@नई दिल्ली शब्द दूत ब्यूरो (19 जुलाई 2021)
अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के वैज्ञानिकों ने मंगल ग्रह पर प्राचीन जीवन के सबूत खोजे हैं। साथ ही ये भी पता किया है कि इन सबूतों और संकेतों को लाल ग्रह से मिटा दिया गया है। मंगल ग्रह पर जीवन संबंधी सबूतों का रिकॉर्ड नासा के क्यूरियोसिटी रोवर यान के यंत्रों में दर्ज है। साथ ही यह भी दर्ज है कि इन सबूतों के साथ मंगल ग्रह पर छेड़छाड़ हुई है। चाहे वह वहां के मौसम द्वारा की गई हो या फिर समय के द्वारा।
नासा के नए अध्ययन में यह बात सामने आई है कि मंगल ग्रह के कुछ हिस्सों से प्राचीन जीवन के सबूतों को मिटाया या घिसा गया है। यह हैरतअंगेज खोज क्यूरियोसिटी रोवर ने क्ले (मिट्टी) से भरे पत्थरों के जांच के दौरान खोजी। क्यूरियोसिटी रोवर इस समय गेल क्रेटर में है। यह मंगल ग्रह की पुरानी झील है जो इस समय सूखी हुई है। यह झील 360 करोड़ साल पहले एस्टेरॉयड (उल्का पिंड) के टकराने से बनी थी।
क्ले का मिलना मतलब जीवन की संभावनाओं का होना बताया जाता है। क्योंकि क्ले तब बनता है जब पत्थर के मिनरल्स अलग होते हैं और पानी के साथ मिलकर सड़ते हैं। यह जीवन की शुरुआती आधार माने जाते हैं। यह माइक्रोबियल जीवाश्म को सदियों तक संभालकर रखने के लिए उपयुक्त पदार्थ होते हैं।
क्यूरियोसिटी रोवर ने प्राचीन मडस्टोन के दो सैंपल लिए। एक सेडिमेंट्री रॉक जिसमें क्ले भरा था। ये पत्थर झील के सूखे हुए हिस्से में पड़ा था। यह करीब 350 करोड़ साल पुराना पत्थर है। इसके अंदर क्ले के जो हिस्से मिले हैं वो उम्मीद से आधे थे। लेकिन इसके अंदर आयरन ऑक्साइड की मात्रा बहुत ज्यादा थी, जिसकी वजह से मंगल ग्रह को लाल रंग मिलता है।
इन क्ले का पत्थरों से मिट जाना यानी प्राचीन जीवन का सबूत मिट जाना एक बड़ी घटना है। माना जाता है कि मंगल ग्रह पर पुराने समय में मौजूद नमकीन पानी के बहाव की वजह से ये क्ले पत्थरों से गायब हो गए। कई स्थानों पर मौजूद क्ले की मात्रा समय के साथ कम होती चली गई। अब वहां बेहद ही सूक्ष्म स्तर पर क्ले के रूप में प्राचीन जीवन के सबूत बचे हैं।
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