
लिखना तो रोज है लेकिन अब ऐसे लिखना है कि गर्दन बची रहे .अब भले नूपुर शर्मा गिरफ्तार न हो और नूपुर का सर कलम करने पर ईनाम देने वाला गिरफ्तार हो जाये ,हमें कोई मतलब नहीं. कन्हैया लाल की हत्या की साजिश करने वाले पकडे जाएँ या खुले घूमें हमें क्या करना ? सुप्रीम कोर्ट को भाट मंडली ट्रोल करे तो भी हमें क्या ? हमें तो अपने काम से काम रखना है .बस यही हमारा काम है .
देश में मंहगाई की डायन पूरा देश खा जाये हम क्यों बोलें ? जिन्हें बोलना है जब वे ही नहीं बोल रहे तो हम क्यों बोल-बोलकर अपना गला खराब करें ? अब बोलने के खतरे लगातार बढ़ रहे हैं. बेचारा सुप्रीम कोर्ट भी सोच रहा होगा कि कहाँ फालतू में नूपुर के खिलाफ बोलकर उसने आफत मोल ले ली .जिस न्याय पालिका से जिंदगी भर रोटी-रोजी कमाकर सेवा निवृत्त होने वाले लोग ही जब अदालत के सगे नहीं हुए तो फिर कौन है जो सुप्रीम अदालत के साथ खड़ा होगा ? अंधभक्ति का ज्वर देश में तेजी से बढ़ रहा है. और वैद्य कहते हैं कि ये वायरस है,तेजी से फैलता है बिलकुल ‘ कोविड ‘ की भांति .इसलिए इससे बचने का एक ही उपाय है कि मुंह बंद रखिये और एक निर्धारित दूरी बनाये रखिये .
अमेरिका में बात-बात पर गोलियां चलाने वाले समाज की तरह हो रहा है हमारा भारतीय समाज. इधर आप कुछ बोले और उधर आपके खिलाफ बरसने लगेंगे बम और गोले .यानि बोलना अपराध है. अब, जब अपराध ही करना है तो कविवर नीरज की तरह आदमी होने के कारण आदमी से प्यार करने का अपराध क्यों न किया जाये ? क्यों सियासत के भैराये हुए वृषभ छेड़े जाएँ .उनके सींग एक दिन खुद ही टूट जायेंगे .भैराये हुए सांड अक्सर सींगों में खुजली होने पर या तो घूरे की मिटटी में जोर आजमाइश करते हैं या आपस में ही लड़-मरते हैं .
हमारे पंडित जी ने कहा कि आज कोई अभिजीत मुहूर्त नहीं है इसलिए मौन रहना ही श्रेयस्कर है .जो बोलेगा अपनी कब्र खोदेगा या चिता सजायेगा .कायदे से आज राष्ट्र हित में पूरे मुल्क की बोलती बंद होना चाहिए .देश में एक हिस्से में भूस्खलन से 81 जवान काल कवलित हो गए ,कोई नहीं बोला.अमेरिका में तो इतने पर दो बार राष्ट्रीय शोक हो जाता ,लेकिन हमारे लिए शोक तभी होता है जब कोई महान नेता उठे .सेना या अर्ध सेना के जवानों की मौत हमारे लिए शोक की वजह नहीं होती.लेकिन जब कोई नहीं बोला तो हम क्यों बोलें भला ?
हमने बोल-बोलकर अपने फ़ॉलोअर्स से ज्यादा विरोधी बढ़ा लिए हैं .जिन्हें अपनी नाक पोंछने का शऊर नहीं है वे हमारे बोलते ही बमकने लगते हैं .न जान ,न पहचान लेकिन बमकना अंधभक्तों का परम् कर्तव्य है सो बेचारे बमकते हैं .वो तो गनीमत है कि हम हाथ जोड़कर आगे निकल जाते हैं अन्यथा वे हमारा चीर हरण करके ही मानें .नादानों की फ़ौज जब सुप्रीम कोर्ट का चीर हरण करने पर उतारू हो तो हम जैसे मामूली लेखक लोग किस खेत की मूली हैं .हमें तो कभी भी गाजर-मूली की तरह सलाद में बदला जा सकता है .
अब हमारी दिलचस्पी न देशी सियासत में है और न विदेशी सियासत में.ब्रिट्रेन में सरकार की ट्रेन डिरेल होती रहे हमें क्या मतलब ? कोऊ नृप होय ,हमें का हानि . हमें मतलब आम जनता को क्या लेना देना इस उठा-पटक से ?. हम ब्रिट्रेन के वित्त मंत्री नादिम जहावी को तो समझा नहीं सकते कि बोरिस का साथ मत छोडो .चिपके रहो हमारे वित्त मंत्री सीतारमण की तरह प्रधानमंत्री से .उधेड़ डालो देश की जनता को भेड़ की तरह .जनता सरकार या सरकारी पार्टी की जड़ों में मठा न डाल सके इसलिए उस पर भी जीएसटी लगा दो .अस्पताल में भर्ती हो तो बिस्तर पर जीएसटी लगा दो ,आखिर भागकर जाएगी कहाँ जनता ?
अब हम न नूपुर शर्मा का समर्थन करने वाले हैं और न विरोध .हमें यूपी सरकार से मतलब है न राजस्थान सरकार से .हमारी दिलचस्पी एकनाथ शिंदे में भी नहीं रही .हमें हमारे बच्चे समझते हैं कि आपको राष्ट्रभक्ति का प्रदर्शन करने से कोई तमगा नहीं मिलने वाला ,यदि मिलेगा भी तो वो, जिसका रास्ता जेल की तरफ जाता है . बच्चे हमसे ज्यादा हितोपदेश पढ़े हैं शायद . कहते हैं-जल में रहकर मगर से बैर नहीं करना चाहिए . बच्चे तो बच्चे हैं उन्हें अपने माँ-बाप की फ़िक्र तो होती है .वे भी खामखां उन्हें शहीद होते नहीं देखना चाहते
अमेरिका में रहने वाले बच्चे बताते हैं कि अमेरिका में भी मंहगाई डायन की बहन 40 फीसदी बढ़ गयी है लेकिन वहां भारत की तरह ही कोई कुछ नहीं बोलता .चुप रहता है .जानता है कि दुनिया की कोई सरकार हो भारत सरकार जैसी ही होती ही .उसका काम बढ़ती हुई किसी भी चीज को रोकना नहीं होता,फिर चाहे वो कीमतें हों या समस्याएं .अमेरिका में भी हिंसा बढ़ रही है. स्वतंत्रता दिवस पर शिकागो में फायरिंग हो गयी. किसी ने राष्ट्र्पति जो बाइडन से कुछ कहा क्या ? सब जानते हैं कि बाइडन भी मोदी की तरह निर्दोष हैं .फायरिंग करने वाले वैसे ही सिरफिरे लोग हैं जैसे कि नूपुर या कन्हैया लाल के हत्यारे .इन्हें कौन रोक सकता है. नूपुर को जरूर बचाया जा सकता है .सो सरकार अपनी तरफ से पूरी कोशिश कर रही है. अब तक नूपुर गिरफ्तार नहीं हुई है .नोप्पुर को धमकी देने वाले अजमेर के मौलवी की गिरफ्तारी आसान है लेकिन नूपुर की फिरफ्तारी आसान नहीं है .क्योंकि अब हमारे यहां भले एक देश ,एक निशान ,एक विधान हो लेकिन चलता सब सरकार की मर्जी से ही है .
बहरहाल देश में कहीं कुछ गड़बड़ नहीं है. सब अमन-चैन है .जुबैर और तीस्ता जेल में हैं और जो बाहर रह गए हैं उनके लिए व्यवस्था की जा रही है .देश में क़ानून और व्यवस्था बनाये रखने के लिए ऐसे तत्वों को जेल में रखना ही राष्ट्रधर्म है .काली का पोस्टर भी काम नहीं आ सका अशांति फ़ैलाने में ,क्योंकि कनाडा का मामला था .कनाडा से हमें क्या लेनादेना .उम्मीद है कि आप भी हमारी तरह मौन रहने का रियाज करेंगे .हम न वादा करते हैं और न दवा कि हमारी मौन साधना कितने दिन चल पाएगी ,लेकिन कोशिश एक आशा जो है .
@ राकेश अचल
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