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काशीपुर: आखिर क्या है देवभूमि पर्वतीय महासभा का भविष्य? क्या निपटेगा आपसी विवाद? फैसले की प्रतीक्षा में कुछ सवाल

@शब्द दूत ब्यूरो (09 जुलाई 2023)

काशीपुर। देवभूमि पर्वतीय महासभा काशीपुर के पर्वतीय समाज का एक संगठन आजकल आपसी विवादों के चलते निष्क्रिय हो गया है।

काशीपुर के तीस हजार से अधिक पर्वतीय लोगों के प्रतिनिधि होने का दावा करने वाला यह संगठन वर्चस्व की लड़ाई , राजनीतिक दलों के अपने स्वार्थ की वजह से शहर में उपहास का पात्र बन गया है। शहर में पर्वतीय समाज का बड़ा नेता कहने वाले भी इस मामले में कुछ कर पाने में असहाय क्यों हैं?ये एक बड़ा सवाल है। स्वयं को पर्वतीय समाज का हितैषी कहने वाले इन लोगों की तटस्थता से दशकों पुरानी इस संस्था का भविष्य क्या होगा? यह भी एक सवाल लोगों के मन में कौंध रहा है।

हालांकि पर्वतीय समाज के लोग राजनीति में अपने अपने गाडफादर के प्रति पूरी निष्ठा जताते हैं।पर अफसोस अपने ही हाथों से बनाई इस संस्था के भविष्य को लेकर उनके पास कोई योजना नहीं है। वैसे आजकल तो पर्वतीय महासभा के दिग्गज बेबस हैं। बेबसी इसलिए कि अपने ही हाथों से इस संस्था को विवादित बना दिया है। आपसी विवाद को लेकर मुकदमा और नोटिस में उलझकर अपनी ही संस्था को फिलहाल मृतप्राय बना दिया है।

नारे जरूर लगाये जाते हैं कि आवाज दो हम एक हैं। पर यह नारा निरर्थक हो गया जब इसी एकता की धज्जियां उड़ाते हुए एक दूसरे को नोटिस देकर संस्था को गर्त में ले जाने का काम खुद ही कर दिया। हां एक बात जरूर विवादित पक्षों में एक ही है जिसको देखकर कहा जा सकता है कि संस्था के लोगों के विचार एक ही है। और वह विचार है कि मैं इस संस्था को चला सकता हूं। पर इसी एक विचार का मिलना इस संस्था के लिए घातक साबित हो गया।

फिलहाल मामला लंबित है और निर्णय का इंतजार है। निर्णय जो भी हो। किसी के भी पक्ष में हो। एक बात तो तय है कि आगे के लिए यह नजीर बन गई है कि आपस में मिल बैठकर कोई फैसला नहीं होगा। किसी तीसरे को मध्यस्थ बनाना पड़ेगा।

अब इधर हर वर्ष देवभूमि पर्वतीय महासभा द्वारा भगवान श्री राम लीला का मंचन किया जाता है। अब देखना यह है कि इस बार इस आयोजन की क्या रूपरेखा रहेगी। हालांकि रामलीला का आयोजन तो होगा लेकिन कैसे?यह भी एक सवाल पर्वतीय समाज के लोग पूछ रहे हैं।

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