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सुप्रीम कोर्ट ने पतंजलि को लगाई फटकार, बालकृष्ण को जारी किया कारण बताओ नोटिस

@शब्द दूत ब्यूरो (27 फरवरी 2024)

पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड एक स्वदेशी कंपनी है. इस कंपनी ने 1 मार्च 2012 को ओपन मार्केट में आगाज किया था. आज के समय शायद ही कुछ ऐसा हो जो पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड ना बनाती हो. भारतीय बाज़ार में पतंजलि आयुर्वेद ने अपनी एक मज़बूत पकड़ बना ली है. पतंजलि कई विदेशी कंपनियों को कड़ी टक्कर भी दे रही है. खाद्य सामाग्री के साथ ही पतंजलि के सौन्दर्य उत्पाद और औषधियाँ भी बाजार में उपलब्ध हैं. पिछले साल दिसम्बर में पतंजलि ने एक विज्ञापन जारी किया था. जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने संज्ञान लेते हुए आचार्य बालकृष्ण को कारण बताओ नोटिस जारी किया है.

सुप्रीम कोर्ट ने दवा के प्रभाव पर भ्रामक दावों के लिए पतंजलि को फटकार लगाई है, साथ ही बालकृष्ण यादव को कारण बताओ नोटिस जारी किया है. दरअसल पिछले साल पतंजलि ने एक विज्ञापन जारी किया था. जिसमें मधुमेह, बीपी, थायराइड, अस्थमा, ग्लूकोमा और गठिया आदि जैसी बीमारियों से “स्थायी राहत, इलाज और उन्मूलन” का दावा किया था. पतंजलि द्वारा जारी किए गए विज्ञापन के साथ ही रामदेव और उनके सहयोगी आचार्य बालकृष्ण की प्रेस कॉन्फ्रेंस पर भी संज्ञान लिया था. इसी विज्ञापन पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को स्पष्टीकरण देने के लिए कहा है. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को निर्देश देते हुए कहा है कि उस विज्ञापन के खिलाफ केंद्र सरकार ने क्या कदम उठाए है, केंद्र सरकार उसका स्पष्टीकरण दे.

पतंजलि ने किया कोर्ट के आदेश का उलंघन

पतंजलि पर आरोप है कि ये विज्ञापन इन बीमारियों की दवा को नियंत्रित करने वाले नियमों का उल्लंघन करता है. दिलचस्प बात यह है कि सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर 2023 में पतंजलि को ऐसे विज्ञापन जारी नहीं करने का निर्देश दिया था. लेकिन पतंजलि ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन करते हुए इस विज्ञापन को जारी किया था. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कोर्ट की अवमानना ​​के लिए रामदेव और बालकृष्ण को कारण बताओ नोटिस जारी किया है.

देश को धोखे में रखा गया

अदालत ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में ऐसा न करने का हलफनामा देने के बावजूद दोनों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में टिप्पणियां कीं. साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने कहा, पूरे देश को धोखे में रखा गया है, स्थायी राहत शब्द अपने आप में भ्रामक है. सुप्रीम कोर्ट ने पतंजलि को किसी भी दवा पर कोई भी विज्ञापन देने के लिए मना किया है. कोर्ट ने आदेश में ये भी कहा है कि पतंजलि, स्वामी रामदेव और बालकृष्ण किसी भी चिकित्सा पद्धति (एलोपैथी) पर कोई भी टिप्पणी नहीं करेंगे. जानकारी के लिए आपको बता दें, कोर्ट ने जवाब दाखिल करने के लिए दो हफ्ते का समय दिया है.

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