@विनोद भगत
सुबह-सुबह हम बड़े आत्मविश्वास के साथ घर से निकले। मन में कोई खास काम नहीं था, लेकिन चाल ऐसी थी जैसे शहर की सारी समस्याओं का समाधान करने का ठेका हमें ही मिला हो। जल्दबाजी में कपड़े पहनते समय हमसे एक छोटी-सी भूल हो गई—नेकर उल्टी पहन ली।
हमें क्या पता था कि यह छोटी-सी गलती आगे चलकर एक ऐसा फैशन ट्रेंड बन जाएगी, जिसकी कीमत साढ़े चार हजार रुपये होगी!
हम बाजार की तरफ बढ़े जा रहे थे और रास्ते में लोग हमें देखकर मुस्कुरा रहे थे। कोई पीछे मुड़कर देख रहा था तो कोई अपने साथी को कुछ बताकर हंस रहा था। हमें लगा शायद आज हमारी शक्ल कुछ ज्यादा ही आकर्षक लग रही है। हमने भी मन ही मन सोचा—लगता है आज व्यक्तित्व में कुछ अलग ही निखार आया है।
तभी एक परिचित मिल गए। उन्होंने हमें ऊपर से नीचे तक देखा और जोर से हंस पड़े।
बोले, “यार! तुमने नेकर उल्टी पहन रखी है।”
हम एकबारगी चौंक गए। हाथ अपने आप नेकर की तरफ जाने को हुआ, लेकिन तभी हमारे दिमाग में बिजली कौंधी।
हमने तुरंत गंभीर चेहरा बनाया और बोले, “भाई जी, आप भी पुराने जमाने में जी रहे हो। ये नेकर उल्टी नहीं है, नया फैशन ट्रेंड है।”
परिचित ने चश्मा ठीक करते हुए पूछा, “नया ट्रेंड?”
हमने कहा, “हां! आजकल बड़े-बड़े लोग पहन रहे हैं। विदेशों से चलकर आया है। बाजार में बहुत मुश्किल से मिलती है। हमारी वाली तो साढ़े चार हजार की है।”
साढ़े चार हजार सुनते ही उनकी आंखों में फैशन की चमक आ गई।
बोले, “अच्छा! मुझे भी चाहिए। दुकान कहां है?”
हमने भी बिना देर किए एक दुकान का नाम बता दिया और जाते-जाते कहा, “दुकानदार से कहना—नये फैशन की उल्टी नेकर देना।”
हमारे परिचित ऐसे दौड़े जैसे दुकान बंद होने से पहले देश का सबसे बड़ा फैशन सीक्रेट खरीद लेना हो।
उनके जाते ही हमारा फैशन ज्ञान वहीं समाप्त हो गया।
हमने चारों तरफ देखा और उल्टे कदमों से घर की ओर दौड़ लगा दी। घर पहुंचते ही नेकर सीधी की और चैन की सांस ली।
लेकिन असली मजा तो अगले दिन आया।
सुबह खबर मिली कि मोहल्ले के कई लोग उसी दुकान पर पहुंच चुके हैं। कोई साढ़े चार हजार की उल्टी नेकर मांग रहा था, कोई पूछ रहा था कि ऐसा धागा कौन-सा होता है और कोई दुकानदार से कह रहा था कि “भाई, वही वाला नया फैशन निकालो जो कल से शहर में चल पड़ा है।”
दुकानदार बेचारा परेशान!
किसी को समझा रहा था कि उसके यहां ऐसी कोई उल्टी नेकर नहीं है, तो कोई उससे पूछ रहा था, “हमें बेवकूफ़ समझा है क्या? ज्यादा कीमत चाहते हो मतलब।
आखिरकार दुकानदार को समझ आया कि इस पूरे फैशन आंदोलन की जड़ हम हैं।
वह हमें खोजते हुए घर तक पहुंचा और आते ही बोला, “तुमने मेरा क्या हाल कर दिया? सुबह से लोग मेरी दुकान पर उल्टी नेकर मांग रहे हैं!”
हमने बड़ी मासूमियत से पूछा, “तो इसमें मेरी क्या गलती? मैंने तो सिर्फ एक फैशन ट्रेंड बताया था।”
दुकानदार बोला, “लेकिन ऐसी नेकर है ही नहीं!”
हमने कहा, “अरे भाई, बाजार में जो चीज बिकने लगे वही तो फैशन है। पहले फैशन आता है, फिर बाजार उसे पैदा करता है।”
दुकानदार ने माथा पकड़ लिया।
उस दिन हमें एक बहुत बड़ा जीवन-दर्शन समझ आया—आजकल लोग चीज को देखकर फैशन नहीं बनाते, फैशन सुनकर चीज खरीदने निकल पड़ते हैं।
और हां, उस दिन के बाद हमने एक नियम बना लिया है—घर से निकलने से पहले नेकर जरूर देख लेते हैं कि सीधी है या उल्टी।
लेकिन अगर कभी फिर गलती से उल्टी पहन भी ली, तो घबराएंगे नहीं।
क्योंकि अब हमारे पास जवाब तैयार है—
“भाई साहब, ये उल्टी नहीं है… लिमिटेड एडिशन है!”
और अगर सामने वाला कीमत पूछ ले तो?
“साढ़े चार हजार… बढ़िया धागे की है!”
फिर देखिए, कल तक जो गलती थी, आज वही फैशन है और परसों वही किसी कंपनी का नया ब्रांड!
आजकल तो जो हो रहा है सब उल्टा पुल्टा है। जो गलत हैं दर असल वही सही हैं और जो सही हैं वही गलत हैं। 
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