@शब्द दूत ब्यूरो (13 अप्रैल, 2022)
प्रदेश अध्यक्ष, नेता प्रतिपक्ष और विधायक दल के उपनेता की नियुक्ति के चौंकाने वाले फैसले का आधार कांग्रेस के स्थानीय नेताओं की गुटबाजी बनीं। कांग्रेस हाईकमान का मानना है कि प्रदेश में कांग्रेस की करारी हार की वजह स्थानीय छत्रपों की आपसी गुटबाजी और अपने ही प्रत्याशियों को हराने का प्रयास करना रहा है।
नेता प्रतिपक्ष पर दोबारा मजबूत दावेदारी के बावजूद हाईकमान ने प्रीतम को भी किनारे लगा दिया । सूत्रों के अनुसार राष्ट्रीय महासचिव केसी वेणुगोपाल और प्रदेश प्रभारी देवेंद्र यादव ने गुटबाजी को लेकर हाईकमान की नाराजगी की बात प्रदेश के नेताओं को साफ तौर बता भी दी है। इसकी तस्दीक पूर्व नेता प्रतिपक्ष प्रीतम सिंह ने भी की। उन्होंने कहा कि मुझे शीर्ष नेताओं ने गुटबाजी को हार की मुख्य वजह बताया।
कांग्रेस के नव नियुक्त प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा ने कहा कि कांग्रेस पदाधिकारियों की घोषणा के बाद कुछ लोग जानबूझकर गढ़वाल और कुमाऊं के झगड़े को बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं। करन माहरा ने कहा कि राज्य को उत्तराखंडियत के साथ देखे जाने की जरूरत है।
माहरा ने कहा कि उनके प्रतिद्वंद्वी अजय भट्ट चार साल तक भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष दोनों ही रहे लेकिन यह सवाल नहीं उठाया गया। त्रिवेंद्र सिंह रावत और तीरथ सिंह रावत के मुख्यमंत्री काल में गढ़वाल से ही मदन कौशिक प्रदेश अध्यक्ष रहे तब किसी ने यह बात नहीं उठाई। लेकिन अब जानबूझकर इस तरह की बातों को उछाला जा रहा है।
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