@नई दिल्ली शब्द दूत ब्यूरो(23 जुलाई 2022?)
कुछ अपवाद छोड़ दें तो भारतीय जनता पार्टी मुख्यमंत्री बदलने के लिए मशहूर है। अब चाहे भाजपा शासित राज्य का मुख्यमंत्री हो या फिर गैर-भाजपा राज्य में मुख्यमंत्री बदलना हो, दोनों ही मामलों में पार्टी अव्वल मानी जाती है। मुख्यमंत्री बदलने में भाजपा के नेता खासकर अमित शाह को खासी महारत हासिल है।
2014 में भाजपा के सत्तारूढ़ होने के बाद से ही अमित शाह को राज्यों में उथल-पुथल मचाने की कमान सौंप दी गई थी। यही नहीं ‘कांग्रेस मुक्त भारत अभियान’ की बागडोर भी अमित शाह के ही हाथ है। पिछले कुछ वर्षों का इतिहास उठा कर देखें तो भाजपा की सरकार होने के बावजूद पार्टी नेतृत्व ने अपने ही मुख्यमंत्री को हटाने में जरा भी देर नहीं की। भाजपा ने अप्रत्याशित रूप से चौंकाने वाले फैसले भी लिए। इसका सबसे बड़ा उदाहरण उत्तराखंड है, जहां एक के बाद एक मुख्यमंत्री बदले गए। ताजा घटनाक्रम महाराष्ट्र का है, जहां ठाकरे सरकार गिराकर भाजपा ने गठबंधन की ही सही, लेकिन सरकार बना ली।
राजधानी दिल्ली में भी लंबे समय से दिल्ली सरकार और केंद्र सरकार के बीच तनाव की खबरें आती रही हैं। आप के केंद्रीय संयोजक तथा दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उपराज्यपाल के बीच खींचतान जगजाहिर है। गाहेबगाहे आप सरकार के मंत्रियों के विरूद्ध भ्रष्टाचार के आरोप भी लगते रहे हैं।
दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन के बाद अब अरविंद केजरीवाल के सबसे भरोसेमंद और दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया पर अबकी बार शिकंजा कसा है। माना जा रहा है कि मनीष सिसोदिया पर भ्रष्टाचार के आरोपों के बहाने सीधे अरविंद केजरीवाल को निशाना बनाया गया है।
इधर, आरोपों से तिलमिलाए अरविंद केजरीवाल ने तीखा निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा के लोग हमें डराने की कोशिश कर रहे हैं। हम सावरकर की औलाद नहीं जो डर जाएंगे। हम भगत सिंह के बेटे हैं।
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि सिसोदिया पर लगाए गए सभी आरोप पूरी तरह से बेबुनियाद हैं। सिसोदिया दिल्ली की शिक्षा प्रणाली को मजबूत करने के लिए बहुत मेहनत कर रहे हैं। इसके चलते हर जगह उनकी प्रशंसा हो रही है। लोग हमारे काम के चलते चुनाव में समर्थन कर रहे हैं। भाजपा को इससे जलन हो रही है। यही वजह है कि केंद्र सरकार हमें रोकने की कोशिश कर रही है।
उधर एल जी के हस्तक्षेप के बाद यहाँ दिल्ली की राजनीति तेज होने लगी है। दरअसल अन्य राज्यों में भाजपा ने विपक्षी दलों में सेंध लगाकर उन्हें मात दी है। लेकिन दिल्ली में आम आदमी पार्टी के विधायक भाजपा को ऐसा कोई मौका नहीं दे रहे हैं। जबकि भाजपा की कोशिश है कि किसी तरह दिल्ली में भी अन्य राज्यों की तरह सत्ता परिवर्तन कराया जाय।
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