Breaking News

चेतावनी :अप्रैल में ही मई-जून जैसी तपिश: 2026 की गर्मी तोड़ सकती है सवा लाख साल का रिकॉर्ड, देश में हीट डोम और अल नीनो का डबल खतरा, आने वाले महीने और जलायेंगे

@शब्द दूत ब्यूरो (24 अप्रैल 2026)

देशभर में इस साल गर्मी ने समय से पहले ही अपने तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। अप्रैल का महीना आमतौर पर प्री-समर माना जाता है, लेकिन इस बार तापमान मई-जून के स्तर तक पहुंच गया है। राजधानी दिल्ली में अधिकतम तापमान 42 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो पिछले साल इसी दिन के मुकाबले करीब 2 से 3 डिग्री अधिक है।

अगर पिछले पांच वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो गर्मी का ट्रेंड लगातार बढ़ता हुआ दिखाई देता है। 2022 में अप्रैल का औसत तापमान 37 डिग्री था, जो 2023 में 37.5, 2024 में 38, 2025 में 39 और 2026 में बढ़कर करीब 40.5 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। यह बदलाव जलवायु के गंभीर संकट की ओर इशारा करता है।

विशेषज्ञों के अनुसार इस बार गर्मी के पीछे सबसे बड़ा कारण “हीट डोम” है। यह एक हाई प्रेशर सिस्टम होता है, जो गर्म हवा को जमीन के पास कैद कर देता है। इससे न केवल तापमान बढ़ता है, बल्कि बादल भी नहीं बन पाते और सूरज की सीधी किरणें जमीन को और अधिक गर्म कर देती हैं। परिणामस्वरूप मैदानी इलाके भट्टी की तरह तपने लगते हैं।

इसके साथ ही वैश्विक मौसमीय घटनाएं भी इस स्थिति को और गंभीर बना रही हैं। एल नीनो के सक्रिय होने की संभावना जताई जा रही है, जो समुद्र के तापमान को बढ़ाकर पूरी दुनिया में गर्मी बढ़ाता है। वहीं ला नीना का असर इस अप्रैल में खत्म हो रहा है, जिससे ठंडक और बारिश का संतुलन कमजोर पड़ जाएगा। अमेरिका के क्लाइमेट प्रेडिक्शन सेंटर के मुताबिक जून से अगस्त के बीच अल नीनो की 62% और मजबूत अल नीनो की 80% तक संभावना है।

इस बढ़ती गर्मी का असर सिर्फ तापमान तक सीमित नहीं है। नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार देश के करीब 60 करोड़ लोगों को आने वाले समय में पानी की भारी किल्लत का सामना करना पड़ सकता है। 2030 तक पानी की मांग सप्लाई से दोगुनी हो सकती है।

वहीं केंद्रीय जल आयोग के आंकड़ों के अनुसार देश के 166 प्रमुख जलाशयों में पानी का स्तर मात्र 57% रह गया है। दक्षिण भारत के कई जलाशयों में यह स्थिति और भी चिंताजनक है।

गर्मी का असर कृषि, स्वास्थ्य और अर्थव्यवस्था पर भी साफ दिखाई दे रहा है। भारत की 52% खेती सिंचाई पर निर्भर है, ऐसे में बढ़ती गर्मी से फसलों की उत्पादकता घट सकती है और महंगाई बढ़ सकती है। Lancet Countdown India के अनुसार 2023 में गर्मी के कारण 18,000 श्रम घंटे नष्ट हुए, जिससे देश को करीब 14,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।

प्रसिद्ध वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग पहले ही चेतावनी दे चुके हैं कि जलवायु परिवर्तन मानवता के लिए सबसे बड़े खतरों में से एक है, और अब इसके संकेत स्पष्ट रूप से दिखने लगे हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले मई और जून के महीने और भी खतरनाक हो सकते हैं। ऐसे में सरकार और आम लोगों दोनों को ही अभी से सतर्क रहने और तैयारी करने की जरूरत है। हीट एक्शन प्लान, जल संरक्षण और सतर्क जीवनशैली ही इस संकट से बचाव का एकमात्र रास्ता है।

Check Also

हरिद्वार में अवैध मजार पर चला बुलडोजर, 8 बीघा सरकारी भूमि अतिक्रमण मुक्त, नोटिस के बाद प्रशासन की कार्रवाई, खादिम पहले ही समेट ले गए सामान, देखिए वीडियो

🔊 Listen to this @शब्द दूत ब्यूरो (22 अप्रैल 2026) हरिद्वार। देवभूमि के प्रमुख तीर्थ …

googlesyndication.com/ I).push({ google_ad_client: "pub-