था कि यह बैठक देवभूमि पर्वतीय महासभा की नहीं है। महासभा के पदाधिकारियों का निर्णय देवभूमि पर्वतीय महासभा की बैठक में होना चाहिए।
उधर बैठक के बाद प्रदीप जोशी ने खुद को कार्यकारी अध्यक्ष बनाये जाने पर अपने बयान में कहा कि वह समाज के निर्णय को स्वीकार करते हुए अपनी जिम्मेदारी को निभायेंगे।
लग रहा था कि अब विवाद निपट गया है। लेकिन निवर्तमान अध्यक्ष सुरेंद्र सिंह जीना ने यह कहकर कि इस बैठक में सिर्फ रामलीला मंचन की बात तय हुई है। बंद कमरे में देवभूमि पर्वतीय महासभा के पदाधिकारी का मनोनयन नहीं हो सकता। सुरेंद्र सिंह जीना ने साफ़ साफ़ कहा कि मेरे और प्रदीप जोशी के बीच विवाद को निपटाने की कोशिश की जायेगी लेकिन इसके लिए देवभूमि पर्वतीय महासभा की बैठक बुलाई जाये किसी अन्य बैठक में यह निर्णय नहीं हो सकता।
बहरहाल जैसी संभावना जताई जा रही थी कि महासभा का विवाद अब निपट गया है वह और उलझ गया है। बैठक में बनाये गये कार्यकारी अध्यक्ष प्रदीप जोशी ने शब्द दूत को फोन कर कहा कि उन्हें समाज के वरिष्ठ लोगों की मौजूदगी में पूरे समाज ने इस पद पर मनोनीत किया है। प्रदीप जोशी ने इस संबंध में मीडिया पर आ रही खबरों पर भी आपत्ति जताई कि वह मामले को लेकर सही खबरें नहीं दे रहा है। यहां तक कि उन्होंने शब्द दूत यू ट्यूब चैनल पर प्रसारित वीडियो पर भी आपत्ति जताई है। उनका कहना था कि कुछ वरिष्ठ लोगों की बात चैनल ने जानबूझकर हटा दी। जिनकी बात हटाई गई उन्होंने स्वयं शब्द दूत से इस बात का आग्रह किया था। उनकी भावनाओं का सम्मान करते हुए उनके कथन को नहीं दिखाया गया था। इसके बावजूद प्रदीप जोशी ने बार बार कहा कि शब्द दूत ने जानबूझकर कर उनके कथन को हटा दिया।
आपको बता दें कि देवभूमि पर्वतीय महासभा का दो साल से चल रहा विवाद महासभा के ही कुछ लोगों की बदौलत सार्वजनिक हुआ है। मीडिया को भी जानकारी इन्हीं लोगों द्वारा दी जाती रही है। ऐसे में मीडिया पर दोषारोपण कर महासभा के लोगों द्वारा एक नया विवाद पैदा किया जा रहा है।
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