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इंजीनियरिंग की नौकरी छोड़ खेती शुरू की, पिथौरागढ़ के ‘एपल मैन’ बने मनोज खड़ायत

@शब्द दूत ब्यूरो (14 अगस्त, 2022)

संघर्ष के साथ दोस्ती कर आगे बढ़ने के मनोज सिंह खड़ायत के इरादे उन लोगों के लिए प्रेरणा हैं, जो पहाड़ में रहकर अपनी जमीनों को आबाद करना चाहते हैं। वहीं, मनोज सिंह खड़ायत की सफलता की दास्तान ऐसे लोगों की सोच पर चोट भी करती है, जो कहते हैं कि पहाड़ में कुछ नहीं हो सकता। एक तरफ पहाड़ के गांव पलायन से खाली होते जा रहे जा रहे हैं, तो वहीं दूसरी ओर कई लोग ऐसे भी हैं, जो महानगरों की अपनी नौकरी छोड़कर गांव में कुछ अलग करने में जुटे हैं।

ऐसे ही एक शख्स हैं पिथौरागढ़ जिले के सिनतोली गांव के रहने वाले मनोज सिंह खड़ायत, जिन्हें यहां के लोग एपल मैन के नाम से भी जानते हैं। मनोज ने गांव की बंजर जमीन पर विदेशी सेब की खेती कर मिसाल पेश की है। बहरहाल, पिथौरागढ़ के ह्यूपानी तोक को एक नई पहचान मिली है, यह जगह अब इसलिए खास है क्योंकि यहां पर उत्तम क्वालिटी के सेबों की खेती की जा रही है, जो कि पिथौरागढ़ जिले में इस तरीके का पहला प्रयास है। यह सब मुमकिन किया है पिथौरागढ़ के एपल मैन नाम से अपनी पहचान बनाने वाले मनोज खड़ायत ने, जिन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी सेब की खर्चीली खेती को अपनाकर आज पूरे जिले के लिए उत्तम क्वालिटी के सेबों की खेती के रास्ते खोले हैं।

मनोज सिंह खड़ायत एक कम्प्यूटर इंजीनियर हैं। वह कम्प्यूटर इंजीनियरिंग की नौकरी छोड़कर स्मार्ट एग्रीकल्चर की दिशा में काम कर रहे हैं। उन्हें इसका आइडिया हिमाचल प्रदेश में अपने रिश्तेदारों के यहां सेब से लदे पेड़ों को देखकर आया, तब उन्होंने फैसला किया कि वह अपने गांव में भी सेब का उत्पादन करेंगे।

2017 में मनोज ने गांव में ट्रायल बेस पर 25 पेड़ों का एक सेब का बगीचा शुरू किया। अच्छा रिजल्ट मिलने के बाद उन्‍होंने साल-दर-साल अपने बगीचे का विस्तार करना शुरू कर दिया। अब आलम यह है कि मनोज ने विदेशी प्रजाति के सुपर चीफ, रेड कैफ, सुपर डिलेसियस और कैमस्पर की बड़े पैमाने पर खेती की है। सेब की ये प्रजातियां 5 से 6 हजार फीट की ऊंचाई पर होती हैं, जो कम चिलिंग आवर्स के बावजूद एक-दो साल में ही फल देना शुरू कर देती हैं। मनोज जिले के पहले किसान हैं, जिन्होंने सेब की इन प्रजातियों को लगाया है और वह अपने प्रयोग में सफल हुए हैं।

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