देश में जब कोरोना महामारी से लड़ने के लिए हर हाथ से सहयोग मांगा जा रहा है तो उत्तराखंड में टिहरी जिले में प्रतापनगर क्षेत्र के एक सामाजिक कार्यकर्ता की पहल पर करीब डेढ़ लाख रुपए की कोरोना दवा का वितरण अचानक रोके जाने से क्षेत्र की जनता हैरान हैं।
सामाजिक कार्यकर्ता राजेश्वर पैन्यूली ने बताया कि उन्होंने स्थानीय कार्यकर्ताओं के सहयोग से क्षेत्र के भदुरा में कोरोना दवा के निःशुल्क वितरण के लिए सभी कोरोना प्रोटोकॉल के निर्देशों का पालन करते हुए शिविर लगाने की व्यवस्था की थी। लेकिन उन्हें सोमवार को देर रात अचानक चिकित्सा शिविर नही लगाने की सूचना दी गई।
पैन्यूली ने बताया कि उन्होंने प्रतापनगर के एसडीएम को शिविर लगाने की लिखित सूचना दी और जिले के मुख्य चिकित्सा अधिकारी से भी बाकायदा इसकी अनुमति ली थी। उनका कहना है कि क्षेत्र में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र दीनगांव ने भगतसिंह कॉलेज दिल्ली तथा टीएचडीसी की मदद से सार्वजनिक निजी आधार पर संचालित इस शिविर की लिखित अनुमति दी थी।
टिहरी बांध की विशाल झील के कारण अलग-अलग पड़े प्रतापनगर क्षेत्र के लिए 2005 में स्वीकृत और 2020 में बनकर तैयार हुए डोबरा चांटी पुल के निर्माण में हुए घोटालो को सूचना के अधिकार के तहत उजागर कर दबाव बनाने में अहम भूमिका निभाने वाले पैन्यूली ने कहा कि इस शिविर का उद्घाटन स्थानीय सांसद माला राज्यलक्ष्मी शाह द्वारा वर्चुअल आधार पर किया जाना था। लेकिन शिविर को रोके जाने से क्षेत्र के लोगो में हैरानी है।
पैन्यूली ने कहा कि जब पूरा देश महामारी के खिलाफ एकजुट होकर लड़ रहा है तो इस तरह से दूरदराज के क्षेत्र में निःशुल्क दवा वितरण के कार्यक्रम को रोकना मानवता के विरुद्ध अपराध है।

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