@शब्द दूत ब्यूरो
भुवनेश्वर। ओडिशा में आयोजित मेडिकल पोस्ट ग्रेजुएट (पीजी) प्रवेश परीक्षा के कथित पेपर लीक मामले ने राज्य की परीक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। परीक्षा के दौरान प्रश्नपत्र सोशल मीडिया और व्हाट्सऐप ग्रुपों पर वायरल होने की सूचना मिलने के बाद राज्य सरकार और पुलिस हरकत में आ गई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है और प्रश्नपत्र साझा करने वाले नेटवर्क की पड़ताल की जा रही है।
कॉलेज प्रशासन ने शुरुआती जांच के आधार पर दावा किया है कि यह परीक्षा शुरू होने से पहले का पारंपरिक पेपर लीक नहीं, बल्कि परीक्षा शुरू होने के बाद प्रश्नपत्र के अनधिकृत ट्रांसमिशन का मामला है। प्रशासन के अनुसार आशंका है कि किसी परीक्षार्थी ने मोबाइल फोन या अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण का उपयोग कर प्रश्नपत्र बाहर भेजा, जिसके बाद वह विभिन्न व्हाट्सऐप ग्रुपों में तेजी से प्रसारित हो गया।
हालांकि, कॉलेज प्रशासन का यह दावा कई नए सवाल भी खड़े कर रहा है। यदि परीक्षा केंद्र पर मोबाइल या अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण ले जाना प्रतिबंधित था, तो फिर किसी छात्र तक मोबाइल कैसे पहुंचा? क्या परीक्षा केंद्रों पर अभ्यर्थियों की तलाशी और निगरानी में लापरवाही हुई? या फिर इस पूरे मामले में किसी शिक्षक अथवा कर्मचारी की भी भूमिका हो सकती है? इन्हीं सभी पहलुओं की जांच अब पुलिस और प्रशासनिक एजेंसियां कर रही हैं।
जांच एजेंसियों ने उन व्हाट्सऐप ग्रुपों की पहचान शुरू कर दी है, जिनमें कथित तौर पर प्रश्नपत्र साझा किया गया। ग्रुप एडमिन और सदस्यों से पूछताछ की तैयारी की जा रही है। पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कहीं इसके पीछे कोई संगठित गिरोह तो सक्रिय नहीं है, जो परीक्षा से जुड़े गोपनीय दस्तावेजों की अवैध तरीके से तस्करी करता हो।
पेपर लीक की घटना ने राजनीतिक माहौल भी गरमा दिया है। कांग्रेस और बीजू जनता दल (बीजद) ने राज्य की भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए हैं। विपक्ष का आरोप है कि राज्य में लगातार परीक्षा संबंधी गड़बड़ियां सामने आ रही हैं, जिससे युवाओं का भविष्य प्रभावित हो रहा है।
विपक्षी नेताओं का कहना है कि यदि परीक्षा प्रणाली सुरक्षित नहीं रह गई है, तो प्रतिभाशाली छात्रों के साथ अन्याय होगा और सरकार को इसकी नैतिक जिम्मेदारी लेनी चाहिए। उन्होंने शिक्षा विभाग के अधिकारियों की जवाबदेही तय करने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
वहीं भाजपा ने विपक्ष के आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया है। भाजपा नेताओं का कहना है कि कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल केवल भाजपा शासित राज्यों के मामलों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करते हैं, जबकि अपने शासन वाले राज्यों में हुई परीक्षा अनियमितताओं पर चुप्पी साध लेते हैं। उन्होंने झारखंड और पंजाब सहित अन्य राज्यों में भी परीक्षा गड़बड़ियों के मामलों का हवाला दिया।
हाल ही में देश में सार्वजनिक परीक्षाओं में अनियमितताओं और पेपर लीक को रोकने के लिए नया कानून लागू किया गया है। इसके बावजूद ओडिशा की यह घटना सामने आने से कानून की प्रभावशीलता पर बहस छिड़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल कठोर कानून बना देना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि परीक्षा केंद्रों पर डिजिटल निगरानी, सख्त सुरक्षा व्यवस्था, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की प्रभावी जांच और जवाबदेही तय करने जैसी व्यवस्थाओं को भी मजबूत करना होगा।
फिलहाल पुलिस विभिन्न तकनीकी और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर जांच कर रही है। यदि जांच में किसी छात्र, कर्मचारी या बाहरी गिरोह की संलिप्तता सामने आती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर देश की परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और सुरक्षा को लेकर गंभीर बहस छेड़ दी है। अब सभी की निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि यह केवल परीक्षा के दौरान प्रश्नपत्र का अवैध प्रसारण था या फिर इसके पीछे किसी बड़े संगठित नेटवर्क की भूमिका है।
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