इस घटना ने एक बार फिर शैक्षणिक संस्थानों की सुरक्षा, परीक्षा अनुशासन और सरकारी कर्मचारियों के आचरण को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
@शब्द दूत ब्यूरो (08 जून 2026)
देहरादून। राजकीय पॉलीटेक्निक पित्थूवाला में परीक्षा के दौरान कथित नकल पकड़े जाने से शुरू हुआ विवाद अब बड़ा प्रशासनिक मामला बन गया है। मामले में शिक्षकों के साथ कथित मारपीट और सरकारी कार्य में बाधा डालने के आरोपों के बाद वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) प्रमेंद्र सिंह डोबाल ने पुलिस दूरसंचार शाखा में तैनात उपनिरीक्षक महेश कंडवाल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
जानकारी के अनुसार 4 जून को राजकीय पॉलीटेक्निक पित्थूवाला में परीक्षा के दौरान दो छात्रों पर एक-दूसरे की उत्तर पुस्तिका से नकल करने का आरोप लगा। परीक्षा समिति ने छात्रों से पूछताछ की और एक छात्र से लिखित माफीनामा लेने के बाद उसे परीक्षा जारी रखने की अनुमति दी। बताया जा रहा है कि यह पूरी घटना कक्षा में लगे सीसीटीवी कैमरों में भी रिकॉर्ड हुई।
विवाद अगले दिन तब बढ़ गया जब आरोपित छात्र के पिता महेश कंडवाल, जो पुलिस विभाग में उपनिरीक्षक हैं, अपने परिजनों के साथ संस्थान पहुंचे। शिक्षकों का आरोप है कि समूह ने कॉलेज परिसर में घुसकर कर्मचारियों से बहस की, नियंत्रण कक्ष में हंगामा किया और कई शिक्षकों व कर्मचारियों के साथ मारपीट की। घटना के वीडियो और सीसीटीवी फुटेज भी सोशल मीडिया पर वायरल हुए हैं।
शिक्षकों का कहना है कि आरोपितों ने न केवल अभद्रता की बल्कि सरकारी कार्य में भी बाधा डाली। घटना के विरोध में कॉलेज के शिक्षक और कर्मचारी काली पट्टी बांधकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं तथा दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
दूसरी ओर छात्र पक्ष ने अलग आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि परीक्षा के दौरान छात्र के साथ मारपीट की गई और उसे काफी देर तक रोके रखा गया। इस संबंध में दोनों पक्षों की ओर से पुलिस को शिकायतें दी गई हैं। पुलिस ने क्रॉस-शिकायत दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी प्रमेंद्र सिंह डोबाल ने उपनिरीक्षक महेश कंडवाल को पद की गरिमा के विपरीत आचरण करने तथा शासकीय कार्य में बाधा पहुंचाने के आरोप में निलंबित कर दिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
इस घटना ने एक बार फिर शैक्षणिक संस्थानों की सुरक्षा, परीक्षा अनुशासन और सरकारी कर्मचारियों के आचरण को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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