काशीपुर । योग गुरु बाबा रामदेव के एलोपैथी को लेकर की गई आलोचना के बाद देशभर में डाक्टरों में आक्रोश व्याप्त है। आईएमए ने तो बाबा रामदेव के विरूद्ध देशद्रोह का मुकदमा दर्ज करने की मांग तक कर डाली है।
शब्द दूत ने चिकित्सकों से बाबा रामदेव के बयान को लेकर बात की। सबसे पहले जानिये जसपुर के प्रख्यात चिकित्सक डा शैलेंद्र मोहन सिंघल के विचार। डॉ सिंघल ने स्वामी रामदेव के एलोपैथी को लेकर दिये गये बयान को गलत बताया है। बताते चलें कि डा सिंघल भाजपा के वरिष्ठ नेता भी हैं और जसपुर से विधायक भी रह चुके हैं।
डा शैलेंद्र मोहन सिंघल कहते हैं कि जितनी भी चिकित्सा पद्धति हैं चाहे वह एलोपैथी हो या आयुर्वेद समय-समय पर इनकी अपनी उपयोगिता सिद्ध होती रही है। दोनों ही पद्धतियों का सम्मान होना चाहिए। किसी भी चिकित्सा पद्धति की आलोचना उचित नहीं है। दोनों क्षेत्रों में काम कर रहे लोगों को एक दूसरे का सम्मान करना चाहिए। डॉ सिंघल मानते हैं कि समय के साथ एलोपैथी और आयुर्वेद की चिकित्सा पद्धतियों में नयी-नयी खोज हुई है। उपचार के नये नये तरीके खोजे जाते हैं। नये नये प्रयोग होते हैं कुछ दवाईयां कारगर नहीं भी होती। आयुर्वेद और एलोपैथी विज्ञान है और विज्ञान को नकारा नहीं जा सकता है।
आईएमए के विरोध को जायज बताते हुए डॉ शैलेंद्र मोहन सिंघल कहते हैं कि चिकित्सकों की एक संस्था है आईएमए जिसे डाक्टरों पर आक्षेप लगने पर आना ही होगा। देशद्रोह के मुकदमे की आईएमए की मांग पर डा सिंघल कहते हैं कि यह एक अलग विषय है। एलोपैथी को बदनाम करना चाहिए उचित नहीं माना जा सकता। 

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