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काशीपुर :गिरिताल की बदहाली और वेंडिंग जोन पर कांग्रेस नेता संदीप सहगल का मेयर बाली पर हमला, बोले- जनता जागी तो जनप्रतिनिधियों की कुर्सियां हिल जाएंगी, देखिए वीडियो

@शब्द दूत ब्यूरो (19 अगस्त 2026)

काशीपुर। उत्तराखंड कांग्रेस के प्रदेश सचिव संदीप सहगल ने बुधवार को गिरिताल सरोवर के पास पत्रकारों से वार्ता करते हुए भाजपा सरकार और स्थानीय जनप्रतिनिधियों पर काशीपुर की समस्याओं की अनदेखी करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पिछले करीब 25 वर्षों से काशीपुर में एक ही राजनीतिक परिवार का प्रभाव रहने के बावजूद गिरिताल की स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हो पाया है। चुनाव दर चुनाव गिरिताल के सौंदर्यीकरण, नवीनीकरण, सफाई और इसे उत्तराखंड के प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के वादे किए जाते रहे, लेकिन धरातल पर स्थिति आज भी चिंताजनक है।

सहगल ने कहा कि वर्ष 2027 का विधानसभा चुनाव अब ज्यादा दूर नहीं है और जनता के पास अपने जनप्रतिनिधियों से सवाल पूछने का इससे बेहतर मौका नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधि अक्सर जनता की समस्याओं को तब गंभीरता से सुनते हैं, जब उन्हें वोट की जरूरत होती है। उन्होंने कहा कि गिरिताल और द्रोणासागर का सौंदर्यीकरण, नवीनीकरण और सफाई उनके मेयर चुनाव के घोषणा पत्र में भी प्रमुख मुद्दा था।

उन्होंने कहा कि जनवरी 2025 में मेयर चुनाव के बाद स्थानीय प्रशासन के कई विभागों के अधिकारियों ने गिरिताल परिसर का निरीक्षण किया था। उस समय उन्हें उम्मीद जगी थी कि जल्द ही गिरिताल की सफाई और विकास का काम शुरू होगा। जनता की मांग को देखते हुए उन्होंने कुछ समय तक इंतजार भी किया, लेकिन अब करीब पौने दो वर्ष बीतने के बावजूद स्थिति में अपेक्षित बदलाव नहीं आया है।
सहगल ने आरोप लगाया कि गिरिताल आज भी गंदगी और अव्यवस्थाओं से जूझ रहा है। उन्होंने कहा कि यहां की स्थिति ऐसी है कि लोग ठीक से मॉर्निंग और इवनिंग वॉक तक नहीं कर पा रहे हैं। उन्होंने सांसद, विधायक और मेयर से सवाल करते हुए कहा कि लंबे समय से सत्ता और जिम्मेदारी में रहने के बावजूद यदि शहर की प्रमुख धरोहर की हालत नहीं सुधरती है तो जनता को जवाब कौन देगा।

उन्होंने जनप्रतिनिधियों को चेतावनी देते हुए कहा कि जनता की आवाज को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सत्ता और सरकार आपके पास है, इसलिए काशीपुर की समस्याओं के समाधान की जिम्मेदारी भी आपकी है। उन्होंने गिरिताल और द्रोणासागर की स्थिति सुधारने की मांग की।

सहगल ने इस दौरान काशीपुर की यातायात व्यवस्था और रामनगर रोड की समस्या का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने दिवंगत पूर्व जनप्रतिनिधि कैलाश गहतोड़ी को याद करते हुए कहा कि उनके साथ उनके पारिवारिक संबंध रहे और काशीपुर की यातायात समस्या को लेकर उन्होंने उनसे कई बार बातचीत की थी। सहगल ने कहा कि उन्होंने महानगर कांग्रेस अध्यक्ष रहते हुए भी तत्कालीन सरकार और नेताओं के सामने काशीपुर में वैकल्पिक मार्ग विकसित करने तथा यातायात समस्या के समाधान की मांग उठाई थी।

उन्होंने कहा कि रामनगर रोड का पुल वर्षों से लंबित है और इस कारण शहर की यातायात व्यवस्था प्रभावित होती रही है। उन्होंने सड़क की खराब स्थिति पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि रामनगर रोड में गड्ढे नहीं बल्कि गड्ढों में रामनगर रोड दिखाई देती है। उन्होंने सड़क निर्माण और रखरखाव के नाम पर खर्च होने वाली धनराशि के उपयोग पर भी सवाल खड़े किए।

सहगल ने बताया कि नहर वाली सड़क के निर्माण को लेकर भी उन्होंने कई बार आवाज उठाई थी। उनके अनुसार, इस सड़क के निर्माण के दौरान दुर्गा कॉलोनी और सैनिक कॉलोनी के प्रभावित लोगों की समस्याओं को भी अधिकारियों के सामने रखा गया था, क्योंकि कई लोगों के मकान और दुकानें इसकी जद में आ रही थीं। उन्होंने कहा कि सड़क के साथ फुटपाथ और नालियों का निर्माण भी जरूरी था, ताकि शहर की यातायात समस्या को कम किया जा सके।

उन्होंने दावा किया कि नहर वाली सड़क के निर्माण के बाद काशीपुर की यातायात व्यवस्था में कुछ सुधार हुआ है। रामपुर से खड़कपुर तक इस मार्ग के सुचारू होने से मुख्य मार्गों पर यातायात का दबाव कम हुआ है और इसका असर गिरिताल रोड पर भी पड़ा है। हालांकि उन्होंने कहा कि काशीपुर की यातायात समस्या का स्थायी समाधान तभी संभव है, जब रामनगर रोड का लंबित पुल पूरा हो।

सहगल ने काशीपुर में नहर वाली सड़क के फुटपाथों पर संभावित अतिक्रमण और वेंडिंग गतिविधियों को लेकर भी सरकार और स्थानीय प्रशासन पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि यदि फुटपाथों पर खोखे और दुकानें लगती हैं तो धीरे-धीरे अतिक्रमण बढ़ेगा और इसके बाद सड़क पर वाहनों का दबाव बढ़ने से जाम की समस्या फिर खड़ी हो जाएगी।

उन्होंने कहा कि किसी दुकान या फूड शॉप पर ग्राहक वाहन से आता है तो वह कुछ समय तक सड़क किनारे खड़ा रहता है। ऐसे में जिस सड़क के निर्माण से शहर को जाम से कुछ राहत मिली है, उसी सड़क पर अतिक्रमण होने से यातायात व्यवस्था प्रभावित होगी। उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार एक तरफ पुल और रामनगर रोड की समस्या का समाधान नहीं कर पा रही है और दूसरी तरफ जिस वैकल्पिक मार्ग से यातायात को कुछ राहत मिली है, उसी का व्यावसायीकरण किया जा रहा है।

सहगल ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि अब तक लोगों ने बैंकों, एलआईसी, एयरपोर्ट और सरकारी संपत्तियों के बिकने की बातें सुनी थीं, लेकिन अब सड़कें भी बेचने की तैयारी दिखाई दे रही है। उन्होंने कहा कि पीडब्ल्यूडी और सिंचाई विभाग की सड़कों पर चलने का अधिकार बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों का भी है। फुटपाथों को अतिक्रमण से मुक्त रखकर लोगों के पैदल चलने के लिए विकसित किया जाना चाहिए।

उन्होंने मुख्यमंत्री, सांसद, विधायक और मेयर से मांग की कि काशीपुर में उपलब्ध सरकारी भूमि पर व्यवस्थित वेंडर जोन विकसित किए जाएं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे वेंडर जोन बनाए जाने के विरोध में नहीं हैं, बल्कि उनका कहना है कि इसके लिए ऐसी जगह का चयन किया जाए जहां यातायात बाधित न हो और आम नागरिकों, बुजुर्गों तथा महिलाओं को परेशानी का सामना न करना पड़े।

सहगल ने कहा कि काशीपुर में बहुत कम ऐसी सड़कें हैं जहां यातायात व्यवस्था को सुधारने की संभावना बनी है। इसलिए ऐसी सड़कों को अतिक्रमण और अव्यवस्थित व्यावसायिक गतिविधियों से बचाना जरूरी है। उन्होंने जनप्रतिनिधियों से इस दिशा में तत्काल कदम उठाने की अपील की।
उन्होंने दिवंगत कैलाश गहतोड़ी का जिक्र करते हुए कहा कि काशीपुर की यातायात समस्या के समाधान के लिए जिन लोगों ने प्रयास किए, उनके कार्यों को आगे बढ़ाना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। उन्होंने कहा कि किसी सड़क का इस तरह व्यावसायीकरण नहीं होना चाहिए जिससे उसके मूल उद्देश्य पर ही असर पड़े।

सहगल ने पत्रकार वार्ता के दौरान एसआईआर प्रक्रिया का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि मतदान करना प्रत्येक नागरिक का मौलिक अधिकार है और किसी भी पात्र व्यक्ति का नाम मतदाता सूची से छूटना गंभीर विषय होगा। उन्होंने मांग की कि एसआईआर की प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष तरीके से संचालित की जाए और किसी भी व्यक्ति के साथ भेदभाव न हो। उन्होंने सरकारी तंत्र से प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने की मांग की।

सहगल ने कहा कि काशीपुर की जनता शहर के विकास, यातायात, गिरिताल-द्रोणासागर, फुटपाथ और नागरिक सुविधाओं से जुड़े मुद्दों पर जनप्रतिनिधियों से ठोस कार्रवाई की अपेक्षा कर रही है। उन्होंने कहा कि केवल घोषणाओं और वादों से समस्याओं का समाधान नहीं होगा, बल्कि धरातल पर काम दिखाई देना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि जनता जाग गई तो जनप्रतिनिधियों को जनता के सवालों का जवाब देना ही पड़ेगा।

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