@शब्द दूत ब्यूरो (15 अगस्त 2023)
बागेश्वर उपचुनाव के लिए कांग्रेस और भाजपा ने अपने अपने प्रत्याशियों के नाम घोषित कर दिए हैं। प्रत्याशियों के नामों की घोषणा के साथ ही इन दोनों राष्ट्रीय दलों ने साबित कर दिया कि कार्यकर्ता उनके लिए महत्वपूर्ण नहीं है।
बताते चलें कि भारतीय जनता पार्टी अपने कार्यकर्ताओं को देव तुल्य कहती है। लेकिन ये देवतुल्य कार्यकर्ता केवल कहने भर के लिए है। जब भी किसी महत्वपूर्ण चुनाव या पद की बात आती है तो निचली पंक्ति का कार्यकर्ता को दरकिनार कर दिया जाता है। और ये केवल भाजपा में ही हो ये ज़रूरी नहीं है। कार्यकर्ता को निष्ठावान रहने और अनुशासन के चाबुक से डरा कर दलों के बड़े नेता भरमाते रहते हैं।
बात करें कांग्रेस की तो बागेश्वर में कांग्रेस के तमाम नेता वर्षों से पार्टी के प्रति अपनी निष्ठा निभाते रहे हैं। पर वह केवल निष्ठा निभाने के लिए ही हैं। ऐन मौके पर दूसरे दल से आये व्यक्ति को उपचुनाव में खड़ा कर दिखा दिया कि कार्यकर्ता की पार्टी में ऐसे कार्यकर्ताओं की ज्यादा वकत नहीं है और पार्टी हाईकमान ने जिसे मौक़ा दिया है अब उसके प्रति निष्ठा उन्हें निभानी पड़ेगी।
उधर परिवारवाद का ढिंढोरा दूसरे दलों पर आरोप मढ़ने वाली भाजपा ने दिवंगत मंत्री स्व चन्दन राम दास की पत्नी को टिकट देकर दूसरी पंक्ति में खड़े कार्यकर्ताओं को केवल नारे लगाने और बड़े नेताओं की महिमामंडन के लिए ही पार्टी में रखा है।
दोनों राष्ट्रीय पार्टी में कार्यकर्ता सिर्फ नाम के लिए है। हालांकि मजे की बात यह है कि दोनों ही दल कार्यकर्ता को पार्टी की रीढ़ बताते नहीं थकती है। लगातार हो रही अपनी उपेक्षा से दोनों दलों के निष्ठावान कार्यकर्ता जिस दिन इस बात को समझ लेंगे तब क्या होगा?
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