काशीपुर । पिछले चालीस सालों से कोतवाली के सामने फड़ लगाकर जीवन यापन करने वाले 30 दुकानदार आज भी बरसात और आंधी तूफान के बीच दिन काट रहे हैं। नगर पालिका और अब नगर निगम को प्रतिदिन शुल्क देने के बावजूद इन्हें स्थायी निर्माण की अनुमति नहीं दी गई। जिससे ये आशंकाओं के बीच झूल रहे हैं। हालांकि नगर निगम में पक्की दुकानें बनाने का प्रस्ताव भी तीन साल पहले पास हो चुका है। मामले को लेकर फड़ व्यापारियों ने अदालत की भी शरण ली है।

नगर निगम की मार्च 2017 में हुई बोर्ड बैठक में जेल रोड और कोतवाली के सामने करीब 40 वर्षों से फड़ लगा रहे व्यापारियों के लिए दुकान बनाने का प्रस्ताव फाइलों में ही दबकर रह गया। 2017 के विधानसभा चुनावों के बाद हटी आचार संहिता के बाद 27 मार्च को हूई थी ये बैठक। बैठक में तब ये प्रस्ताव पारित किया गया था कि काशीपुर नगर निगम इन फड़ स्वामियों के लिए इसी जगह पर दुकान बनाकर देगा। बोर्ड बैठक के दौरान 30 फड़ स्वामियों को दुकान समेत कई प्रस्तावों को सर्वसम्मति से मंजूरी दी गई।
फड़ स्वामियों में निगम द्वारा पारित इस प्रस्ताव के बाद खुशी की लहर दौड़ गई थी। पर तीन साल पहले पारित यह प्रस्ताव ठंडे बस्ते में चला गया। जब काशीपुर नगरपालिका थी तब तत्कालीन चेयरमैन शम्सुद्दीन के कार्यकाल में इन फड़ स्वामियों को यहाँ पर लोहे की अलमार बबनाकर रखने की अनुमति मिल गयी थी। जिससे इन्हें काफी राहत मिली। मेयर श्रीमती ऊषा चौधरी के कार्यकाल में पक्की दुकानें बनाने का प्रस्ताव तो इन फड़ स्वामियों के लिये आशा की किरण बना। पर बोर्ड बैठक में मंजूर दुकानें पक्की कब होंगी इसकी फड़ स्वामी बाट जोह रहे हैं। (जारी)




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