@शब्द दूत ब्यूरो (06 मई 2026)
देहरादून। उत्तराखंड में वक्फ संपत्तियों को लेकर सरकार ने सख्त रुख अपना लिया है। धामी सरकार ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि जो वक्फ संपत्तियां केंद्र सरकार के ‘उम्मीद पोर्टल’ पर निर्धारित समयसीमा तक दर्ज नहीं की जाएंगी, उन्हें अवैध कब्जा मानते हुए सरकार अपने नियंत्रण में ले सकती है।
जानकारी के अनुसार, राज्य में बड़ी संख्या में ऐसी संपत्तियां सामने आई हैं जो वक्फ बोर्ड में दर्ज हैं, लेकिन ‘उम्मीद पोर्टल’ पर उनका कोई रिकॉर्ड नहीं है। जांच में यह भी सामने आया है कि कई संपत्तियों के पास वैध भूमि दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं और कुछ मामलों में सरकारी जमीनों पर कब्जा कर उन्हें वक्फ संपत्ति के रूप में दर्ज किया गया।
केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए नए नियमों के तहत सभी वक्फ संपत्तियों का विवरण पहले 6 दिसंबर 2025 और बाद में बढ़ाकर 6 फरवरी 2026 तक ‘उम्मीद पोर्टल’ पर अपलोड करना अनिवार्य किया गया था। इसके लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम भी चलाए गए थे, बावजूद इसके बड़ी संख्या में संपत्तियां अब तक दर्ज नहीं हो पाई हैं।
राज्य में वक्फ संपत्तियों की स्थिति
उत्तराखंड में कुल 7288 वक्फ संपत्तियां सूचीबद्ध हैं। इनमें 2105 औकाफ संपत्तियां और शेष 5388 संपत्तियां (जिनमें मस्जिद, मदरसे, कब्रिस्तान, ईदगाह, मजार आदि शामिल हैं) दर्ज हैं। इनमें से केवल 1597 संपत्तियां ही अनुमोदित हो पाई हैं, जबकि हजारों संपत्तियों का विवरण अभी भी ‘उम्मीद पोर्टल’ पर नहीं चढ़ाया गया है।
दस्तावेजों की कमी बनी बड़ी वजह
विशेषज्ञों का मानना है कि कई कब्जेदारों के पास जमीन से जुड़े वैध दस्तावेज नहीं हैं, जिसके कारण वे पोर्टल पर जानकारी अपलोड करने से बच रहे हैं। वहीं कुछ मामलों में जानकारी के अभाव को भी कारण बताया जा रहा है, हालांकि सरकार द्वारा प्रशिक्षण दिए जाने के चलते यह तर्क कमजोर माना जा रहा है।
सरकार की चेतावनी
अल्पसंख्यक मामलों के विशेष सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते ने स्पष्ट कहा है कि 5 जून तक जिन संपत्तियों का विवरण पोर्टल पर दर्ज नहीं होगा, उन्हें अवैध कब्जा मानकर सरकार में निहित कर दिया जाएगा। इसके लिए भूमि रिकॉर्ड की गहन जांच भी शुरू कर दी गई है।
वहीं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार ने पर्याप्त समय और अवसर दिया है। अब भी जो लोग नियमों का पालन नहीं करेंगे, उन्हें सख्त कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा, जिसमें संपत्तियों का सरकारी नियंत्रण में लिया जाना भी शामिल है।
सरकार के इस कदम से प्रदेश में वक्फ संपत्तियों को लेकर बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की संभावना बन गई है।
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