उत्तराखंड में मंत्री और अधिकारी के बीच बढ़ते टकराव के चलते लगता है कि अफसरशाही हावी हो रही है। न केवल मंत्री वरन् मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत भी इस मामले में अधिकारियों को आगाह कर चुके हैं। पिछले कुछ समय से उत्तराखंड के मंत्रियों और अधिकारियों के बीच टकराव के मामले में लगातार देखने में आ रहे हैं।
तीन जुलाई को खुद मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने अधिकारियों को चेताया था कि अधिकारी अक्सर भूल जाते हैं कि उनका क्या स्टेटस है और जनप्रतिनिधियों का क्या स्टेटस है। वे खुद को जनप्रतिनिधियों से ऊपर समझने लगते हैं, पर वे ये ना भूलें कि वे अफसर हैं जनप्रतिनिधि नहीं।
इसके बाद शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे के लाइजनिंग अफसर द्वारा एक जिला शिक्षा अधिकारी को थप्पड़ मारने की धमकी का मामला चर्चाओं में रहा। वहीं किच्छा के विधायक राजेश शुक्ला ने ऊधमसिंहनगर के जिलाधिकारी डा नीरज खैरवाल पर अपने अपमान को लेकर शिकायत की। शिकायत के साथ उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष को डीएम द्वारा विशेषाधिकार हनन का नोटिस तक दे दिया।
आज एक बार फिर शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक समीक्षा बैठक में अधिकारियों के न आने से इतने नाराज हुये कि बैठक ही छोड़ चले गये। दरअसल कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक की कुम्भ की समीक्षा बैठक में गृह, ऊर्जा, पेयजल, आवास, स्वास्थ्य, सिंचाई समेत कई महत्वपूर्ण महकमों के सचिवों के न आने से मंत्री नाराज हो गए।
भाजपा सरकार के दौरान जनप्रतिनिधियों और अफसरों के बीच टकराव की स्थिति से सरकार की किरकिरी हो रही है। इधर पिछले दिनों ऊधमसिंहनगर के एसएसपी के तबादले को भी भाजपा नेता के साथ हुई उनकी बहस को माना जा रहा है।
अब ऐसे में जब अफसर सरकार की नहीं सुन रहे तो जनता की कौन सुनेगा? सरकार और अधिकारियों के बीच चल रही ये रस्साकशी पूरे प्रदेश की जनता देख भी रही है और सुन भी रही है। 

Shabddoot – शब्द दूत Online News Portal
