@विनोद भगत
आमतौर पर बरसात के दिनों में भूस्खलन, नदी में हादसे, बाढ़ जैसी खबरों की प्रमुखता होती है। पर इस दौरान प्रकृत्ति के उजले पक्ष की ओर ध्यान ही नहीं दिया जाता। पर यहाँ आज की लीक से हटकर कुछ ऐसा अलौकिक दृश्य देखने में आया जिसने बताया कि प्रकृति के रौद्र रूप के पीछे एक खूबसूरत रूप भी है।
जी हाँ मैं बात कर रहा हूँ काशीपुर में हुई बरसात के बाद आज शाम की। यहाँ आज दिन भर हल्की से मध्यम बारिश होती रही। बादलों ने जैसे पूरे दिन आसमान को अपनी आगोश में लिए रखा और धरती को बूंदों से भिगोते रहे। गलियों, छतों और पेड़ों पर ठहरी हुई बारिश की नमी वातावरण में एक अलग ही ताजगी घोलती रही। लेकिन दिन ढलने के साथ प्रकृति ने जैसे अपने सौंदर्य का सबसे मनमोहक अध्याय खोल दिया।
देर शाम जब आसमान की ओर नजर उठी तो लगा, जैसे बादलों के कैनवास पर किसी अदृश्य चित्रकार ने लाल, नारंगी और सुनहरे रंग बिखेर दिए हों। क्षितिज के पास फैली लालिमा धीरे-धीरे पूरे आकाश को अपने रंग में रंग रही थी। बादलों की परतों के बीच से छनकर आती सूर्य की अंतिम किरणें ऐसा आभास दे रही थीं मानो दिन विदा होने से पहले प्रकृति को एक आखिरी उपहार देकर जा रहा हो।
सामने खड़े पेड़ों और ताड़ के वृक्षों की काली पड़ती आकृतियां उस लाल आकाश की पृष्ठभूमि में किसी चित्रकार की बनाई हुई कलाकृति जैसी लग रही थीं। बारिश से धुली हुई हवा, शांत होता वातावरण और दूर तक फैली आकाश की यह अद्भुत रंगत—सब मिलकर शाम को असाधारण बना रहे थे।
शहर अपने रोजमर्रा के शोर में भले ही व्यस्त रहा हो, लेकिन उस क्षण प्रकृति ने मानो समय को कुछ देर के लिए रोक दिया था। छत पर खड़े होकर इस दृश्य को देखना ऐसा था जैसे किसी कविता के भीतर प्रवेश कर जाना। मन में अनायास ही यह भाव उठता है कि प्रकृति जब अपना श्रृंगार करती है, तब उसे किसी आभूषण की आवश्यकता नहीं होती।
इस लालिमा में बारिश की ठंडक भी थी, विदा होते दिन की उदासी भी और आने वाली रात की शांति भी। आकाश का बदलता रंग जैसे जीवन का एक छोटा-सा दर्शन सुना रहा था—हर ढलती शाम अपने भीतर एक नई सुंदरता लेकर आती है और हर विदाई, अपने पीछे स्मृतियों का कोई सुंदर रंग छोड़ जाती है।
यह चित्र लेखक ने स्वयं अपने कैमरे में कैद किया है। शायद यही किसी तस्वीर की सबसे बड़ी खूबसूरती होती है कि वह केवल दृश्य को नहीं, उस दृश्य को देखते हुए मन में जन्मे भावों को भी अपने भीतर संजो लेती है।
काशीपुर की इस बरसाती शाम का यह लाल आकाश भी ऐसी ही एक स्मृति है—कुछ क्षणों के लिए ठहरा हुआ प्रकृति का सौंदर्य, जिसे आंखों ने देखा, मन ने महसूस किया और कैमरे ने हमेशा के लिए सहेज लिया।
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