@नई दिल्ली शब्द दूत ब्यूरो
पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव अलपन बंद्योपाध्याय के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग को रिपोर्ट करने की संभावना कम है क्योंकि राज्य सरकार से अभी उन्हें मंजूरी नहीं मिली है। इधर, सेवानिवृत्ति से कुछ दिन पहले ही उनके अचानक स्थानांतरण से बड़ा विवाद पैदा हो गया है। सूत्र ने बताया कि मुख्य सचिव रविवार को राज्य सचिवालय में ही मौजूद थे। सूत्रों के अनुसार, अभी तक बंद्योपाध्याय को पश्चिम बंगाल सरकार ने ड्यूटी से मुक्त नहीं किया है। मुख्य सचिव मुख्यमंत्री द्वारा आहूत समीक्षा बैठक में वह हिस्सा ले सकते हैं।”
केंद्र ने अचानक बंद्योपाध्याय की सेवाएं मांगीं और राज्य सरकार से कहा कि शीर्ष नौकरशाह को तुरंत वहां से मुक्त किया जाए। बंद्योपाध्याय 60 वर्ष की उम्र पूरा करने के बाद 31 मई को सेवानिवृत्त होने वाले थे। बहरहाल, कोविड-19 के प्रबंधन को ध्यान में रखते हुए उन्हें तीन महीने का सेवा विस्तार दिया गया था।
बता दें कि पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव अलपन बंदोपाध्याय को दिल्ली में बुलाने के मोदी सरकार के फैसले पर टीएमसी ने सवाल उठाया था। ममता बनर्जी ने कहा था कि, “क्योंकि आप बंगाल में भाजपा की हार पचा नहीं पा रहे हैं, आपने पहले दिन से हमारे लिये मुश्किलें खड़ी करनी शुरू कर दी। मुख्य सचिव की क्या गलती है?

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