@शब्द दूत ब्यूरो (18 जनवरी, 2022)
कभी गढ़वाल के राजाओं की राजधानी के रूप में जाना जाने वाला श्रीनगर को उत्तराखंड की लोक संस्कृति का संवाहक माना जाता है। हेमवती नंदन बहुगुणा विश्वविद्यालय और अन्य संस्थानों की वजह आए एजुकेशन हब के रूप में भी विख्यात है श्रीनगर। प्रदेश में हुए विगत चार विधान सभा चुनावों में यहां बारी-बारी से भाजपा व कांग्रेस की झोली में जीत की खुशियां आई हैं। यह सीट 2002 व 2007 में अनुजाति आरक्षित सीट रही। जबकि 2012 से यह सामान्य सीट है।
वर्तमान में उत्तराखंड के पांचवें विधान सभा चुनाव में श्रीनगर विधान सभा सबसे हॉट सीट बन गई है। यहां एनआईटी उत्तराखंड के स्थायी परिसर निर्माण का मुद्दा 2009 से ही अनसुलझा है। जबकि मुख्यमंत्री रहते हरीश रावत और केंद्र में केंद्रीय शिक्षा मंत्री रहते डा. रमेश पोखरियाल निशंक परिसर निर्माण की स्थापना कर चुके हैं। मेडिकल कालेज श्रीनगर में कर्मचारियों के नियमितीकरण व स्पेशलिस्ट डाक्टरों की नियुक्ति हमेशा मुद्दा ही बने रहे।
कुल मतदाता- 106622
पुरुष मतदाता- 54423
महिला मतदाता- 52196
ट्रांस जेंडर मतदाता- 03
कब कौन रहा श्रीनगर सीट से विधायक
सुंदर लाल मंद्रवाल-2002 कांग्रेस
बृजमोहन कोटवाल-2007 भाजपा
गणेश गोदियाल-2012 कांग्रेस
डा. धन सिंह रावत-2017 भाजपा
श्रीनगर विधानसभा सीट के प्रमुख मुद्दे
-राजकीय मेडिकल कालेज के अस्थायी कर्मचारियों का नियमितीकरण व वेतन वृद्धि।
– एनआईटी उत्तराखंड के स्थायी परिसर सुमाड़ी का 12 वर्ष से अधिक समय से लटका है निर्माण कार्य। दो बार हो चुका है शिलान्यास।
– श्रीनगर रोडवेज डिपो का सुचारु संचालन।
– श्रीनगर से स्वीत तक मरीन ड्राइव का निर्माण घोषणा भर हुआ साबित।
– नगर निगम श्रीनगर प्रकरण को लेकर चल रहे विवाद को सुलझाना।
– मेडिकल कालेज श्रीनगर में सुपर स्पेशलिस्ट डाक्टरों की तलाश।
– राज्य विवि के अधीन श्रीनगर में महाविद्यालय की स्थापना।
– विधान सभा के दुर्गम क्षेत्रों में दूर संचार सेवा की बदहाल स्थिति।
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