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एक अनार सौ बीमार… लोकसभा चुनाव में दिल्ली कांग्रेस के लिए राह आसान नहीं

@शब्द दूत ब्यूरो (28 फरवरी, 2024)

एक लंबे जद्दोजहद के बाद आखिरकार दिल्ली में कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के बीच लोकसभा चुनाव के लिए गठबंधन हो गया और सात में से 4 सीटों पर आम आदमी पार्टी ने अपने उम्मीदवारों की घोषणा भी कर दी. बची हुई तीन लोकसभा सीटों पर कांग्रेस का उम्मीदवार कौन होगा, इसको लेकर पार्टी के भीतर जबरदस्त खींचतान शुरू हो गई है. गठबंधन में कांग्रेस के हिस्से में आई तीन सीटों चांदनी चौक, उत्तर पूर्वी और उत्तर पश्चिम दिल्ली में उम्मीदवार तय करना पार्टी के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है, क्योंकि इन तीनों सीट पर एक से ज्यादा बल्कि तीन-तीन प्रमुख दावेदार अपनी दावेदारी मजबूत करने में जुटे हुए हैं.

दिल्ली में आम आदमी पार्टी से गठबंधन के मुखर विरोधी रहे पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के बेटे संदीप दीक्षित, महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष अलका लांबा और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अनिल चौधरी भी लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए आलाकमान से अपनी इच्छा जता चुके हैं.

2019 में उत्तर पूर्वी सीट से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ चुकी शीला दीक्षित के बेटे संदीप दीक्षित इसी सीट पर अपनी दावेदारी सुनिश्चित करने में जुटे हैं जबकि दिल्ली के मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष अरविंदर सिंह लवली और निवर्तमान प्रदेश अध्यक्ष अनिल चौधरी की नजरें भी इसी सीट पर गड़ी है. 2019 में शीला दीक्षित को 4 लाख से ज्यादा वोट मिले थे लेकिन वो मनोज तिवारी से अपना चुनाव हार गई थी.

दिल्ली की तीन सीटों पर कई दावेदार

इसी तरह चांदनी चौक लोकसभा के लिए 2019 में कांग्रेस उम्मीदवार जयप्रकाश अग्रवाल पौने तीन लाख वोटों के साथ दूसरे नंबर पर थे, इस बार भी इसी सीट से चुनाव लड़ने की उनकी तैयारी है जबकि हाल ही में महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाई गई अलका लांबा भी यहां से अपनी उम्मीदवारी जता रही हैं. हालांकि अलका लांबा पिछले विधानसभा चुनाव में यहाँ से मात्र 3800 वोट ही जुटाकर तीसरे नंबर पर पहुंच गईं थी.

गठबंधन में कांग्रेस के हिस्से में आई तीसरी सीट है उत्तर पश्चिम दिल्ली, जहां 2019 में कांग्रेस तीसरे नंबर पर रही लेकिन इस बार इसी सीट पर उसके चार प्रमुख नेता चुनाव लड़ने का मन बना चुके हैं. कांग्रेस पार्टी के अनुसूचित जाति विभाग के अध्यक्ष राजेश लिलोठिया को इस सीट पर 2019 में 2 लाख 36 हजार वोट मिले थे.

राहुल गांधी के करीबी माने जाने वाले राजेश लिलोठिया कांग्रेस और आम आदमी पार्टी गठबंधन में एक बार फिर इसी सीट पर अपनी किस्मत आजमाना चाहते हैं, जबकि शीला दीक्षित सरकार में कद्दावर मंत्री रहे राजकुमार चौहान, उसी दौर में इस इलाके से पार्टी के मजबूत विधायक रहे जयकिशन और कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता उदित राज ने भी उत्तर पश्चिम दिल्ली लोकसभा के लिए ताल ठोक दिया है.

लोकसभा सीटों पर दावेदारी से बढ़ीं कांग्रेस की मुश्किलें

कुल मिलाकर कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के गठबंधन में कांग्रेस के हिस्से आई तीन सीटों पर उसके 9 प्रमुख नेताओं की दावेदारी ने पार्टी नेतृत्व के लिए चुनौती जैसी स्थिति पैदा कर दी है. लगभग इसी स्थिति से बचने के लिए दिल्ली प्रदेश कांग्रेस की ओर से लगातार आलाकमान पर यह दबाव बनाया जा रहा था कि आम आदमी पार्टी के साथ गठबंधन न हो.

दिल्ली में कांग्रेस के कई नेता दबी जुबान से यह स्वीकार कर रहे हैं की 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी और कांग्रेस को मिलाकर भी इतने वोट नहीं जुड़ पाए, जिससे भाजपा को कड़ी टक्कर दी जा सके, पिछले दोनों लोकसभा चुनाव में कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के वोटो को जोड़ने के बाद भी बीजेपी प्रत्याशियों की लगभग 2 लाख से ज्यादा के अंतर से जीत हुई थी.

ऐसे में कांग्रेस और आम आदमी पार्टी का गठबंधन लोकसभा चुनाव बीजेपी को कितनी चुनौती दे पाएगा. यह तो चुनाव नतीजे के बाद ही पता चलेगा, लेकिन अगर दिल्ली में कांग्रेस अपने हिस्से आई तीन सीटों पर उम्मीदवारों के चयन पर सावधानी नहीं बरतेगी तो निश्चित तौर पर चुनाव से पहले कांग्रेस पार्टी के लिए असहज स्थिति बन सकती है.

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