कोरोना वायरस की दूसरी लहर से मची तबाही को लेकर लोगों में गुस्सा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार पर इसके असर ने भारतीय जनता पार्टी और उसके वैचारिक संरक्षक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के शीर्ष पदाधिकारियों में गहरी बेचैनी पैदा कर दी है। सूत्रों की मानें तो प्रधानमंत्री मोदी की सात सालों की सत्ता में जनधारणा और चुनाव नतीजों ने शक्तिशाली “संघ परिवार” को कभी इतना परेशान नहीं किया।
सूत्रों का कहना है कि भाजपा और आरएसएस इस धारणा से चिंतित हैं कि कोरोना को लेकर कुप्रबंधन से हर वो वर्ग परेशान है, जो पार्टी का कोर सपोर्टर है. मध्यम वर्ग महामारी से सबसे ज्यादा प्रभावित है और अब वायरस गांवों का रुख कर रहा है, खासकर उत्तर प्रदेश और बिहार में।
भाजपा के एक नेता ने कहा, “जब आप किसी को खो देते हैं तो उसका दु:ख और गुस्सा लंबे समय तक रहता है और वह किसी भी रूप में सामने आ सकता है।” उन्होंने कहा कि महामारी को लेकर बीजेपी पर चुनाव में क्या असर होगा इसको लेकर शीर्ष नेतृत्व में बड़ी चिंता है। नेता ने माना कि कोरोना संकट ने लचर स्वास्थ्य इंफ्रास्ट्रक्चर और महामारी को लेकर सरकार की तैयारी में कमी को उजागर किया है।
अगले लोकसभा चुनाव में तीन साल का समय है। लोकसभा चुनाव 2024 में होने हैं। हालांकि, उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में अगले साल विधानसभा चुनाव है। यदि उत्तर प्रदेश पंचायत चुनाव के नतीजे को संकेत के तौर पर देखा जाये तो बीजेपी के लिए यह चिंता करने का कारण है।

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