@शब्द दूत ब्यूरो
काशीपुर । शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में अघोषित विद्युत कटौती से हाहाकार मच गया है। एक और सूरज की तेज तपन से नागरिकों का जीना दुश्वार हो रहा है वहीं विद्युत विभाग की मनमानी के चलते धान की फसल लगाने वाले किसानों पर दोहरी मार पड़ रही है।
शहर व ग्रामीण क्षेत्रों में में दिन हो या रात अघोषित बिजली कटौती जारी है। पिछले कई दिनों से हालात यह हैं कि तड़के सुबह से लेकर देर रात तक करीब 8 से 10 बार बिजली की अघोषित कटौती की जा रही है। जिसके चलते 10 मिनट से लेकर 40 मिनट तक बार-बार बिजली की कटौती की जा रही है। इसके साथ ही वोल्टेज कम और अधिक आना भी बड़ी समस्या बना हुआ है। लोगों ने शिकायत की है कि बिजली आती नहीं लेकिन बिल आ जाते हैं।
बिजली की आंख-मिचौनी केेसाथ ही वोल्टेज की समस्या भी लोोगों के लिए जी का जंजाल बनी हुई है। कई बार अधिक वोल्टेज आने से घरों में पंखे व ट्यूव लाइट, एलईडी व अन्य कीमती बिजली के उपकरण भी फुंक रहे हैं । इस बात की शिकायत नागरिक कई बार विभाग को कर चुके हैं लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है। उधर खरीफ सीजन की प्रमुख फसल धान की खेती में लगे किसान इस बिजली कटौती के चलते परेशान है। लगातार हो रही बिजली कटौती के कारण धान की फसल को सही-सलामत रखने में किसानों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
किसानों का कहना है कि धान की खेती में बहुत ज्यादा पानी की जरूरत होती है। रोपाई के बाद भी खेत में 3 इंच पानी चाहिए होता है। मॉनसून अभी पहुंचा नहीं है, इसलिए बारिश भी नहीं हो रही है। खेत में पानी की जरूरत को पूरा करने के लिए किसान जनरेटर से ट्यूबवेल चला रहे हैं। डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण इसमें काफी खर्च आ रहा है। बिजली की समस्या से परेशान किसानों का कहना है कि अगर आपूर्ति की स्थिति ठीक नहीं हुए तो हम धान की फसल को उखाड़ने के लिए मजबूर हो जाएंगे। अभी तक बिजली की सप्लाई में कोई दिक्कत नहीं थी। इस वजह से किसानों ने जनरेटर नहीं खरीदे थे। अब उन्हें जनरेटर भी खरीदना पड़ रहा है और इसकी कीमत लगभग एक लाख रुपए तक है जबकि फीडर पंप 30 से 35 हजार रुपए में मिल जाता है। इसके अलावा डीजल का खर्चा है। ज्यादातर किसानों के पास इतनी पूंजी नहीं है। ऐसे में उन्हें दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
धान की खेती में शुरुआत से लेकर कुछ समय बाद तक पानी की जरूरत होती है। बिना पानी के नर्सरी भी नहीं डाल सकते. पौध तैयार होने पर रोपाई के वक्त खेत में पर्याप्त पानी होना चाहिए। इसके बाद 6 से 8 हफ्तों तक खेत में हमेशा तीन इंच तक पानी की जरूरत होती है। अब बिजली सप्लाई बाधित होने से और बढ़े हुए डीजल के दाम के कारण किसानों की परेशानी काफी बढ़ गई है। 
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